तमिलनाडु से विदेश नीति तक सुब्रमण्यम स्वामी का वार, डीएमके को बताया अजेय
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तमिलनाडु से विदेश नीति तक सुब्रमण्यम स्वामी का वार, डीएमके को बताया अजेय

सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर तीखा हमला बोला, भारत को अमेरिकी आर्थिक प्रभाव में बताया और तमिलनाडु में डीएमके को सबसे मजबूत कहा।


Subramanian Swamy Exclusive Interview: सुब्रमण्यम स्वामी कभी भी अपनी बात को घुमाकर कहने वालों में नहीं रहे हैं और 86 वर्ष की उम्र में भी उनके तेवर बिल्कुल वैसे ही हैं। दे फेडरल को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व केंद्रीय मंत्री, भाजपा नेता और हार्वर्ड अर्थशास्त्री ने भारत को “आर्थिक दृष्टि से एक तरह से अमेरिका की कॉलोनी” बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत को वैश्विक मंच पर अप्रासंगिक बनाने का आरोप लगाया और तमिलनाडु में भाजपा–एआईएडीएमके गठबंधन को अजेय द्रविण मुनेत्र कड़गम (DMK) के सामने कमजोर बताया।

ईरान संकट और अमेरिका-इज़राइल पर टिप्पणी

स्वामी के अनुसार, भारत के पास इस संकट से निपटने के कई आसान रास्ते हैं। उनका कहना है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाकर यह मुद्दा उठाना चाहिए कि अमेरिका और इज़राइल ने बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के हमला कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है।उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका है कि इन देशों ने सुरक्षा परिषद को दरकिनार किया। ईरान के परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने कहा कि चाहे उनके पास हो या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता कोई भी देश परमाणु बम का इस्तेमाल करने की हिम्मत नहीं करेगा क्योंकि इससे पूरी दुनिया खत्म हो सकती है।”

भारत की विदेश नीति और मोदी सरकार पर सवाल

सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिना किसी स्पष्ट निमंत्रण के हुई और इसका मौजूदा संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार, भारत इस पूरे घटनाक्रम में कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में भी कहा कि भारत ने पहले पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपना सकता था, लेकिन अमेरिकी दबाव के बाद पीछे हट गये।

अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर आलोचना

स्वामी ने कहा कि अमेरिका एक व्यापारिक मानसिकता वाला देश है और वह किसी को रियायत नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका रूस, चीन या उत्तर कोरिया के साथ संबंध रखने पर भारत को प्रतिबंधों की धमकी देता है।उनके अनुसार, “हम एक तरह से आर्थिक रूप से अमेरिका की कॉलोनी बन गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका भारत को यह कैसे निर्देश दे सकता है कि वह रूसी तेल खरीदे या नहीं।

तमिलनाडु की राजनीति: DMK सबसे मजबूत

तमिलनाडु की राजनीति पर स्वामी का मानना है कि वर्तमान में केवल Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) ही संगठित और मजबूत पार्टी है।उन्होंने कहा कि भाजपा–एआईएडीएमके गठबंधन इस समय DMK का मुकाबला नहीं कर सकता। उनके अनुसार, चुनाव में पैसे का बड़ा प्रभाव है और मतदाता अक्सर उसी को वोट देते हैं जिसके जीतने की संभावना ज्यादा होती है।स्वामी ने दावा किया कि अगर उन्हें पांच साल के लिए तमिलनाडु की जिम्मेदारी दी जाए, तो वे DMK को हरा सकते हैं।

अन्य नेताओं पर राय

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उन्होंने एक मजबूत और लड़ाकू नेता बताया और उनके फिर से जीतने की संभावना जताई।वहीं अभिनेता विजय की राजनीति में एंट्री पर उन्होंने कहा कि इससे फिलहाल कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।

राष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर चिंता

स्वामी ने कहा कि देश की राजनीति का स्तर गिर रहा है और भाजपा को भी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरना पड़ेगा।अर्थव्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने खुली बहस की मांग की, लेकिन यह भी कहा कि सरकार इससे बचती है।

संसद और अपनी भूमिका पर विचार

स्वामी ने संसद के कामकाज को निरर्थक बताते हुए कहा कि वहां सिर्फ शोर-शराबा होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बोलने का मौका नहीं देते थे, इसलिए उन्होंने संसद से दूरी बना ली।उन्होंने कहा कि अब वे किताबें लिखने, छात्रों से मिलने और उन्हें संबोधित करने में अधिक रुचि रखते हैं, और दोबारा सांसद बनने की इच्छा नहीं रखते हालांकि अगर लोग आग्रह करेंगे तो वे विचार कर सकते हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी के इस साक्षात्कार में भारत की विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिति पर गहरी आलोचना देखने को मिलती है। उनकी टिप्पणियां जहां एक ओर विवादास्पद हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान राजनीतिक और वैश्विक परिस्थितियों पर गंभीर बहस को भी जन्म देती हैं।

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