
स्पीकर ओम बिरला के विरोध में सबसे आगे दस्तखत से दूर, राहुल गांधी पर सवाल
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा, 120 सांसदों ने हस्ताक्षर किए। राहुल गांधी ने संसदीय गरिमा का हवाला देकर साइन नहीं किया।
Om Birla No confidence motion: कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा के सेक्रेटरी को सौंप दिया है। लेकिन खास बात है प्रस्ताव पर दस्तखत करने वाले सांसदों में राहुल गांधी का नाम नहीं है। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों के 120 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। बता दें कि लोकसभा के महासचिव को सौंपे नोटिस के बाद स्पीकर ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया है।
कांग्रेस के नेताओं से सवाल पूछा गया कि राहुल गांधी खुलकर स्पीकर का विरोध कर रहे थे। ऐसे में उन्होंने लोकसभा महासचिव को सौंपे गए नोटिस पर पर उन्होंने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए। इस सवाल के जवाब में कांग्रेस का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को देखते हुए ऐसा करना ठीक नहीं होता।
यह कदम उस घटनाक्रम के बाद उठाया गया, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान स्पीकर ने राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष का आरोप है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी के जरिए कांग्रेस सदस्यों पर स्पष्ट रूप से झूठे आरोप लगाए गए, जिससे संसदीय मर्यादा को ठेस पहुंची।
कांग्रेस का आरोप, बोलने से रोका गया
विपक्ष के नोटिस में कहा गया है कि बार-बार सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर विपक्षी सांसदों को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस का कहना है कि इससे संसद में लोकतांत्रिक विमर्श बाधित हो रहा है।
मणिकम टैगोर का बयान
कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा बनाए रखा है। माननीय स्पीकर के व्यक्तिगत सम्मान को बरकरार रखते हुए भी हम इस बात से दुखी और परेशान हैं कि विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने का लगातार अवसर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आगे कहा कि कई वर्षों के बाद स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है। यह एक बहुत ही जरूरी और अनिवार्य कदम है।
वर्षों बाद उठाया गया असाधारण कदम
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना सामान्य प्रक्रिया नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में विपक्ष को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

