महंगाई के दौर में 1000 रुपए पेंशन सिर्फ मजाक, कांग्रेस का केंद्र सरकार पर वार
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महंगाई के दौर में 1000 रुपए पेंशन सिर्फ मजाक, कांग्रेस का केंद्र सरकार पर वार

ईपीएफ के जरिए एक हजार रुपए मासिक पेंशन पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है। कांग्रेस का कहना है कि महंगाई के जमाने में यह नाकाफी है।


कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मुद्दों पर तुरंत ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यह बयान उस समय आया जब एक संसदीय समिति ने कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत मिलने वाली 1000 रुपए मासिक न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा की सिफारिश की।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं कमजोर हुई हैं या उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बावजूद पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं किया गया है।

रमेश ने कहा कि इसका सीधा असर बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनभोगियों पर पड़ा है, जो समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में आते हैं। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण महंगाई चरम पर है, स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो चुकी हैं और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में 1000 रुपए की न्यूनतम पेंशन मजाक बनकर रह गई है।

संसद की स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि 1995 की पेंशन योजना के तहत दी जा रही 1000 रुपए मासिक पेंशन आज के समय में पूरी तरह अपर्याप्त है। समिति ने सिफारिश की है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ऐसा किया जाए जिससे पेंशनभोगियों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिल सके।यह मुद्दा लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा हुआ है। रमेश ने उम्मीद जताई कि श्रम, वस्त्र और कौशल विकास पर बनी संसदीय समिति की इस रिपोर्ट के बाद सरकार इस दिशा में गंभीर कदम उठाएगी।

यह समिति, जिसने श्रम और रोजगार मंत्रालय की 2026-27 की अनुदान मांगों पर अपनी 15वीं रिपोर्ट पेश की है, ने पेंशन की व्यापक समीक्षा की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों जिसमें महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और जीवनयापन की लागत में वृद्धि शामिल है के मद्देनजर मौजूदा पेंशन राशि पर्याप्त नहीं है।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पेंशनभोगी लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को 7500 रुपए प्रति माह तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर Employees' Provident Fund Organisation के तहत आने वाले पेंशनर्स ने हाल ही में जंतर मंतर पर तीन दिन तक विरोध प्रदर्शन भी किया था।

समिति ने यह भी बताया कि उसे कई पेंशनभोगियों से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के लिए ज्ञापन मिले हैं, खासकर उन बुजुर्गों से जो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।हालांकि, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने समिति को बताया कि सरकार इस योजना के तहत वित्तीय सहायता दे रही है, जिसमें EPFO के मौजूदा सदस्यों के लिए 1.16% का योगदान और 1000 रुपए न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय समर्थन शामिल है।

इसके बावजूद, समिति का स्पष्ट मत है कि मौजूदा पेंशन राशि पेंशनभोगियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की जल्द और व्यापक समीक्षा कर इसे अधिक व्यावहारिक और सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए।

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