कतर संकट से भारत की 40% LNG सप्लाई प्रभावित, सरकार अलर्ट
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कतर संकट से भारत की 40% LNG सप्लाई प्रभावित, सरकार अलर्ट

कतर की गैस फैसिलिटी पर हमले के बाद भारत की करीब 40% LNG सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार उर्वरक और जरूरी उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का नया प्लान बना रही है।


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कतर की गैस फैसिलिटी पर हमले के बाद भारत की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) सप्लाई को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की लगभग 40% LNG आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार गैस वितरण का एक ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ तैयार कर रही है, जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पहले गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

गैस सप्लाई में बाधा की वजह

भारत अपनी कुल LNG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इनमें से करीब 60% LNG यूरिया उत्पादन के लिए कतर से आती है। हाल ही में ईरान द्वारा कतर की कतरएनर्जी गैस फैसिलिटी पर हमले के बाद कतर को अस्थायी रूप से उत्पादन रोकना पड़ा। इसी कारण भारत की सप्लाई चेन में गंभीर बाधा आई है।

सरकार की गैस वितरण रणनीति

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही नई गैस वितरण व्यवस्था को अंतिम रूप दे सकता है। यह व्यवस्था प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—खासकर उर्वरक उद्योग—को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। संभावना है कि उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में कुछ सीमित कटौती की जाए, लेकिन सरकार का कहना है कि इसका असर कृषि उत्पादन या किसानों को मिलने वाले खाद पर नहीं पड़ेगा।

उर्वरक उद्योग को राहत

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उर्वरक इकाइयों को इतनी गैस दी जाएगी कि वे अपनी इष्टतम क्षमता पर संचालन कर सकें।इसके अलावा फिलहाल कुछ उर्वरक कंपनियां इस समय को मेंटेनेंस शटडाउन के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं। इससे गैस की कम उपलब्धता का असर सीमित रह सकता है।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अनुसार कृषि क्षेत्र में इस समय मांग अपेक्षाकृत कम है। खरीफ फसलों की बुवाई जून में शुरू होती है, इसलिए अभी उद्योग को स्टॉक तैयार करने और रखरखाव का समय मिल जाता है।

बंपर स्टॉक से मिली राहत

उर्वरकों का पर्याप्त भंडार भी सरकार के लिए राहत की बात है।

कुल उर्वरक स्टॉक 36.5% बढ़कर 17.7 मिलियन टन हो गया है।

पिछले साल इसी समय यह लगभग 13 मिलियन टन था।

DAP और NPK का स्टॉक पिछले साल की तुलना में 70–80% ज्यादा है।

फरवरी के अंत तक एजेंसियों ने 9.8 मिलियन टन उर्वरक आयात किया है और अगले तीन महीनों के लिए 1.7 मिलियन टन अतिरिक्त आयात भी तय हो चुका है। उर्वरक विभाग के अनुसार भारत ने फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात स्रोतों में विविधता लाई है, ताकि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बावजूद किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।

गैर-प्राथमिकता वाले उद्योगों पर दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता देगी, इसलिए उसमें बड़ी कटौती की संभावना कम है। लेकिन गैर-प्राथमिकता वाले उद्योगों को कम गैस सप्लाई के साथ काम करना पड़ सकता है।ऐसे उद्योगों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक ईंधन या अन्य ऊर्जा स्रोतों की व्यवस्था करनी होगी।

नए LNG स्रोतों की तलाश

भारत पहले से ही अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 60% पश्चिम एशिया के अलावा अन्य देशों से आयात करता है। अब सरकार और ऊर्जा कंपनियां अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से गैस खरीदने की कोशिश कर रही हैं।

हालांकि इसमें दो बड़ी चुनौतियां हैं—

शिपिंग: LNG के परिवहन के लिए विशेष टैंकर जहाजों की व्यवस्था।

लिक्विफिकेशन क्षमता: नए सप्लायर देशों में गैस को तरलीकृत करने की अतिरिक्त क्षमता।

आगे क्या?

अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति, उद्योगों और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल कोशिश है कि उर्वरक और जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण को संतुलित किया जाए, ताकि उद्योग और कृषि दोनों पर असर कम से कम पड़े।

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