
पेंशनर्स को DA के बराबर DR जरूरी,सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महंगाई में कर्मचारियों और पेंशनर्स पर समान असर होता है, इसलिए DA और DR में अंतर असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महंगाई का असर कार्यरत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनर्स दोनों पर समान रूप से पड़ता है। इसलिए कोई भी राज्य पेंशनर्स को मिलने वाली महंगाई राहत (Dearness Relief- DR) में, कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (Dearness Allowance- DA) से कम बढ़ोतरी नहीं कर सकता। कोर्ट ने इसे मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताया।
DA और DR का उद्देश्य एक
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि DA और DR दोनों का उद्देश्य एक ही है—बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत से राहत देना। ऐसे में पेंशनर्स को कम बढ़ोतरी देने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं हो सकता।कोर्ट ने कहा, “महंगाई कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों कर्मचारियों को समान रूप से प्रभावित करती है। इसलिए DA और DR की दरों में अंतर करना किसी वैध उद्देश्य से जुड़ा नहीं है।”
किस मामले में आया फैसला?
यह फैसला केरल सरकार के एक आदेश से जुड़े मामले में आया। इस आदेश के तहत केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) के कर्मचारियों को 14% DA बढ़ोतरी दी गई, जबकि पेंशनर्स को केवल 11% DR बढ़ोतरी दी गई थी।
केरल सरकार की दलील
केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि कर्मचारी और पेंशनर्स दो अलग-अलग वर्ग हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग दरों से लाभ देना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है।KSRTC ने भी वित्तीय संकट का हवाला देते हुए कहा कि कम DR देना एक सोच-समझकर लिया गया फैसला था।
पेंशनर्स का पक्ष
पेंशनर्स ने इसका विरोध करते हुए कहा कि DA और DR का उद्देश्य एक ही है महंगाई से राहत देना। जब महंगाई दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है, तो अलग-अलग दरें देना तर्कहीन है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने पेंशनर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि भले ही कर्मचारी और पेंशनर्स अलग-अलग वर्ग हों, लेकिन महंगाई के मामले में यह अंतर लागू नहीं होता। अलग-अलग दरें न केवल अन्यायपूर्ण हैं, बल्कि समानता के सिद्धांत पर भी खरी नहीं उतरतीं।कोर्ट ने यह भी कहा कि समानता एक गतिशील अवधारणा है और इसे सीमित दायरे में नहीं बांधा जा सकता। “समानता मनमानेपन के विपरीत है,” कोर्ट ने स्पष्ट किया।हालांकि, कोर्ट ने माना कि वित्तीय संकट के कारण लाभ देने में देरी हो सकती है, लेकिन इससे किसी एक वर्ग को कम लाभ देना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार और KSRTC की अपील खारिज कर दी और केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पेंशनर्स के पक्ष में निर्णय दिया गया था।

