
मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार की रणनीति, एस जयशंकर ने संसद में बताईं 10 बातें
पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। अब तक 114 उड़ानों से नागरिकों की वापसी कराई गई।
Iran Israel Conflict: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल पिछले 10 दिन से ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि ईरान भी जवाब दे रहा है। इन सबके बीच वैश्विक स्तर पर तेल और एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं मिडिल ईस्ट में अलग अलग देशों के नागरिक फंसे हुए हैं जिनमें भारत भी एक है। संसद में बजट सत्र के दूसरे भाग की कार्यवाही भी जारी है और विपक्ष की तरफ से भारत सरकार की नीति पर कई सवाल किए गए। राज्यसभा में विपक्षी सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कुछ बड़ी बातें कहीं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर बयान देते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में शांति, ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने बताया कि Iran और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष
विदेश मंत्री ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में इजराइल (Israel) और अमेरिका (United States) के साथ ईरान (Iran) के बीच टकराव बढ़ गया है। इस दौरान खाड़ी देशों पर भी हमले हुए हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
संयम और शांति की अपील
जयशंकर ने कहा कि भारत ने शुरुआत से ही सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को बढ़ने से रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
भारत के लिए अहम है पश्चिम एशिया
विदेश मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जबकि ईरान में हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है।
200 अरब डॉलर का व्यापार
उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। भारत और इस क्षेत्र के देशों के बीच हर साल लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है और कई दशकों से यहां से भारत में बड़े निवेश भी हुए हैं।
जहाजों पर हमले, भारतीय नाविकों की मौत
हालिया संघर्ष के दौरान कुछ व्यापारिक जहाज भी निशाने पर आए हैं। विदेश मंत्री ने बताया कि इन हमलों में अब तक दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक अभी भी लापता है। इन जहाजों के क्रू में अक्सर बड़ी संख्या में भारतीय होते हैं।
नाविकों की मदद के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम
स्थिति को देखते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने एक क्विक रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है। यह टीम प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए 24 घंटे काम कर रही है।
पहले ही जारी की गई थी एडवाइजरी
जयशंकर ने बताया कि भारत सरकार ने पहले ही अपने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। इसके अलावा दूतावास ने छात्रों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने का भी आग्रह किया था।
114 उड़ानों से भारतीयों की वापसी
सरकार ने फंसे भारतीयों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। विदेश मंत्री के मुताबिक अब तक 114 उड़ानों के जरिए भारतीयों को वापस लाया जा चुका है। 7 मार्च को 15, 8 मार्च को 49 और 9 मार्च को 50 उड़ानें भारत पहुंचीं। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे ट्रांजिट हब में भारतीय दूतावास भी लगातार मदद कर रहे हैं।
पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इजराइल के नेताओं से बातचीत की है। इन देशों ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया है।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि कोच्चि बंदरगाह पर खड़े ईरानी जहाज IRIS LAVAN के क्रू को भारत ने मानवीय आधार पर सहायता दी है, जिसके लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार जताया है। अंत में जयशंकर ने कहा कि भारत की नीति तीन सिद्धांतों पर आधारित है। क्षेत्र में शांति और संवाद की वापसी, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित शामिल हैं।

