
SC से ममता बनर्जी को झटका, I-PAC पर ED रेड मामले में दखल देने को कोर्ट ने बताया गंभीर, थमाया नोटिस
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली के बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर वह इस मामले में दखल नहीं देता, तो देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोटिस भेजा है. ED की दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें कही है.
कोर्ट ने कहा, बिगड़ सकती है कानून-व्यवस्था
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली के बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर वह इस मामले में दखल नहीं देता, तो देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जब वह I-PAC नाम की राजनीतिक सलाहकार कंपनी और उसके एक मालिक के घर पर छापा मार रही थी, तब राज्य सरकार और पुलिस ने जांच में रुकावट डाली. कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि सवाल उठता है कि क्या राज्य सरकार केंद्र की जांच एजेंसियों के काम में दखल दे रही है?
CCTV फुटेज रखा जाए सुरक्षित
ED ने आरोप लगाया है कि जब वह कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में I-PAC नाम की राजनीतिक सलाहकार कंपनी के दफ्तर पर छापा मार रही थी, तब राज्य सरकार और पुलिस ने उसकी जांच में दखल दिया. ED ने इस मामले की CBI जांच की मांग की है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह "बहुत चौंकाने वाला पैटर्न" है. तब कोर्ट ने कहा, ये मामला बेहद गंभीर है. सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी, राजीव कुमार और अन्य लोगों को 2 हफ्ते में जवाब देने को कहा गया है. साथ ही कोर्ट ने ये हिदायत दी जिन जगहों पर छापे पड़े थे, वहां की CCTV फुटेज सुरक्षित रखा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने ED अधिकारियों के खिलाफ बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर भी रोक लगा दी है.
ED ने की CBI जांच की मांग
ED ने कोर्ट से यह भी कहा है कि ममता बनर्जी छापे के दौरान जो कागज और इलेक्ट्रॉनिक सामान ले गई, उन्हें वापस किया जाए. ED का कहना है कि यह सीधी चोरी जैसा है और इससे केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल टूटेगा. ED ने इस मामले में CBI जांच की मांग भी की है. ED का कहना है कि मुख्यमंत्री का ऐसा करना कानून के खिलाफ है साथ में ये भी मांग की गई कि जिन पुलिस अफसरों ने मुख्यमंत्री का साथ दिया, उन्हें निलंबित किया जाए. जबकि TMC का आरोप है कि ED उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश कर रही थी.
बंगाल सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, ED को यह मामला सुप्रीम कोर्ट नहीं, हाई कोर्ट में उठाना चाहिए था. ED ने एक साथ दो अदालतों में केस करके "फोरम शॉपिंग" की है. उन्होंने यह भी कहा कि छापा शांतिपूर्वक हुआ था और कोई हंगामा नहीं हुआ.
मामले पर अब अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी.

