Rahul Gandhi And Four Stars Of Destiny : भारतीय राजनीति में इन दिनों पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) को लेकर घमासान मचा हुआ है। 10 फरवरी 2026 को जनरल नरवणे ने सोशल मीडिया पर पेंगुइन पब्लिशिंग हाउस के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि उनकी किताब अभी तक प्रकाशित (Unpublished) नहीं हुई है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब कांग्रेस ने लद्दाख गतिरोध के मुद्दे से ध्यान हटाकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। राहुल गांधी ने संसद में सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार दबाव में है और देश के हितों से समझौता कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि उन्होंने लद्दाख के मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी का अपना लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है, इसलिए अब वे किसानों और व्यापार के मुद्दों पर जनता के बीच जा रहे हैं।
जनरल नरवणे का पोस्ट और राहुल गांधी की सीधी चुनौती
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने पेंगुइन पब्लिशर के दावों को झूठा करार दिया। राहुल ने नरवणे के तीन साल पुराने एक ट्वीट का हवाला दिया जिसमें उन्होंने अपनी किताब का लिंक शेयर करते हुए उसे 'उपलब्ध' बताया था। राहुल ने प्रेस से बात करते हुए सवाल उठाया, "या तो नरवणे जी झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन। मुझे नहीं लगता कि एक पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोलेंगे।" उन्होंने आरोप लगाया कि किताब में कुछ ऐसी बातें हैं जो प्रधानमंत्री और सरकार के लिए असुविधाजनक हैं, इसलिए इसे दबाया जा रहा है। हालांकि, नरवणे ने हालिया पोस्ट में साफ किया कि "किताब की स्थिति यही है" जो पब्लिशर बता रहा है। इस विरोधाभास ने राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस बढ़ा दिया है।
संसद में रणनीतिक बदलाव: लद्दाख छोड़ ट्रेड डील पर वार
बुधवार 11 फरवरी को संसद की कार्यवाही के दौरान एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। राहुल गांधी ने अपने भाषण में जनरल नरवणे की किताब का जिक्र तक नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने 'जुजित्सु' (Jujitsu) तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार बाहरी दबाव में "चोक" (Choke) हो गई है। राहुल ने विवादित रूप से 'एपस्टीन फाइल्स' का भी जिक्र किया और सुझाव दिया कि कुछ गुप्त प्रभाव व्यापार समझौते को प्रभावित कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि वे अब लद्दाख के मुद्दे पर अपनी बात जनता तक पहुँचा चुके हैं और अब वे किसानों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
'जनता को फैसला करने दें': कांग्रेस नेताओं के तेवर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि उनका मकसद पूरा हो गया है। एक नेता ने कहा, "मुद्दा यह नहीं है कि किताब छपी है या नहीं। मुद्दा यह है कि 2020 में जब चीनी टैंक लद्दाख में घुसे, तो सरकार ने सेना को गोली चलाने की अनुमति क्यों नहीं दी?" उनका तर्क है कि वे जनता को यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि सरकार सीमाओं की रक्षा में उतनी "बहादुर" नहीं थी जितनी वह दावा करती है। राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि राहुल गांधी की बात जमीन तक पहुँच चुकी है और अब पूरा देश इस पर सोच रहा है। कांग्रेस का मानना है कि मीडिया भले ही उन्हें न दिखाए, लेकिन संसद में उठाई गई आवाज ने अपना काम कर दिया है।
किसानों का मुद्दा और 'भारत बंद' की दस्तक
अब कांग्रेस का पूरा ध्यान भारत-अमेरिका ट्रेड डील और इसके किसानों पर पड़ने वाले असर पर है। किसानों को डर है कि अमेरिका से बिना आयात शुल्क के आने वाले कृषि उत्पाद भारतीय फसलों को बर्बाद कर देंगे। इसी विरोध में 12 फरवरी को कई किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने 'भारत बंद' का आह्वान किया है। राहुल गांधी शुक्रवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलकर इस समझौते पर चर्चा करेंगे। पार्टी का मानना है कि अन्नदाताओं का मुद्दा सरकार को बैकफुट पर लाने की ताकत रखता है, जैसा कि पहले तीन कृषि कानूनों के मामले में देखा गया था। अब कांग्रेस नरवणे की किताब के विवाद से आगे बढ़कर अपनी पूरी ताकत किसानों के साथ खड़ी करने में लगा रही है।