Ghooskhor Pandat के मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार,पहले नया नाम बताओ...
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Ghooskhor Pandat के मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार,'पहले नया नाम बताओ... '

सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडित’ फिल्म के शीर्षक पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समाज को अपमानित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि नाम बदले बिना फिल्म रिलीज नहीं हो सकेगी।


Ghooskhor Pandat Title Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समाज या वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक फिल्म का नाम बदला नहीं जाता, तब तक इसे रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मनोज बाजपेयी की इस फिल्म की ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और नीरज पांडे को नोटिस जारी किया है।

पहले नया नाम बताए, तभी रिलीज़ होगी फिल्म

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'अभिव्यक्ति की आज़ादी एक बात है, लेकिन यह किसी को भी बदनाम करने की छूट नहीं देती। इस तरह का टाइटल नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ है। फिल्म निर्माता और पत्रकार जैसे लोग जिम्मेदार होते हैं, उनसे समाज को जोड़ने की उम्मीद की जाती है, न कि तोड़ने की।' कोर्ट ने नीरज पांडे से हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह साफ किया जाए कि फिल्म किसी भी समाज या वर्ग को अपमानित नहीं करती। फिल्म निर्माता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अभी नया नाम तय नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा नाम रखा जाएगा जिससे किसी तरह का विवाद न हो।

बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन इस अधिकार पर कुछ उचित सीमाएं भी हैं। अदालत ने ‘बंधुत्व’ यानी भाईचारे के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में पहले से ही विभाजन की स्थिति है, ऐसे में इस तरह के नाम से और तनाव बढ़ सकता है।

याचिकाकर्ता अतुल मिश्रा, जो ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव हैं, ने दावा किया है कि ‘पंडत’ शब्द एक जाति और धर्म की पहचान से जुड़ा है, जबकि ‘घूसखोर’ शब्द भ्रष्टाचार और नैतिक गिरावट को दर्शाता है। इन दोनों शब्दों को साथ जोड़ना ब्राह्मण समाज को बदनाम करने जैसा है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई थी। वहां नेटफ्लिक्स इंडिया ने बताया था कि फिल्म के निर्माता ने उठी चिंताओं को देखते हुए फिल्म का नाम बदलने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह दर्ज किया कि नया नाम फिल्म की कहानी और उद्देश्य को बेहतर तरीके से दर्शाएगा।

‘घूसखोर पंडित’ फिल्म का निर्माण नीरज पांडे ने किया है। इसमें मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की घोषणा हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में की गई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। तब तक यह देखना अहम होगा कि फिल्म का नया नाम क्या रखा जाता है और क्या अदालत को दिया गया आश्वासन विवाद को पूरी तरह शांत कर पाता है या नहीं।

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