
मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुकेश चंद्रशेखर को जमानत, कोर्ट ने कहा- 'आरोपी की स्वतंत्रता नहीं छीन सकते'
इस मामले में चंद्रशेखर पर आरोप था कि उसने टीटीवी दिनाकरन के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाई और वी.के. शशिकला गुट को ‘दो पत्ती’ चुनाव चिह्न दिलाने के लिए चुनाव आयोग के एक अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश की।
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को 2017 में ED द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुकैश चंद्रशेखर को जमानत दे दी। यह उसके खिलाफ दर्ज 31 मामलों में से 27वां मामला है, जिसमें उसे जमानत मिली है।
विशेष न्यायाधीश (राउज एवेन्यू कोर्ट) विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा: “स्वतंत्रता हमारे संविधान का सबसे पवित्र सिद्धांत है। अदालत अपने फैसलों में स्वतंत्रता की बात करते हुए राज्य के साथ किसी विशेष कानून या आर्थिक अपराध के बहाने समझौता नहीं कर सकती।”
मामला क्या है?
यह मामला आरोपों से जुड़ा है कि सुकैश ने AIADMK नेता टी.टी.वी. दिनाकरन के लिए बिचौलिए के रूप में काम किया और चुनाव आयोग से ‘टू लीव्स’ चुनाव चिन्ह दिलाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की।
आरोप है कि 14 अप्रैल 2017 को उसने खुद को आईएएस अधिकारी सरवण कुमार (तत्कालीन कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के निजी सचिव) बताकर दिनाकरन से संपर्क किया और चुनाव आयोग में लंबित याचिका पर अनुकूल आदेश दिलाने का भरोसा देकर सौदा किया।
16 अप्रैल 2017 को उन्हें दिल्ली के एक पांच सितारा होटल से गिरफ्तार किया गया, जहां उसके पास से कथित तौर पर 1.30 करोड़ रुपये बरामद हुए।
अदालत की टिप्पणी
न्यायाधीश ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग गंभीर अपराध है, लेकिन PMLA जैसे विशेष कानून का इस्तेमाल किसी आरोपी की स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ 31 मामले होने के बावजूद इस केस में जमानत का अधिकार खत्म नहीं होता। आरोपी पहले ही 26 मामलों में जमानत पर है। हिरासत की अवधि प्रस्तावित सजा की आधी अवधि से अधिक हो चुकी है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कई वर्षों से मामले की सुनवाई रुकी हुई है, जिससे आरोपी को बिना ट्रायल के लंबी हिरासत झेलनी पड़ी।
अन्य प्रमुख मामले
सुकैश चंद्रशेखर के खिलाफ एक और बड़ा मामला 200 करोड़ रुपये की कथित उगाही का है। इसमें उसने खुद को पीएमओ का प्रतिनिधि बताकर अदिति सिंह (पूर्व रैनबैक्सी मालिक शिवेंद्र सिंह की पत्नी) को फोन किया और उनके पति को जेल से छुड़ाने का झांसा दिया।
2021 में अदिति सिंह ने दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि “लॉ सेक्रेटरी” बनकर एक व्यक्ति ने उनसे 200 करोड़ रुपये ठगे। इसके बाद उगाही और फर्जी पहचान का मामला दर्ज हुआ और सुकैश को गिरफ्तार किया गया।

