
मायावती को नागवार गुजरा राहुल गांधी का कांशीराम पर बोलना, कहा-'कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत'
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रही, लेकिन उसने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया
ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी साल में दलित वोटों को लेकर घमासान मचने वाला है। राहुल गांधी ने एक दिन पहले कांशीराम को याद किया तो बीएसपी सुप्रीमो मायावती का पारा चढ़ गया। उन्होेंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जिस कांग्रेस की “दलित-विरोधी सोच” के विरोध में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था, वही पार्टी अब उन्हें भारत रत्न देने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है।
कांशीराम जयंती कार्यक्रम के बाद बढ़ा विवाद
दरअसल, कांग्रेस ने शुक्रवार को लखनऊ में पहली बार कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया। कांग्रेस ने तय किया कि यह मांग संसद में राहुल गांधी के जरिए उठाई जाएगी।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था कि कांशीराम समाज में बराबरी की बात करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जवाहर लाल नेहरू आज जीवित होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री हो सकते थे। राहुल ने आरोप लगाया कि आज नरेन्द्र मोदी की सरकार ने समाज को “15 और 85 प्रतिशत” में बांट दिया है, जिससे फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है।
मायावती ने कांग्रेस के रिकॉर्ड पर उठाए सवाल
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रही, लेकिन उसने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया और न ही उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कांग्रेस अब कांशीराम को भारत रत्न देने की बात कैसे कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांशीराम के निधन के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, जिसने भी कोई राजकीय शोक घोषित नहीं किया।
बसपा को कमजोर करने की कोशिश का आरोप
बसपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल अलग-अलग हथकंडे अपनाकर बसपा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि 15 मार्च 2026 को कांशीराम जयंती के कार्यक्रमों को पूरे देश में सफल बनाया जाए।
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने डॉ. अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाते हुए दलित समाज को संगठित किया और उन्हें राजनीतिक ताकत दी। उनके अनुसार आज कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक हितों के लिए कांशीराम को याद कर रही हैं, जो अवसरवाद है।
यूपी में दलित वोट का राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश में अब विधानसभा चुनाव को सालभर भी नहीं रह गया है। यहां दलित मतदाता बड़ी राजनीतिक ताकत माने जाते हैं। राज्य में करीब 21 प्रतिशत दलित वोटर हैं और 403 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 से 50 सीटें ऐसी हैं जहां दलित वोटर 20 से 30 प्रतिशत तक हैं, यानी लगभग 130 सीटों पर उनका निर्णायक प्रभाव माना जाता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में आरक्षित 84 सीटों में से 63 सीटें भाजपा और उसके सहयोगियों ने जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को 20 सीटों पर सफलता मिली थी।
राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना
लखनऊ में कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी करीब 35 मिनट तक बोले। कांशीराम जयंती के मंच से उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान की विचारधारा को नहीं मानते। उन्होंने दावा किया कि बड़े अस्पतालों, कंपनियों और शीर्ष पदों पर दलित और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व बहुत कम दिखाई देता है।

