CEC नियुक्ति विवाद: SC के चीफ जस्टिस ने खुद को सुनवाई से किया अलग
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CEC नियुक्ति विवाद: SC के चीफ जस्टिस ने खुद को सुनवाई से किया अलग

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर नए कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से हटे CJI सूर्यकांत; 'हितों के टकराव' का दिया हवाला, अब 7 अप्रैल को होगी सुनवाई।


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Supreme Court Of India : देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी जंग में शुक्रवार (20 मार्च 2026) को एक नया मोड़ आया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले की सुनवाई करने वाली पीठ से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस सूर्यकांत ने 'हितों के टकराव' की संभावना का हवाला देते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई ऐसी बेंच को करनी चाहिए, जिसमें वह जज शामिल न हो जो भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में है। यह पूरा विवाद 2023 के उस कानून के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसने चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से देश के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार का नया कानून चयन प्रक्रिया में सरकार को 'अपर हैंड' देता है, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।


चीफ जस्टिस ने क्यों छोड़ी सुनवाई?
शुक्रवार को जैसे ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई शुरू हुई, CJI ने खुद सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "क्या मुझे इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? शायद कोई मुझ पर हितों के टकराव का आरोप लगा दे।"

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने हालांकि कहा कि कोई ऐसा आरोप नहीं लगाएगा, लेकिन उन्होंने सहमति जताई कि बेहतर होगा कि जस्टिस सूर्यकांत इस मामले को न सुनें। इसके बाद कोर्ट ने तय किया कि इन याचिकाओं को अब ऐसी बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा जिसमें कोई भी 'भावी मुख्य न्यायाधीश' शामिल न हो।

विवाद की जड़: 2023 का वो ऐतिहासिक फैसला और नया कानून
इस कानूनी विवाद की शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि CEC और चुनाव आयुक्तों का चयन एक त्रिपक्षीय पैनल द्वारा किया जाना चाहिए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों।

हालांकि, उसी साल केंद्र सरकार ने एक नया कानून (The CEC and Other ECs Appointment Act, 2023) पारित किया। इस नए कानून ने चयन समिति के ढांचे को बदल दिया। अब इस पैनल में CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे चयन समिति में बहुमत सरकार के पास रहता है, जो संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता के खिलाफ है।

7 अप्रैल को होगी अगली अहम सुनवाई
प्रशांत भूषण ने अदालत में दलील दी कि चूँकि कानून की वैधता सीधे तौर पर CJI की चयन समिति में भूमिका से जुड़ी है, इसलिए निष्पक्षता के लिए किसी भी भावी चीफ जस्टिस का सुनवाई से हटना ही उचित है। जस्टिस सूर्यकांत ने आश्वासन दिया कि मामले की अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को एक नई बेंच के सामने होगी।

यह मामला न केवल न्यायिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र निकाय की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सीधे तौर पर लोकतंत्र की निष्पक्षता से जुड़ी है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि क्या कार्यपालिका का चुनाव आयोग पर नियंत्रण बढ़ेगा या न्यायपालिका की भागीदारी फिर से बहाल होगी।


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