कैसा रहेगा आज संसद का फर्स्ट डे-फर्स्ट शो?,ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव और भारत-अमेरिका डील पर हंगामा तय
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विपक्ष द्वारा 10 फरवरी को नोटिस दिए जाने के बाद से लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर रहे ओम बिरला चर्चा के दौरान बोल सकते हैं और विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकते हैं। | फाइल फोटो

कैसा रहेगा आज संसद का फर्स्ट डे-फर्स्ट शो?,ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव और भारत-अमेरिका डील पर हंगामा तय

विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चुनौती देने के साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और एलपीजी कीमत बढ़ोतरी पर बहस की तैयारी में है, इन मुद्दों के चलते संसद सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।


भारत में संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार (9 मार्च) से होने जा रही है। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसमें 118 INDIA गठबंधन के सांसदों का समर्थन है और जिसमें लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की गई है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होगी। साथ ही संकेत हैं कि 2 अप्रैल तक चलने वाला बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है।

विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, जिसने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान अध्यक्ष को हटाने का नोटिस दिया था, उम्मीद कर रहे हैं कि प्रस्ताव पेश होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही चलाने के दौरान उनके कथित “खुले पक्षपात” पर विस्तृत चर्चा होगी।

शनिवार को ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है। गौरतलब है कि पिछले महीने जब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, के. सुरेश और मोहम्मद जावेद ने यह नोटिस दिया था, तब तृणमूल कांग्रेस ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ लोकसभा सांसद ने कहा कि पार्टी इस प्रस्ताव को वापस लेने वाली नहीं है। उनका दावा है कि INDIA गठबंधन के सभी दलों के वरिष्ठ नेता चर्चा के दौरान बोलेंगे और ऐसे उदाहरण सामने रखेंगे जिनसे यह दिखाया जा सके कि लोकसभा के संरक्षक होने के बावजूद विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, जिन्होंने 10 फरवरी को विपक्ष द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद से सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं की है, चर्चा के दौरान अपनी बात रख सकते हैं और विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकते हैं। केंद्र सरकार भी बिड़ला के बचाव में एनडीए के वरिष्ठ मंत्रियों और सांसदों को बोलने के लिए आगे कर सकती है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं।

हालांकि बिड़ला ने नोटिस के बाद सदन की कार्यवाही नहीं चलाई, लेकिन उन्होंने अध्यक्ष के प्रशासनिक कार्य जारी रखे हैं। इनमें 60 से अधिक संसदीय मैत्री समूहों का गठन भी शामिल है, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसद शामिल हैं। सत्ता पक्ष के सांसद इसे अध्यक्ष की निष्पक्षता का उदाहरण बता सकते हैं।

उधर बिड़ला और एनडीए के वरिष्ठ सांसदों की रणनीति विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों पर निशाना साधने की भी हो सकती है। उन पर संसद की कार्यप्रणाली के नियमों का बार-बार उल्लंघन करने और यह कहकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया जा सकता है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता।

लोकसभा की अध्यक्षता कौन करेगा?

मई 2019 के बाद से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है, इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता कौन करेगा। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य के अनुसार नियमों के मुताबिक अध्यक्ष को हटाने से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उपाध्यक्ष सदन की अध्यक्षता करते हैं, जबकि अध्यक्ष सामान्य सांसद की तरह चर्चा में भाग लेकर अपना पक्ष रख सकते हैं।

लेकिन चूंकि पिछले लगभग सात वर्षों से उपाध्यक्ष नहीं है, इसलिए यह स्थिति थोड़ी अस्पष्ट है। अब संभव है कि अध्यक्ष स्वयं तय करें कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कौन अध्यक्षता करेगा। वे अध्यक्षों के पैनल में से किसी सदस्य या किसी अन्य सांसद को भी यह जिम्मेदारी दे सकते हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि अध्यक्षों के पैनल में शामिल वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदंबिका पाल या पी.सी. मोहन को इस चर्चा की अध्यक्षता के लिए चुना जा सकता है।

चर्चा समाप्त होने के बाद इस प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा जाएगा। विपक्ष को अच्छी तरह पता है कि उसके पास इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या (सदन की कुल संख्या का बहुमत) नहीं है। फिर भी उसका कहना है कि उसे संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस आखिरी विकल्प के रूप में देना पड़ा, क्योंकि उसके मुताबिक असाधारण परिस्थितियां खुद स्पीकर के व्यवहार से पैदा हुई हैं।

कांग्रेस के कम्यूनिकेशन प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य वास्तव में स्पीकर को पद से हटाना नहीं है, बल्कि एक वैध और संवैधानिक संसदीय माध्यम के जरिए यह दर्ज कराना है कि विपक्ष को इस बात पर गंभीर आपत्ति है कि ओम बिरला लोकसभा की कार्यवाही को “खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण तरीके” से चला रहे हैं, जिससे भाजपा को फायदा मिलता है और विपक्ष की आवाज दबाई जाती है।

विपक्ष का बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का प्लान

विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा मंगलवार तक खत्म होने की संभावना है, लेकिन इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में हंगामा जारी रहने के आसार हैं। सूत्रों के अनुसार INDIA गठबंधन के नेता पिछले महीने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते पर विस्तृत चर्चा की मांग दोबारा उठाने वाले हैं।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने इस समझौते को “किसान विरोधी और देश के आर्थिक व संप्रभु हितों के खिलाफ” बताया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे युद्ध के कारण इस मुद्दे पर चर्चा की मांग और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि इसके भारत पर व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव पड़ सकते हैं।

विपक्ष यह मुद्दा भी उठा सकता है कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अमेरिका के इस बयान से राहुल गांधी का यह दावा सही साबित होता है कि “मोदी सरकार का अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारत के आर्थिक हितों से समझौता है।”

विपक्ष संसद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ भी विरोध करने की तैयारी में है, जो 7 मार्च से लागू हुई है।

इसके अलावा INDIA गठबंधन, खासकर कांग्रेस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी हमला करने की तैयारी में है। अमेरिका में सामने आए ‘एपस्टीन फाइल्स’ में पुरी का नाम कई बार आने के बाद कांग्रेस उनके इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि पुरी के दिवंगत कारोबारी Jeffrey Epstein के साथ कई ईमेल आदान-प्रदान और व्यक्तिगत मुलाकातों का खुलासा हुआ है। एपस्टीन को 2008 में अमेरिका में कई मामलों, जिनमें बाल यौन शोषण के आरोप शामिल थे, में दोषी ठहराया गया था और 2019 में एक अन्य सेक्स ट्रैफिकिंग मामले की सुनवाई से पहले हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।

केंद्र का ममता बनर्जी पर निशाना साधने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव जल्द घोषित होने वाले हैं। ऐसे में केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करने की तैयारी में है।

दरअसल शनिवार को राष्ट्रपति द्रोपर्दी मुर्मू ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी उन्हें पश्चिम बंगाल आने नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि जब वह सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित इंटरनेशनल संथाल काउंसिल के कार्यक्रम में संथाल आदिवासियों से मिलने पहुंचीं, तो राज्य प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की और इसके बजाय बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईंपुर में एक अलग कार्यक्रम में जाने के लिए मजबूर किया, जहां बहुत कम लोग मौजूद थे।

ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का इस्तेमाल भाजपा बंगाल चुनाव से पहले राजनीतिक मकसद के लिए कर रही है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने “देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान करके सारी सीमाएं पार कर दी हैं।”

केंद्र सरकार भारतीय युवा कांग्रेस के ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ को लेकर भी कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है। पिछले महीने आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बिना शर्ट के विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। चिब और कुछ अन्य को बाद में जमानत मिल गई। पुलिस और भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह प्रदर्शन “भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने” और “प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने” की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।

संसद में टकराव के आसार

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार को संसद की कार्यवाही में व्यवधान को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है, खासकर यूनियन बजट और अनुदान मांगों को पारित कराने के मामले में।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही कह चुके हैं कि यदि विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा तो सरकार ‘गिलोटिन’ प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगी। इस संसदीय प्रक्रिया के तहत बजट और जिन अनुदान मांगों पर सदन में चर्चा नहीं हो पाती, उन्हें एक साथ मतदान के लिए रखा जा सकता है। एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम विपक्ष को अपने एजेंडे को पटरी से उतरने नहीं देंगे।”

संसद में अचानक नया विधेयक लाने की तैयारी

हाल के वर्षों की तरह इस बार भी संभावना है कि केंद्र सरकार संसद में कोई “सरप्राइज” विधेयक पेश करे, जिस पर पहले से विपक्ष या अन्य पक्षों से कोई चर्चा नहीं की जाएगी।

पिछले महीने किरेन रिजिजू ने भी कहा था कि सरकार संसद में एक महत्वपूर्ण बिल लाना चाहती है, लेकिन उसके विवरण पहले से सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।

इस नए कानून को लेकर विपक्षी नेताओं के बीच अटकलें जारी हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि सरकार विवादित इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के विकल्प के तौर पर राजनीतिक दलों के फंडिंग से जुड़ा नया कानून ला सकती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दो साल पहले रद्द कर दिया था।

वहीं कुछ अन्य विपक्षी नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों को देखते हुए सरकार कोई बड़ा लोकलुभावन या राजनीतिक रूप से ध्रुवीकरण करने वाला कदम भी उठा सकती है।

हालांकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि बिना व्यापक चर्चा और परामर्श के लाया गया कोई भी कानून संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह कड़े विरोध का सामना करेगा।

इन सबके बीच संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

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