Sanjay Raut On Jagdeep Dhankar : शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने जेल में रहने के दौरान एक ऐसी किताब लिखी है, जिसने दिल्ली से लेकर मुंबई तक के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 'अनलाइकली पैराडाइज' शीर्षक वाली इस किताब में राउत ने दावा किया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में स्वेच्छा से नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भारी दबाव में इस्तीफा दिया था। राउत के अनुसार, धनखड़ सरकार के खिलाफ स्वतंत्र रुख अपना रहे थे, जिसके जवाब में उनके खिलाफ एक फाइल तैयार की गई थी। इतना ही नहीं, किताब में पीएम नरेंद्र मोदी को जेल जाने से बचाने और अमित शाह की जमानत में शरद पवार व बाल ठाकरे की भूमिका को लेकर भी सनसनीखेज दावे किए गए हैं। यह किताब सोमवार को अंग्रेजी में जारी होने वाली है, जिसने रिलीज से पहले ही विवादों का केंद्र बना लिया है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के पीछे 'ED' की फाइल?
राउत ने अपनी किताब में आरोप लगाया कि जब जगदीप धनखड़ ने मोदी सरकार के खिलाफ स्वतंत्र राजनीतिक कदम उठाने शुरू किए, तो ED ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अफवाहों का हवाला देते हुए किताब में दावा किया गया है कि धनखड़ और उनकी पत्नी द्वारा जयपुर का घर बेचने और रकम विदेश भेजने के आरोपों की एक फाइल उन्हें सौंपी गई थी। राउत का कहना है कि शुरू में इनकार करने के बाद, जांच तेज होने पर धनखड़ असहज हो गए और अंततः उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शरद पवार ने बचाया था नरेंद्र मोदी को जेल जाने से!
किताब का एक सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यूपीए सरकार के कार्यकाल से जुड़ा है। राउत का दावा है कि गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की तैयारी थी। लेकिन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कैबिनेट बैठक में इसका विरोध किया था। पवार ने तर्क दिया था कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मुख्यमंत्री को जेल भेजना अनुचित है। राउत सवाल उठाते हैं कि क्या पीएम मोदी को आज पवार के उस 'उपकार' की याद है?
अमित शाह की जमानत और 'मातोश्री' का वह एक फोन कॉल
अमित शाह को लेकर राउत ने दावा किया कि जब सीबीआई उनकी जमानत का विरोध कर रही थी, तब शाह खुद काली-पीली टैक्सी में बैठकर मातोश्री (ठाकरे निवास) पहुंचे थे। किताब के अनुसार, बाल ठाकरे ने तत्कालीन नेता मनोहर जोशी के जरिए एक जज को फोन करवाया था। उस फोन कॉल के बाद अमित शाह की राजनीतिक दिशा बदल गई और उन्हें जमानत मिली। राउत ने आरोप लगाया कि शरद पवार ने भी शाह को जेल से बाहर निकालने में मदद की थी, लेकिन बदले में शाह ने महाराष्ट्र और ठाकरे परिवार के साथ 'कृतघ्न' व्यवहार किया।
चुनाव आयोग और अशोक लवासा का प्रकरण
संजय राउत ने पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के इस्तीफे का भी जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लवासा ने पीएम मोदी और अमित शाह के चुनावी उल्लंघनों पर असहमति जताई थी, जिसके कारण उनके परिवार को निशाना बनाया गया। ED के छापों और लगातार निगरानी के कारण 2020 में उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। राउत की यह किताब भारतीय राजनीति के कई 'बंद कमरों' के राज खोलने का दावा करती है, जिस पर अब सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।