
रूस से मिली जानकारी के बाद NIA ने अमेरिकी नागरिक वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिकों को किया गिरफ्तार
कौन है वैन डाइक? NIA की जांच में पता चला है कि ये भाड़े के सैनिकों का नेटवर्क म्यांमार के विद्रोहियों और भारतीय उग्रवादियों को हाई-टेक ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दे रहा था.
रूस से मिली खुफिया सूचना के आधार पर 13 मार्च 2026 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने भारत के साथ इन संदिग्धों की गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की थी. इस मामले में शामिल लोगों की पृष्ठभूमि और मौजूदा तनावपूर्ण वैश्विक हालात को देखते हुए यह सहयोग अहम माना जा रहा है. गिरफ्तार लोगों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक भी शामिल है.
भारत की प्रमुख आतंकवाद-रोधी एजेंसी NIA का आरोप है कि वैन डाइक और अन्य लोग भारतीय क्षेत्र के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए थे. एजेंसी के मुताबिक उनका उद्देश्य म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों और भारत में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को सैन्य प्रशिक्षण देना था. वैन डाइक के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि वह पहले कई अंतरराष्ट्रीय युद्धों और अर्धसैनिक अभियानों में शामिल रहा था. जांच एजेंसियां अब उसके पूर्वोत्तर भारत पहुंचने की पूरी कड़ी और उसके मिशन के मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं.
जांच और गहरी हुई
रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब उस स्थानीय नेटवर्क की तलाश कर रही हैं जिसने वैन डाइक और छह यूक्रेनियों को पूर्वोत्तर भारत में गुप्त रूप से आवाजाही में मदद की. जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि किन लोगों ने इस समूह को मिजोरम पहुंचने और वहां से अवैध रूप से म्यांमार जाने में मदद की. अधिकारियों का मानना है कि यह समूह 2024 से कई बार म्यांमार गया था. इन दौरों के दौरान उन्होंने कथित तौर पर जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन और सिग्नल-जैमिंग उपकरण दिए और उन्हें विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया.
रूसी खुफिया सूचना
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के पूरे विवरण गोपनीय हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मॉस्को ने संदिग्धों की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी थी. अंतिम गिरफ्तारी में रूस की भूमिका कितनी थी, यह सार्वजनिक नहीं किया गया है. बताया जा रहा है कि NIA ने लगभग तीन महीने तक पूर्वोत्तर में इन संदिग्धों पर नजर रखी, उसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार सात लोगों में वैन डाइक, मैक्सिम होंचारुक, पेट्रो हुबरा, इवान सुकमानोव्स्की, मरियन स्टेफानकिव, तारास स्लिवियाक और विक्टर कामिंस्की को दिल्ली की अदालत ने 27 मार्च तक NIA हिरासत में भेज दिया है. छह यूक्रेनी नागरिक कथित तौर पर 14 लोगों के एक समूह का हिस्सा थे जो म्यांमार गए थे. बाकी आठ लोग अभी म्यांमार में हैं या भारत के रास्ते निकल गए, इसकी जांच चल रही है.
यूक्रेन और अमेरिका की प्रतिक्रिया
बुधवार को यूक्रेनी नागरिकों का केस लड़ रहे एक भारतीय वकील ने “पेशेवर कारणों” का हवाला देकर केस से हटने की बात कही. भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्ज़ेंडर पोलिशचुक ने कहा कि यूक्रेन जांच में सहयोग करने को तैयार है और चाहता है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष को यूक्रेनी विशेषज्ञों को भी शामिल करना चाहिए. उन्होंने बताया कि 2003 से लागू आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के तहत यूक्रेन सहयोग करेगा. वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात के बाद कहा कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग आगे बढ़ रहा है और सुरक्षा व भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई.
NIA का अदालत में दावा
NIA के मुताबिक, सभी सात लोग अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, गुवाहाटी पहुंचे और बिना जरूरी अनुमति (RAP/PAP) के मिजोरम गए. इसके बाद वे अवैध रूप से म्यांमार गए जहां उन्हें म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देनी थी. एजेंसी का कहना है कि ये समूह भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं. NIA ने अदालत को बताया कि पूछताछ में वैन डाइक और यूक्रेनियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई बार म्यांमार में प्रशिक्षण दिया और यूरोप से ड्रोन लाकर भारत के रास्ते म्यांमार भेजे. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूक्रेनी नागरिकों पर लगे आरोपों के ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
कौन है वैन डाइक?
वैन डाइक की वेबसाइट के अनुसार वह अमेरिका के बाल्टीमोर का रहने वाला है और सैनिक, कारोबारी तथा युद्ध संवाददाता के रूप में काम कर चुका है. वह “Sons of Liberty International” नाम की सैन्य कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी का संस्थापक होने का दावा करता है. उसने खुद को सुरक्षा विश्लेषक, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और युद्ध संवाददाता बताया है. उसके सोशल मीडिया और फोन की जांच में सामने आया कि वह इराक सहित कई युद्ध क्षेत्रों में जा चुका है और गुरिल्ला युद्ध, ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग देता रहा है.
शुरुआती विवाद
वैन डाइक पहली बार 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान चर्चा में आया था, जब वह विद्रोहियों के साथ लड़ा, छह महीने कैद रहा और बाद में भाग निकला. ISIS द्वारा उसके पत्रकार मित्रों जेम्स फोली और स्टीवन सोटलॉफ की हत्या के बाद उसने “Sons of Liberty International” शुरू की, जो दुनिया भर के सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देती है.
जांच एजेंसियों को ऐसे वीडियो भी मिले हैं जिनमें वह वेनेजुएला, ईरान और म्यांमार में विद्रोहों के लिए भाड़े के सैनिकों को शामिल होने की अपील कर रहा है.
भारत के लिए क्यों अहम मामला
भारत में उसकी गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उसके पूर्वोत्तर में सक्रिय सशस्त्र नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है. NIA तीन मुख्य बिंदुओं की जांच कर रही है. क्या पूर्वोत्तर भारत विदेशी भाड़े के सैनिकों के लिए म्यांमार जाने का ट्रांजिट कॉरिडोर बन गया था? क्या इस समूह के भारत विरोधी प्रतिबंधित संगठनों से सीधे संबंध थे ? और
क्या यह जासूसी या खुफिया मिशन का हिस्सा था ? जानकारों का मानना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को अस्थिर करने की बड़ी साजिश से जुड़ा हो सकता है, या फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत-रूस संबंधों के कारण पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम भी हो सकता है.

