
NCERT विवाद: पीएम मोदी ने जताई नाराजगी, कहा- तय की जाए जवाबदेही
कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका पर विवादित टिप्पणी से भड़के पीएम मोदी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी जताया खेद, सुप्रीम कोर्ट ने थमाया नोटिस।
NCERT Indian Judiciary Controversy : एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में "भ्रष्टाचार" से संबंधित एक अध्याय को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इज़राइल दौरे पर मौजूद प्रधानमंत्री ने इस चूक पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि इन सब चीजों की निगरानी कौन कर रहा है। वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस घटना पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार की मंशा न्यायपालिका का अनादर करने की कतई नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
प्रधानमंत्री का सख्त संदेश: "कौन देख रहा है यह सब"
एनडीटीवी में छपी खबर में दावा किया गया है कि सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे विवाद पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इज़राइल से उन्होंने सीधा संदेश भेजा है कि इस तरह की बड़ी चूक के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि पाठ्यपुस्तकों में शामिल की जा रही सामग्री की समीक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कक्षा 8 की किताब में भ्रष्टाचार के संदर्भ में न्यायपालिका का उल्लेख किया गया, जिसे सरकार और न्यायालय दोनों ने अनुचित माना है।
शिक्षा मंत्री ने जताया खेद, कहा- हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज मीडिया से बात करते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देते हैं। सरकार का इरादा न्यायपालिका का अनादर करने का बिल्कुल नहीं था"। प्रधान ने आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों, यह सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अदालत के हर फैसले का पूरी तरह पालन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: अवमानना का नोटिस और डिजिटल बैन
इससे पहले आज दिन में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब में "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार" के संदर्भों पर कड़ी आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। अदालत ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने विवादित सामग्री वाली इस किताब के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण (reprinting) और डिजिटल सर्कुलेशन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब मंत्रालय के भीतर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
अधिकारी घेरे में: जांच के दायरे में NCERT की समीक्षा प्रक्रिया
इस विवाद ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने वाले पैनल और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा मंत्रालय अब यह जांच कर रहा है कि यह विवादित हिस्सा किस स्तर पर पास हुआ और इसे छपने से पहले क्यों नहीं रोका गया। पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि इस मामले में दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
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