
LPG के लिए भारत किस पर निर्भर? संकट में नए सप्लायर की तलाश
देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी से लंबी कतारें लग रही हैं। आयात पर निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव ने गैस सप्लाई को संकट में डाल दिया है।
देश के कई शहरों से इन दिनों एलपीजी गैस के लिए लोग कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कहीं कहीं झड़प की भी खबरें आ रही हैं। कहीं गैस की कमी के कारण रेस्तरां और छोटे व्यवसाय अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। कई उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करना मुश्किल हो गया है और बुकिंग के बाद भी सप्लाई में देरी हो रही है।
सरकार का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। अब गैस की आपूर्ति के लिए अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से भी सप्लाई लेने की कोशिश की जा रही है। अब तक भारत मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर ही गैस आपूर्ति के लिए निर्भर रहा है।
बढ़ती मांग बनी बड़ी चुनौती
भारत में एलपीजी की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या में करोड़ों की बढ़ोतरी हुई है। आज देश के लगभग 98 प्रतिशत परिवारों तक एलपीजी की पहुंच हो चुकी है। इसके अलावा औद्योगिक विकास तेज होने के कारण मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उद्योगों में भी गैस की मांग बढ़ी है।
हालांकि मांग बढ़ने के मुकाबले घरेलू उत्पादन में उतनी वृद्धि नहीं हुई है। यही वजह है कि भारत को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता
भारत के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि एलपीजी आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। यह वही समुद्री मार्ग है जो खाड़ी देशों को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। फिलहाल क्षेत्र में चल रहे तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण इस मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे सप्लाई प्रभावित होने का जोखिम है।
भारत जिन देशों से एलएनजी और एलपीजी आयात करता है, उनमें मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, ओमान और अंगोला शामिल हैं। इन देशों से आने वाली अधिकांश सप्लाई भी इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और हमलों के कारण उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है, जिससे संकट और गहरा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया से राहत की उम्मीद
इस चुनौती के बीच भारत अपने आयात स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका भी भारत का एक अहम ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। हालांकि वहां से गैस आयात बढ़ाना तुरंत संभव नहीं है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया से आने वाली गैस सप्लाई भारत के लिए राहत का विकल्प बन सकती है। ऑस्ट्रेलिया से आने वाली गैस चेन्नई के पास स्थित एन्नोर बंदरगाह और ओडिशा के धमरा बंदरगाह तक पहुंचती है। यह मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर नहीं गुजरता, इसलिए मौजूदा संकट से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी विविधता
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संसाधनों के लिए कुछ सीमित देशों पर अत्यधिक निर्भरता लंबे समय में जोखिम भरी साबित हो सकती है। इसलिए भारत अब गैस आयात के स्रोतों और मार्गों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

