Iran-Strait Of Hormuz And India : ईरान/अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का निर्णय लिया है। मंगलवार (9 मार्च) को हुई इस फोन कॉल के बाद 'भारतीय ध्वज' वाले जहाजों को होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति मिल गई है। यह गलियारा वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। गौरतलब है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर ईरान ने अब भी कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी महत्वपूर्ण वार्ता थी। इस बीच, सऊदी अरब से 1.35 लाख टन कच्चा तेल लेकर आ रहा 'शेनलोंग' टैंकर सुरक्षित मुंबई पोर्ट पहुंच गया है।
ईरान की कड़ी चेतावनी और भारतीय जहाजों की स्थिति
ईरान ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं जहाजों को रास्ता मिलेगा जो पहले से अनुमति लेंगे। आईआरजीसी (IRGC) के नेवी चीफ रियर एडमिरल अलीरेज़ा तंगसीरी ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति वाले जहाजों पर हमला किया जाएगा। बुधवार को ही दो विदेशी जहाजों को चेतावनी नजरअंदाज करने पर निशाना बनाया गया है। केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। इनमें कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनकी सुरक्षा पर सरकार लगातार नजर रख रही है।
होर्मुज की खाड़ी पर ईरान का सख्त पहरा
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, युद्ध तेज होने के बाद तेहरान ने समुद्री यातायात पर नियंत्रण बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह दुनिया की कुल तेल खपत का पांचवां हिस्सा है। ईरान ने संकेत दिया है कि जो देश अमेरिका या इजरायल के हितों के लिए काम नहीं कर रहे, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए भारत के जहाजों को 'क्लीयरेंस' लेना अनिवार्य होगा।
मुंबई पहुंचा 'शेनलोंग' टैंकर: बहादुरी की दास्तां
इस कूटनीतिक समझौते के बीच 'शेनलोंग सूएजमैक्स' टैंकर का मुंबई पहुंचना एक बड़ी राहत है। यह जहाज 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से रवाना हुआ था। 8 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते समय इस जहाज ने अपना पहचान तंत्र (AIS) बंद कर दिया था। इसे 'गोइंग डार्क' कहा जाता है, ताकि दुश्मन की मिसाइलें इसे ट्रैक न कर सकें। भारतीय कैप्टन के नेतृत्व में यह टैंकर 1,35,335 मीट्रिक टन तेल लेकर जवाहर द्वीप टर्मिनल पर लग चुका है।
वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल
युद्ध के कारण गुरुवार को तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। अमेरिका और इजरायल की बमबारी के जवाब में ईरान ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अगले सप्ताह से 172 मिलियन बैरल रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की घोषणा की है। भारत सरकार ने भी 28 फरवरी से मंत्रालय में एक 24x7 कंट्रोल रूम सक्रिय कर रखा है।