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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दो अलग-अलग याचिकायें दायर हुई हैं

वक्फ संशोधन बिल को SC में चुनौती, ओवैसी और कांग्रेस सांसद की याचिका

वक्फ बिल को लेकर जारी सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर की है


वक्फ (संशोधन) बिल को लेकर देशभर में सियासी संग्राम तेज गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने इस बिल को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, जो बिहार के किशनगंज से लोकसभा सदस्य हैं, ने इस बिल को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बिल के खिलाफ पहली याचिका उन्होंने ही दायर की है।

ओवैसी का रुख

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक का कड़े शब्दों में विरोध किया और इसे "मुसलमानों की आस्था और धार्मिक परंपराओं पर हमला" करार दिया।

लोकसभा में बहस के दौरान ओवैसी प्रतीकात्मक रूप से इस विधेयक की प्रति फाड़कर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब वो सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।

बिल संसद से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी शेष

गौरतलब है कि वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों से पारित हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास मंजूरी के लिए भेजा जाना है।

मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

जहां केंद्र की मोदी सरकार इस बिल को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्रिय है, वहीं विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन इसे मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक बताकर इसका विरोध कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और गहराएगा।

विपक्ष की दलील: मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक

कई विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुसलमानों की संपत्तियों पर सरकार का "कब्ज़ा" करने की कोशिश है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि "इस मामले में अब केवल कानूनी रास्ता ही बचा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि "मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।"

अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार पर बहुमत के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा: “अगर इस बिल को अदालत में चुनौती दी गई, तो इसके असंवैधानिक घोषित होने की पूरी संभावना है।”

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बिल को मुसलमानों की संपत्तियों के खिलाफ साजिश बताते हुए इसे "खतरनाक" करार दिया।

बीजेपी का पक्ष: पारदर्शिता और गरीबों के हित में कानून

सरकार और भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह बिल गरीब मुसलमानों के कल्याण, सामाजिक-आर्थिक न्याय, और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।

राज्यसभा में बिल के समर्थन में 128 वोट और विरोध में 95 वोट पड़े। वहीं, लोकसभा में 288 सदस्यों ने समर्थन और 232 ने विरोध किया था।

बिल के पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “समावेशी विकास के लिए ऐतिहासिक कदम” बताया।

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