
‘नेता प्रतिपक्ष शब्दों की मर्यादा समझें’, जगदंबिका पाल का राहुल पर तीखा प्रहार
बजट 2026 का पहला चरण कामकाज से अधिक होहल्ला के लिए याद किया जाएगा। बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जब तीखे सवाल किए तो उसी अंदाज में आसन पर बैठे पूर्व कांग्रेसी जगदंबिका पाल ने जवाब दिया।
वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि शब्दों और भाषा की मर्यादा क्या होती है। क्या यह ठीक बात है कि संसदीय लोकतंत्र में इस तरह के शब्दों और भाषा का इस्तेमाल किया जाए। निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा था कि 2013 में WTO एग्रीमेंट हुआ था जिसमें हमारे मक्के और हमारे किसानों के अनाज की स्थिति शामिल थी, और राशन की दुकानें बंद हो जाएंगी और किसी को भी फ्री राशन नहीं मिलेगा। 2017 में PM मोदी ने उस फैसले को पलट दिया। क्या कांग्रेस सरकार ने अपनी पहचान गिरवी रख दी, सरेंडर कर दिया, या देश बेच दिया?
वह सरकार की जितनी चाहे आलोचना कर सकते हैं, लेकिन जिस तरह के आरोप वह लगा रहे हैं, जिस रह से लगा रहे हैं, उससे देश गुमराह हो रहा है। दुनिया देश की उपलब्धियों की डिटेल जानती है। कैसे भारत ने COVID के बावजूद अपनी इकॉनमी को दुनिया में 11वें से चौथे नंबर पर पहुंचा दिया है। अब आप सोच रहे होंगे कि इस तरह की तीखी टिप्पणी किसने की और किसके खिलाफ थी। दरअसल तारीख 11 फरवरी की थी, बजट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सरकार की लानत मलानत कर रहे थे और उस वक्त आसन पर जगदंबिका पाल थे। बता दें कि जगदंबिका पाल का नाता कांग्रेस से रहा है हालांकि 2014 से पहले उन्होंने कांग्रेस के हाथ का साथ छोड़ बीजेपी का हिस्सा बन गये।
अब आपको बताएंगे कि 11 फरवरी को लोकसभा में क्या कुछ हुआ था।
राहुल गांधी बजट पर जब सरकार से तीखे सवाल कर रहे थे। लेकिन बीच बीच में एपस्टीन फाइल्स, अडानी का नाम भी ले रहे थे और यहीं से आसन पर आसीन जगदंबिका पाल से तीखी बहस हुई। राहुल गांधी ने कहा था कि एक बिजनेसमैन है जिसका नाम एपस्टीन की फाइलों में है और उसके खिलाफ केस हैं लेकिन वह जेल में नहीं है। जवाब में जगदंबिका पाल ने कहा कि सिर्फ बजट से जुड़े मामलों की ही इजाजत होगी।
राहुल गांधी ने मजाक में कहा कि आप (पाल) कांग्रेस के पुराने सदस्य हैं। मैं आप पर एक एहसान करूंगा। पाल ने इन बातों को भी हटाने का आदेश दिया और राहुल से कहा कि अगर आपने मेरी सलाह मानी होती तो आप वहां (विपक्ष में) नहीं बैठे होते।
जगदंबिका पाल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक मंत्री के खिलाफ आरोप लगाया है और नियम 353 के अनुसार सदन में ऐसे कोई आरोप तब तक नहीं लगाए जा सकते जब तक कि जिस सदस्य के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, उसे नोटिस न दिया जाए। पाल ने हरदीप पुरी के खिलाफ राहुल के आरोपों को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।कांग्रेस सांसदों ने यह कहते हुए विरोध किया कि क्या ये नियम सिर्फ LoP पर लागू होते हैं क्योंकि एक और BJP सांसद ने दो पूर्व PM के खिलाफ आरोप लगाए थे और उनकी बातों को हटाया नहीं गया था।
राहुल गांधी ने कहा कि मिस्टर अनिल अंबानी नाम के एक बिजनेसमैन हैं। वो जानना चाहते हैं कि वह जेल में क्यों नहीं हैं। उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। उन्हें मिस्टर हरदीप पुरी नाम के एक मिनिस्टर ने इंट्रोड्यूस कराया था। सदन की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि आरोपों की इजाज़त नहीं दी जाएगी क्योंकि वे ज्यूडिशियरी में पेंडिंग मामले से जुड़े हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले के केंद्र में मिस्टर अदानी और डिफेंस डील हैं, क्योंकि US में मिस्टर अदानी के खिलाफ एक केस है।जगदंबिका पाल का कहना है कि अदानी का जिक्र करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मिस्टर अदानी कोई आम बिजनेसमैन नहीं हैं। उनकी कंपनी कोई आम कंपनी नहीं है। US में केस पीएम पर टारगेटेड है, मिस्टर अदानी पर नहीं। यह BJP के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर टारगेटेड है। पाल ने कहा था कि का कहना है कि ऐसे आरोपों की इजाजत नहीं दी जाएगी। पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू और सीनियर BJP MP रविशंकर प्रसाद ने एतराज जताते हुए कहा कि LoP के आरोप बेबुनियाद हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि आपने अमेरिकियों को हमारी एनर्जी और हमारे फाइनेंस को हमारे खिलाफ हथियार बनाने दिया है।आप इस हाउस में आकर ऐसे बयान कैसे दे सकते हैं। क्या आपको खुद पर शर्म नहीं आती?आपने इंडिया को बेच दिया है। क्या आपको इंडिया को बेचने में शर्म नहीं आती। आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। आपको कोई शर्म नहीं है।
उन्हें पता है कि PM नॉर्मल हालात में नहीं बेचते। उन्होंने इंडिया को इसलिए बेचा है क्योंकि वे उनका गला घोंट रहे हैं, उनकी गर्दन पर उनकी पकड़ है। PM की आंखों में डर है। वह सीधे आंखों में नहीं देख सकते। इसके 2 कारण हैं - एपस्टीन केस क्योंकि 3 मिलियन फाइलें अभी भी बंद हैं। हाउस की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने एपस्टीन का कोई भी जिक्र करने से मना कर दिया था।

