
ईरान संकट के बीच पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, तेल-गैस पर नहीं पड़ेगा असर
ईरान युद्ध के बीच PM मोदी ने लोकसभा में कहा कि भारत में तेल संकट नहीं है। 53 लाख टन भंडार मौजूद है और सरकार सप्लाई बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान में जारी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने लोकसभा में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश में फिलहाल किसी गहरे संकट की स्थिति नहीं है और सरकार पूरी तरह सतर्क है।
पीएम मोदी ने बताया कि भारत के पास इस समय 53 लाख मीट्रिक टन तेल का रणनीतिक भंडार मौजूद है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा, तेल कंपनियों के पास अलग से भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत कई देशों के संपर्क में है, ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।
सरकार सतर्क, शांति पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है और युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष का असर लंबे समय तक रह सकता है, इसलिए देश को संयम और धैर्य के साथ तैयार रहना होगा।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें, क्योंकि ऐसे समय में कुछ तत्व झूठी खबरें फैलाकर स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
पीएम मोदी ने बताया कि करीब एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जबकि समुद्री जहाजों में भी बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास लगातार मदद कर रहे हैं, एडवाइजरी जारी की जा रही है और हेल्पलाइन भी सक्रिय हैं।हालांकि, इस दौरान कुछ भारतीयों की मौत और कई के घायल होने की खबर भी सामने आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और उर्वरक आते हैं। युद्ध के चलते जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के प्रयास कर रही है।भारत अपनी 60% एलपीजी जरूरत आयात करता है। सप्लाई में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी है और देश में उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए उठाए गए बड़े कदम
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले दशक में भारत ने ऊर्जा आयात को विविध बनाया है। पहले जहां 27 देशों से आयात होता था, अब यह बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गया है।इसके अलावा, पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब 4 करोड़ बैरल तेल का आयात कम हुआ है। रेलवे के विद्युतीकरण ने भी ऊर्जा बचत में अहम योगदान दिया है।
बिजली और कृषि पर भी नजर
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला उपलब्ध है।उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, जैसा कि कोरोना काल में किया गया था।
लंबे संकट के लिए तैयार रहने की जरूरत
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना अस्वीकार्य है और भारत हमेशा शांति और मानवता के पक्ष में खड़ा रहेगा।उन्होंने कहा कि यह संकट लंबे समय तक चल सकता है, इसलिए देश को हर स्तर यानी जमीन, समुद्र, आसमान और साइबर स्पेस पर सतर्क रहना होगा। सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध का समाधान केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है और भारत इसी दिशा में प्रयास करता रहेगा।

