ख़ामेनेई की मौत पर लखनऊ में मातम का माहौल, ईरान में बसे रिश्तेदारों की फ़िक्र
x

 तेहरान में रह रहे अलमदार ज़ैदी की बिल्डिंग से कुछ दूर हुआ था धमाका

ख़ामेनेई की मौत पर लखनऊ में मातम का माहौल, ईरान में बसे रिश्तेदारों की फ़िक्र

भारत में शिया मुसलमानों के सबसे बड़े केंद्र लखनऊ में ग़म और आक्रोश है। यहाँ से शिया न सिर्फ़ बड़ी संख्या में ईरान में ज़ियारत (धार्मिक यात्रा) के लिए जाते हैं बल्कि वहाँ दीनी तालीम हासिल करने के लिए भी युवा जाते हैं।


Lucknow families anxious over safety of kin in Iran : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद लखनऊ में शिया मुस्लिम समुदाय गहरे शोक और आक्रोश में डूबा हुआ है।एक तरफ़ शिया अपने धार्मिक नेता के लिए मातम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर जुलूस निकालकर अमेरिका और इजरायल के लिए अपने गुस्से का इज़हार कर रहे हैं।ईरान में लखनऊ के छात्र बड़ी संख्या में हैं।वजह यह है कि शिया समुदाय में धर्मगुरु बनने के लिए पढ़ाई वहीं होती है।साथ ही ज़ियारत करने गए यात्री वहाँ फंसे हैं।

अपनों के लिए फ़िक्रमंद हैं लखनऊ के कई परिवार-

अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई जिसे ईरान ही नहीं दुनिया भर के शिया समुदाय में ‘शहादत’ (martyrdom) के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना के बाद भारत में शिया मुसलमानों के सबसे बड़े केंद्र लखनऊ में ग़म और आक्रोश है जहां बड़ी संख्या में शिया मुसलमान रहते हैं।लखनऊ से शिया न सिर्फ़ बड़ी संख्या में ईरान में ज़ियारत (धार्मिक यात्रा) के लिए जाते हैं बल्कि वहाँ दीनी तालीम हासिल करने के लिए भी युवा जाते हैं।साथ ही मेडिकल और इससे संबंधित पढ़ाई के लिए भी यहाँ के छात्र ईरान का रुख़ करते हैं।लखनऊ के कई परिवार अपनों के लिए चिंतित हैं।हालाँकि शिया मुसलमानों का भावनात्मक जुड़ाव ईरान के साथ ऐसा है कि ये लोग उनके वापस आने की बात नहीं कर रहे हैं।बस उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।लखनऊ में खामेनेई की मौत के बाद तीन दिन के शोक का ऐलान किया गया है।साथ ही धर्मगुरुओं की अपील पर इमामबाड़े के पास बड़ी संख्या में जमा होकर लोगों ने अपने ग़म और गुस्से का इज़हार किया।



(लखनऊ में रूमी दरवाज़े के सामने प्रदर्शन)

घर से कुछ दूर हुआ था धमाका, सुरक्षा और सेहत को लेकर है चिंता-

लखनऊ के अलमदार ज़ैदी तेहरान(Tehran) में हैं।वहाँ वो हिंदी चैनल में एंकर हैं।उन्ही अभी कुछ दिन पहले उनकी हार्ट सर्जरी हुई है।घर के लोग कहते हैं कि तब ये पता नहीं था कि हालत इस कदर बिगड़ जाएँगे।अपनी सेहत की वजह से अलमदार ज़ैदी यात्रा करने की स्थिति में भी बहुत ज़्यादा नहीं हैं।ऐसे में अगर किसी भी तरह का पैनिक होता है तो और ज़्यादा मुश्किल होगी।उनके भाई शाहकार ज़ैदी उनकी सेहत के लिए चिंतित हैं। ज़ैदी कहते हैं '' रविवार को बात हुई है।वो सुरक्षित हैं, हालाँकि वहाँ के हालात तो किसी से छिपे नहीं हैं। इसी वजह से हम लोग भी चिंतित हैं।उनकी बिल्डिंग से कुछ दूर ब्लास्ट हुआ था वो बता रहे थे।’’ उनके एक मित्र बताते हैं कि शनिवार को बात हुई थी और फ़ोन पर बातचीत के दौरान सायरन की आवाज़ें सुनाई पड़ रही थीं।अलमदार ने बताया था कि सामने की बिल्डिंग में कुछ धमाका हुआ है।

इंटरनेट बंद, फ़ोन से भी नहीं हो पा रही है बात-

ईरान में धार्मिक शिक्षा के केंद्र कॉम ( Qom) में दीनी तालीम हासिल करने गए मोहम्मद शादाब के भाई मोहम्मद आफताब का कहना है कि शनिवार सुबह उनसे बात हुई थी।वहाँ इंटरनेट बंद है तब से अब तक संपर्क नहीं हुआ।मोहम्मद आफताब कहते हैं ''वहाँ हमले के बाद से बात नहीं हुई।शनिवार सुबह बात हुई थी पर हमले के बाद इंटरनेट बंद हो गया।उसके बाद से संपर्क नहीं हो पाया।उम्मीद है कि वो और उनके साथ सभी साथी सलामत होंगे।’’ इसी तरह लखनऊ में कई परिवार हैं जिनके अपने ईरान के अलग-अलग शहरों में हैं और उनको लेकर यहाँ उनके परिवार के लोग चिंतित हैं।


(कोम में दीनी तालीम हासिल करने गए हैं मोहम्मद शादाब)

इसी तरह ईरान में शराफ़त मेंहदी काम करते हैं।अभी लखनऊ में अपनी बेटी की शादी के बाद वापस लौट कर गए हैं।तब नहीं पता था कि हालत इस तरह बिगड़ जाएँगे।शराफ़त मेहंदी के रिश्तेदार मोहम्मद अली काज़मी कहते हैं '' मार्च में उनका रिटायरमेंट है।इसी वजह से फिर अभी वापस चले गए थे।पर वहाँ संपर्क नहीं हो पाने से बहुत चिंता हो रही है।हम लोग उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।’’

हालाँकि जंग की चपेट में मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों में जो लोग हैं उनको लेकर अभी यहाँ उतनी चिंता नहीं दिख रही है लेकिन ईरान में रह रहे लोगों को लेकर यहाँ उनके रिश्तेदार फ़िक्रमंद हैं।कई लोग अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा के लिए उनका नाम और उनके बारे में जानकारी नहीं साझा कर रहे पर उनका कहना है कि वहाँ हालात ख़राब हैं।सबसे बड़ी परेशानी वहाँ कम्युनिकेशन सिस्टम के बंद होने से हो रही है।

वरिष्ठ पत्रकार कुलसुम तल्हा कहती हैं '' शिया मुसलमान यह मानते हैं कि हमारी शहादत हमारी मिराज़ है।ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़ा होना हमारा फर्ज़ है।इसलिए जो लोग वहाँ हैं उनके यहाँ रहने वाले रिश्तेदार हालात की वजह से फ़िक्रमंद तो हैं लेकिन यह भी नहीं चाहते कि वो तुरंत वापस आ जाएँ।यह हर शिया का रिलीजियस सेंटीमेंट है।’’ शिया धर्मगुरु और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने लोगों से अपने घर और दुकानों को बंद रख कर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के लिए मातम करने, अपने घरों में काले झंडे लगाने की अपील की है।मौलाना यासूब अब्बास कहते हैं ''यह शोक का समय है।इसके साथ ही यह एकजुटता प्रदर्शित करने का समय भी है ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि शिया समुदाय अपने धार्मिक नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है।’’

Read More
Next Story