NIA की गिरफ्त में मैथ्यू वैनडाइक, क्या है उसका पूरा नेटवर्क
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NIA की गिरफ्त में मैथ्यू वैनडाइक, क्या है उसका पूरा नेटवर्क

NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक समेत 7 विदेशियों को गिरफ्तार किया है, जो भारत के जरिए म्यांमार जाकर आतंकी समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे।


भारत की आतंकवाद-रोधी एजेंसी National Investigation Agency (NIA) को एक बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने एक अहम ऑपरेशन में एक अमेरिकी नागरिक समेत सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि ये लोग पूर्वोत्तर भारत को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल कर म्यांमार में घुसपैठ करते थे और वहां सक्रिय सशस्त्र समूहों को सैन्य प्रशिक्षण देते थे।गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक की पहचान Matthew VanDyke के रूप में हुई है। United States Embassy ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह स्थिति से अवगत है, लेकिन गोपनीयता कारणों से ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकता।

एयरपोर्ट से हुई गिरफ्तारी

यह कार्रवाई 13 मार्च को की गई, जिसमें कुल सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। कोलकाता एयरपोर्ट से वैनडाइक को गिरफ्तार किया गया, जबकि लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को पकड़ा गया। इन सभी पर आरोप है कि वे भारत के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश कर रहे थे।

गंभीर आरोप और कानूनी कार्रवाई

इन विदेशी नागरिकों पर Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली की एक अदालत ने सभी आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है। यूक्रेन के छह नागरिकों में हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मरियन, होनचारुक मक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं।

अमेरिका और यूक्रेन की प्रतिक्रिया

अमेरिकी दूतावास ने मामले पर सीमित प्रतिक्रिया दी, जबकि यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर अपने नागरिकों तक काउंसलर एक्सेस और उनकी रिहाई की मांग की।यूक्रेन ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उनके नागरिक किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे।

FIR में क्या खुलासा हुआ?

NIA द्वारा दायर FIR के अनुसार, आरोपियों ने मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में बिना अनुमति प्रवेश किया और फिर अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार की। वहां उन्होंने “एथनिक आर्म्ड ऑर्गनाइजेशंस” (EAOs) और भारत में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संपर्क स्थापित किया। FIR में यह भी कहा गया है कि इन लोगों ने सशस्त्र समूहों को कॉम्बैट ट्रेनिंग दी, हथियार उपलब्ध कराए,ड्रोन ऑपरेशन में मदद की।इन गतिविधियों को भाड़े के सैनिक (mercenary) जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय साजिश के संकेत

जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग समय पर टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आए थे और एक तय रूट के जरिए असम के गुवाहाटी होते हुए मिजोरम पहुंचे।इसके बाद वे बिना जरूरी दस्तावेजों के प्रतिबंधित इलाकों में दाखिल हुए और म्यांमार में घुसपैठ की।जांच में यह भी सामने आया है कि यूरोप से बड़ी संख्या में ड्रोन भारत के जरिए म्यांमार भेजे जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल सशस्त्र समूह कर रहे थे।

मिजोरम बना ‘सीक्रेट ट्रांजिट रूट’

मिजोरम के मुख्यमंत्री Lalduhoma पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि राज्य विदेशी नागरिकों के लिए “सीक्रेट ट्रांजिट रूट” बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जून से दिसंबर 2024 के बीच करीब 2000 विदेशी मिजोरम आए, जिनमें से कई सीधे म्यांमार के चिन हिल्स इलाके में सैन्य प्रशिक्षण देने पहुंचे।

कौन हैं मैथ्यू वैनडाइक?

Matthew VanDyke इस मामले का सबसे चर्चित चेहरा हैं। वे एक अमेरिकी मीडिया पर्सनालिटी हैं और “Sons of Liberty International (SOLI)” नामक संगठन के संस्थापक हैं, जो कथित तौर पर तानाशाही के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षण देता है।

वैनडाइक 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ लड़ाई लड़ी और बाद में युद्धबंदी भी बने। इसके बाद वे इराक, सीरिया और हाल ही में यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं।

यूक्रेन का विरोध

यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर औपचारिक विरोध दर्ज करते हुए तत्काल रिहाई और काउंसलर एक्सेस की मांग की है। उनका कहना है कि भारत में कई प्रतिबंधित क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान नहीं होती, जिससे अनजाने में नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

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