
लाल किला संग्रहालय में वापस आई नेताजी की 'गुम' टोपी, लेकिन परपोते ने कहा, यह असली नहीं
एएसआई)ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की टोपी के लाल किला संग्रहालय में सुरक्षित होने का दावा किया है। लेकिन पूर्व भाजपा नेता चंद्र कुमार बोस ने कहा कि वह असली नहीं है। असली टोपी खुद उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी थी।
दिल्ली के लाल किले स्थित नेताजी संग्रहालय से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की टोपी गायब होने का आरोप लगाने के एक दिन बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि टोपी सुरक्षित रखी गई है। इसे हाल ही में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित एक प्रदर्शनी के लिए ले जाया गया था। हालांकि दिन में बाद में सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्र कुमार बोस ने कहा कि जिन्होंने पहले इस टोपी को देखा था, उन्हें लगता है कि बहाल की गई टोपी असली नहीं है। उन्होंने इस मामले में जांच और सही तरीके से प्रमाणीकरण कराने की भी मांग की।
गुरुवार को एक्स पर किए गए एक पोस्ट में चंद्र कुमार बोस ने कहा था कि उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से नेताजी की टोपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी थी।
पोस्ट में कहा गया, “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, आपको याद होगा कि मैं, मेरे परिवार के सदस्य, हमारे मित्र श्री @SuparnoSatpathy और ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी (OPN) के कई अन्य लोगों ने नेताजी की टोपी आपको सौंपी थी। आपने 23 जनवरी 2019 को नेताजी जयंती (भारत का देशभक्त दिवस) के अवसर पर इसे दिल्ली के लाल किला स्थित नेताजी संग्रहालय में स्वयं समर्पित किया था।”
उन्होंने उस कार्यक्रम की तस्वीरें भी साझा कीं।
चंद्र कुमार बोस ने लिखा, “ओपीएन के एक सदस्य, अधिवक्ता नवीन बामेल, हाल ही में संग्रहालय गए थे और उन्होंने पाया कि नेताजी की टोपी वहां नहीं है। एएसआई में कोई भी यह नहीं बता सका कि वह कहां गई। नेताजी हमारे सबसे बड़े नेता हैं और यह बेहद शर्मनाक है। कृपया आप इस मामले को देखें, मैं आभारी रहूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह ऐतिहासिक वस्तु कहीं गुम हो गई है तो यह पवित्रता का अपमान (सैक्रिलेज) होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स में एएसआई के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि मूल टोपी लाल किले में सुरक्षित रखी गई है। इसे पराक्रम दिवस समारोह के दौरान अस्थायी प्रदर्शनी के लिए पोर्ट ब्लेयर ले जाया गया था। इसलिए 19 जनवरी से 25 जनवरी तक उसका स्थान/डिस्प्ले बॉक्स खाली था।
अधिकारी ने यह भी बताया कि पराक्रम दिवस के बाद टोपी वापस लाकर प्रदर्शनी में रख दी गई थी। लेकिन ताले में समस्या आने के कारण इसे फिर से हटाकर सुरक्षित रख दिया गया। अधिकारी ने कहा, “अब ताला ठीक कर दिया गया है और इसे आज फिर से प्रदर्शित किया जाएगा।”
शुक्रवार दोपहर, एएसआई द्वारा टोपी को फिर से प्रदर्शित किए जाने के कुछ घंटे बाद बोस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “#NetajiCap मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभारी हूं। उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप से नेताजी की टोपी को लाल किले के नेताजी और आईएनए संग्रहालय में फिर से रख दिया गया है।”
हालांकि उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नेताजी के शोधकर्ताओं और जिन लोगों ने पहले इस टोपी को देखा है, उनका मानना है कि यह असली टोपी नहीं है। यदि जांच और सही प्रमाणीकरण कराया जाए ताकि यह स्थापित हो सके कि यह वास्तव में वही असली #NetajiCap है, तो मैं आभारी रहूंगा।”
2021 में भी ऐसी खबरें आई थीं कि यह टोपी संग्रहालय से गायब हो गई है। उस समय एएसआई ने स्पष्ट किया था कि इस ऐतिहासिक वस्तु को लगभग दो दर्जन अन्य वस्तुओं के साथ कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में प्रदर्शनी के लिए उधार दिया गया था।

