डॉग बाइट पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, इलाज नहीं रोकथाम है ज़रूरी
x

डॉग बाइट पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, इलाज नहीं रोकथाम है ज़रूरी

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने डॉग बाइट और रेबीज रोकने के लिए शेल्टर, फीडिंग जोन और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


Supreme Court on Dog Bite: आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि कोई जानवर कब काटने के मूड में होगा और कब नहीं। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में इलाज से बेहतर रोकथाम का सिद्धांत अपनाना ही सार्वजनिक सुरक्षा के हित में है।

संस्थागत परिसरों में बढ़ती घटनाओं पर अदालत की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि 7 नवंबर को उसने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों जैसे संवेदनशील और संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी का संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत तय शेल्टरों में भेजा जाए।

तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने यह भी साफ किया था कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाए, उन्हें उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें हटाया गया है। इसके साथ ही राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने के भी आदेश दिए गए थे।

अदालत ने कहा था कि संस्थागत परिसरों में बार-बार हो रही डॉग बाइट की घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित रखने में “प्रणालीगत विफलता” को भी दर्शाती हैं। यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सुओ मोटो आधार पर उठाया था।

दिल्ली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में डॉग बाइट के बढ़ते मामलों और रेबीज से हो रही मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए आदेश दिया था कि सभी आवारा कुत्तों को आवासीय इलाकों से हटाकर शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए।

अदालत ने निर्देश दिया था कि शेल्टरों में प्रशिक्षित पेशेवर मौजूद हों, जो कुत्तों को सुरक्षित तरीके से संभाल सकें, उनकी नसबंदी और टीकाकरण करें और उन्हें दोबारा खुले में न छोड़ें।

दिल्ली में आवारा कुत्तों की स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन कुत्तों को पकड़ने और हटाने की कार्रवाई में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आक्रामक और रेबीज संक्रमित कुत्तों पर कोई ढील नहीं

एक अन्य सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि सामान्य परिस्थितियों में कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है। लेकिन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने साफ कहा कि यह नियम रेबीज से संक्रमित या संदिग्ध कुत्तों और आक्रामक व्यवहार दिखाने वाले कुत्तों पर लागू नहीं होगा।

फीडिंग को लेकर सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों को निर्देश दिया है कि वे आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए अलग और निर्धारित स्थान तय करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी और आदेश का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश आवारा कुत्तों से होने वाले खतरे को नियंत्रित करने, डॉग बाइट और रेबीज जैसी घटनाओं पर रोक लगाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।

Read More
Next Story