
States in Debt: पश्चिम बंगाल से पंजाब तक… जानिए टॉप 10 राज्य, जो दबे हैं कर्ज के बोझ तले
Indian Economy: भले ही भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन राज्यों पर बढ़ता कर्ज एक गंभीर चेतावनी है। अगर कर्ज और ब्याज का दबाव ऐसे ही बढ़ता रहा तो विकास और जनकल्याण से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं।
Indian States Debt: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ रही है, लेकिन कई राज्यों की दौड़ कर्ज के बोझ तले दब ई है! दुनिया हमें तेजी से बढ़ती इकोनॉमी कहती है। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक भी भारत की ताकत को मानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस चमक-दमक के पीछे कुछ राज्य अपने राजस्व का आधा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में खो देते हैं। पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार और कई बड़े राज्य सालाना लाखों करोड़ रुपये का ब्याज चुकाकर सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए पैसा ही नहीं बचा पाते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों को अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च करना पड़ रहा है। RBI के वित्त वर्ष 2025 (FY25) के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ राज्यों में कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज उनके टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक खा रहा है। इसका सीधा असर यह होता है कि सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, नए विकास प्रोजेक्ट पर खर्च करने के लिए राज्यों के पास पैसा कम बचता है।
कर्ज के बोझ तले दबे भारत के टॉप राज्य
1- पश्चिम बंगाल
वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज का बोझ सबसे ज्यादा रहा। कुल राजस्व 1.09 लाख करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 45,000 करोड़ रुपये। यानी कुल राजस्व का 42% सिर्फ ब्याज में चला गया।
2- पंजाब
दूसरे नंबर पर पंजाब रहा। कुल राजस्व 70,000 करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 24,000 करोड़ रुपये। राजस्व का 34% हिस्सा ब्याज में खर्च।
3- बिहार
तीसरे स्थान पर बिहार है। कुल राजस्व 62,000 करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 21,000 करोड़ रुपये। ब्याज का हिस्सा 33% रहा।
4- केरल
कुल राजस्व 1.03 लाख करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 29,000 करोड़ रुपये। राजस्व का करीब 28%।
5- तमिलनाडु
ब्याज भुगतान 62,000 करोड़ रुपये। राजस्व का हिस्सा 28%। टैक्स कलेक्शन ज्यादा होने के बावजूद कर्ज का दबाव बना हुआ है।
6- हरियाणा
कुल राजस्व 94,000 करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 25,000 करोड़ रुपये। करीब 27% हिस्सा ब्याज में।
7- राजस्थान
कुल राजस्व 1.48 लाख करोड़ रुपये।ब्याज भुगतान 38,000 करोड़ रुपये।
8- आंध्र प्रदेश
कुल राजस्व 1.2 लाख करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 29,000 करोड़ रुपये।
9- मध्य प्रदेश
कुल राजस्व 1.23 लाख करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 27,000 करोड़ रुपये। कुल कलेक्शन का करीब 22%।
10- कर्नाटक
कुल राजस्व 2.03 लाख करोड़ रुपये। ब्याज भुगतान 39,000 करोड़ रुपये। ब्याज का हिस्सा 19%।
कर्ज का असर
जब राज्यों की कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में चला जाता है तो विकास की रफ्तार धीमी हो जाती है। जनता से जुड़े कामों पर असर पड़ता है। नए निवेश और योजनाओं में दिक्कत आती है। लंबे समय में यह स्थिति राज्यों की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं मानी जाती।

