75 साल की उम्र पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- संघ कहे तो पद छोड़ने को तैयार हूं
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भागवत ने संकटग्रस्त बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर देश की हिंदू आबादी अपने अधिकारों के लिए खड़ी होकर संघर्ष करने का फैसला करती है, तो उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं का समर्थन मिलेगा। फोटो: पीटीआई

75 साल की उम्र पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- 'संघ कहे तो पद छोड़ने को तैयार हूं'

RSS प्रमुख ने कहा कि संघ में शीर्ष पद “सबसे योग्य उपलब्ध हिंदू” के लिए होता है, जाति की कोई बाधा नहीं है। उन्होंने घुसपैठ को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की और बांग्लादेश के हिंदुओं को समर्थन देने का संकल्प दोहराया।


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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (8 फरवरी) को कहा कि जब भी संगठन उनसे कहेगा, वह अपने पद से हटने के लिए तैयार हैं। हालांकि, 75 वर्षीय नेता ने यह भी जोड़ा कि उम्र पूरी होने के बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने 75 वर्ष पूरे होने की जानकारी RSS को दे दी है।

भागवत ने कहा, “लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी RSS मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं ऐसा कर दूंगा, लेकिन काम से संन्यास कभी नहीं होगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा हिंदू होगा, उसकी जाति कोई मायने नहीं रखती। शीर्ष पद सबसे योग्य उपलब्ध उम्मीदवार को दिया जाता है।

भागवत ने कहा, “RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और प्रांतीय प्रमुख मिलकर प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति बिना किसी पद के काम करे।”

वह मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवाद सत्र में सवालों का जवाब दे रहे थे।

‘RSS प्रमुख का हिंदू होना जरूरी’

भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं होता और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने दोहराया कि RSS प्रमुख का हिंदू होना आवश्यक है, जाति चाहे जो भी हो।

उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समाज में शुरू हुआ था, इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे। इसी कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन कहा जाने लगा। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर ऐसे संगठन की तलाश करते हैं, जिसमें उनके समुदाय का प्रतिनिधित्व हो।

भागवत ने यह भी कहा कि वह इस सवाल का निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि भविष्य में संघ प्रमुख अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) पृष्ठभूमि से होगा या नहीं, क्योंकि यह फैसला प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा, “अगर मुझे किसी को प्रमुख चुनना हो, तो मैं ‘सबसे योग्य उपलब्ध उम्मीदवार’ के मानदंड पर ही फैसला करूंगा। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया, तब कई योग्य उम्मीदवार थे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ऐसा व्यक्ति था जिसे जिम्मेदारियों से मुक्त कर इस पद पर नियुक्त किया जा सकता था।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होना RSS प्रमुख बनने में कोई अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना इस पद के लिए कोई योग्यता है।

उन्होंने कहा, “क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना सरसंघचालक (RSS प्रमुख) बनने की योग्यता नहीं है। RSS प्रमुख एक हिंदू होगा, जो काम करता हो और जो सबसे योग्य उपलब्ध व्यक्ति हो।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से भी हो सकता है।

भागवत ने कहा, “कोई भी RSS प्रमुख बन सकता है, यह उसके काम पर निर्भर करता है। आज अगर आप देखें तो संघ में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व है। फैसला उसी के आधार पर लिया जाता है जो काम करता है और जो सबसे योग्य उपलब्ध होता है।”

बांग्लादेश के हिंदुओं को समर्थन

इससे पहले अपने भाषण में भागवत ने संकटग्रस्त बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर वहां की हिंदू आबादी अपने अधिकारों के लिए खड़ी होकर संघर्ष करने का निर्णय लेती है, तो उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं का समर्थन मिलेगा।

भागवत ने कहा, “बांग्लादेश में करीब 1.25 करोड़ हिंदू हैं। अगर वे वहां रहकर संघर्ष करने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे।”

बांग्लादेश में हाल के महीनों में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाकर भीड़ हिंसा की घटनाओं में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है। यह स्थिति भारत-विरोधी रुख के लिए पहचाने जाने वाले कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद और गंभीर हुई है

जनसंख्या में बदलाव

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में बदलते जनसंख्या रुझानों को लेकर पिछली सरकारों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बढ़ती जन्म दर और अवैध घुसपैठ जनसांख्यिकीय बदलाव के प्रमुख कारण हैं।

भागवत ने कहा, “घुसपैठ को लेकर सरकार को बहुत कुछ करना है। पहचान करनी होगी और निर्वासन (डिपोर्टेशन) करना होगा। यह पहले नहीं हो रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे शुरू हुआ है और आगे चलकर इसमें और तेजी आएगी।”

भागवत के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान अक्सर ऐसे लोगों की पहचान होती है जो नागरिक नहीं होते, और ऐसे नाम स्वतः ही सूची से हटा दिए जाते हैं। वह पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची के पुनरीक्षण का जिक्र कर रहे थे, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर मुसलमानों को “बांग्लादेशी घुसपैठिया” बताकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

घुसपैठियों की पहचान और सूचना देने की अपील

भागवत ने नागरिकों से सतर्क रहने, घुसपैठियों की पहचान करने और उनकी सूचना देने की अपील की। उन्होंने लोगों से कथित घुसपैठियों को रोजगार न देने को भी कहा।

उन्होंने कहा, “हम एक काम कर सकते हैं, पहचान पर काम कर सकते हैं। उनकी भाषा ही उन्हें उजागर कर देती है। हमें उनकी पहचान करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। हमें पुलिस को सूचित करना चाहिए कि हमें संदेह है कि ये लोग विदेशी हैं, ताकि पुलिस उनकी जांच कर सके और उन पर नजर रखे; और हम भी उन पर नजर बनाए रखें।”

संघ की कार्यसंस्कृति

हल्के-फुल्के अंदाज में भागवत ने कहा कि संगठन अपने स्वयंसेवकों से “खून की आखिरी बूंद तक काम लेता है” और यह भी कहा कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी स्थिति नहीं आई है, जहां किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि RSS विभिन्न आउटरीच पहलों पर काम कर रहा है। भागवत ने बताया कि संघ का काम संस्कार देने से जुड़ा है, न कि प्रचार करने से। भागवत ने कहा, “हम अपने प्रचार-प्रसार में पीछे रह गए हैं। जरूरत से ज्यादा प्रचार से प्रसिद्धि आती है और फिर अहंकार पैदा होता है। इससे खुद को बचाना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए। समय और मात्रा, दोनों में संतुलित।

मुस्लिम इलाकों में कार्य

मुस्लिम समुदायों में, विरोध के बावजूद, संघ कार्यकर्ताओं के काम को लेकर पूछे गए सवाल पर भागवत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे का विरोध करेंगे, तो सिर्फ टकराव होगा और कोई काम नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि संघ टकराव से बचता है।

भागवत ने कहा, “मुस्लिम इलाकों में चुनौतियों से निपटने का तरीका प्रतिक्रिया न देना है। वे गाली-गलौज कर सकते हैं, लेकिन हम जवाब नहीं देते। इससे टकराव नहीं बढ़ता।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि RSS किसी जाति या समुदाय को निशाना नहीं बनाता, बल्कि भौगोलिक आधार पर काम करता है।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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