
चीन का मुद्दा, सेना प्रमुख की किताब और 56 इंच की छाती, राहुल गांधी के वार से सियासी भूचाल, क्या संसद चलेगा?
सदन के बाहर आने के बाद राहुल गांधी ने कहा, मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है. मैं सिर्फ़ 2–3 लाइनें कहना चाहता हूँ. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. उन्होंने कहा, ये शब्द मेरे नहीं हैं, बल्कि सेना प्रमुख के हैं.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार 2 फरवरी 2026 को लोकसभा की कार्यवाही में जोरदार हंगामा हुआ जिसके बाद सदन की कार्यवाही को 3 फरवरी को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा. दरअसल नेता विपक्ष राहुल गांधी सदन में चीन का मुद्दा उठाना चाहते थे. लेकिन दो बार सदन की स्थगित करना पड़ा. और फिर तीसरी बार जब सदन बैठा तो फिर राहुल ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की उस पुस्तक का हवाला देकर चीन को लेकर बोलना शुरू किया जो छपा नहीं है. इसके बाद सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
सदन के बाहर आने के बाद राहुल गांधी ने कहा, मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है. मैं सिर्फ़ 2–3 लाइनें कहना चाहता हूँ. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. उन्होंने कहा, ये शब्द मेरे नहीं हैं, बल्कि सेना प्रमुख के हैं. यह वही बातचीत है जो उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ की थी. मैं सदन में सिर्फ़ वही कहना चाहता हूँ, जो सेना प्रमुख ने लिखा है और जो निर्देश उन्हें दिए गए थे. राहुल ने कहा, लेकिन न जाने क्यों मोदी सरकार डर रही है. पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, मुद्दा यह नहीं है कि ज़मीन ली गई या नहीं उस पर बाद में चर्चा होगी. असल सवाल यह है कि जब देश पर संकट आता है, तो देश का नेता दिशा देता है, ज़िम्मेदारी से भागता नहीं है.
राहुल ने बताया कि, सेना प्रमुख ने अपनी किताब में यह बात साफ़ लिखा है, लेकिन उस किताब को छपने नहीं दिया जा रहा है. सरकार सेना प्रमुख के नज़रिए से इतनी डरी हुई क्यों है? उनकी बात सामने आएगी तो देश सीखेगा प्रधानमंत्री के बारे में, रक्षा मंत्री के बारे में, और यह भी कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को कैसे निराश किया. उन्होंने कहा, जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में साफ़ लिखा है.
मैं उसी को उद्धृत कर रहा हूँ, फिर भी मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है. सरकार डरती है कि अगर यह किताब सामने आ गई, तो देश को सच पता चल जाएगा कि जब चीन हमारी सीमा की ओर बढ़ रहा था, तब ‘56 इंच की छाती’ आखिर गई कहाँ?
इससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राहुल गांधी कांग्रेस की ओर बोलने के लिए खड़े हुए और पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की उस किताब के एक अंश का जिक्र करने लगे जो अभी तक छपा नहीं है. इसपर सत्ता पक्ष से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जाहिर करते हुए स्पीकर ओम बिरला से मांग किया कि राहुल गांधी को इसे पढ़ने से रोका जाए. जब ये सदन में चल रहा था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे.
राजनाथ सिंह ने कहा कि, नेता विपक्ष को सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अपुष्ट चीजों के बारे में सदन में उल्लेखित नहीं करना चाहिए. रक्षा मंत्री बोले, ये सदन के नियमों के खिलाफ है.
बहरहाल राहुल गांधी ने साफ किया है कि वो इस मुद्दे को सदन में जरूर उठायेंगे.

