
Republic Day 2026: नारी शक्ति, स्वदेशी हथियार और मूक योद्धाओं ने खींचा सबका ध्यान
77th Republic Day: इस साल सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सुरक्षाबलों के जवान पहली बार एआई से लैस स्मार्ट चश्में पहनकर तैनात हुए।
Republic Day Parade 2026: आज कर्तव्य पथ पर सिर्फ झांकियां और टैंक नहीं चले, बल्कि भारत की शक्ति, आत्मनिर्भरता और नारी सशक्तिकरण की कहानी भी दिखाई गई। 77वें गणतंत्र दिवस परेड ने देशवासियों को गर्व से झूमने पर मजबूर कर दिया और दुनिया को बताया कि भारत अब केवल लोकतंत्र नहीं, बल्कि तकनीक, सेना और साहस का संगम है। इस साल की परेड में विदेशी मेहमान, मेक इन इंडिया हथियार, तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी और सेना के खास पशु दस्ते, सब कुछ नया और रोमांचक था। यह परेड हर मायने में 'भारत का उत्सव, भारत की ताकत' साबित हुई।
गणतंत्र दिवस परेड की खास बातें
विदेशी मेहमान
इस साल मुख्य समारोह में दो विदेशी मेहमान शामिल हुए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष सैंटोस डा कोस्टा। उनका आगमन भारत और यूरोपीय संघ के बीच संभावित व्यापार समझौते के मद्देनजर बेहद खास माना जा रहा है। परंपरा के अनुसार, मुख्य अतिथि के देश की सेना का एक दल भी परेड में शामिल हुआ। इस बार यूरोपीय यूनियन का सैन्य दल चार ध्वजवाहकों के साथ शामिल रहा।
तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी
साल 2026 की परेड में पहली बार तीनों सेनाओं थलसेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त झांकी पेश की गई। इस झांकी की थीम थी “ऑपरेशन सिंदूर – एकता में विजय”। इसमें सेना के थिएटर कमांड का प्रदर्शन दिखाया गया, जो तीनों सेनाओं को एकीकृत कर युद्ध की क्षमता बढ़ाता है। इस झांकी में हथियारों को चरणबद्ध तरीके से वास्तविक युद्ध की तर्ज पर प्रदर्शित किया गया, जिसे बैटर एरे फॉर्मेट कहते हैं।
मेक इन इंडिया की झलक
परेड में आत्मनिर्भर भारत की ताकत को भी दिखाया गया। कई स्वदेशी हथियारों और उपकरणों का प्रदर्शन हुआ, जैसे कि ध्रुव हेलीकॉप्टर, रुद्र प्रहार टैंक, भीष्म और अर्जुन टैंक, धनुष और अमोघ गन सिस्टम और आकाश वेपन सिस्टम।
नारी शक्ति का प्रदर्शन
इस साल की परेड में नारी शक्ति पर खास फोकस रहा। सीआरपीएफ की टुकड़ी का नेतृत्व महिला अधिकारी सिमरन बाला ने किया। वह पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्होंने 140 से ज्यादा पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व किया।
खास मार्चिंग दस्ते
परंपरागत परेड में पहली बार भारतीय सेना के पशु दस्ते ने भी मार्च किया। इसमें बैक्ट्रियन ऊंट, स्वान और बाज आदि शामिल थे।
वंदे मातरम का 150वां वर्ष
इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर खास फोकस रहा। झांकियों और मंच की सजावट में भी इस थीम को प्रमुखता दी गई।
विशेष आमंत्रित मेहमान
करीब 10,000 विशेष मेहमानों को समारोह में बुलाया गया। इनमें इनोवेटर, रिसर्चर्स, सेल्फ हेल्प ग्रुप और सरकार की योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था और नई पहल
इस साल सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सुरक्षाबलों के जवान पहली बार एआई से लैस स्मार्ट चश्में पहनकर तैनात हुए। कर्तव्य पथ पर बनाए गए बाड़ों को भारत की प्रमुख नदियों जैसे गंगा, यमुना, कृष्णा, नर्मदा, पेरियार आदि के नाम पर रखा गया। पारंपरिक VVIP और अन्य लेबल का इस्तेमाल नहीं किया गया, ताकि सबको समान रूप से सुविधा मिले।

