क्या दोबारा हिंदू धर्म अपनाने से SC का दर्जा वापस मिल जाता है?
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हिंदू धर्म छोड़कर वापस अपनाने पर क्या SC/ST का दर्जा वापस मिल जाता है?

क्या दोबारा हिंदू धर्म अपनाने से SC का दर्जा वापस मिल जाता है?

पादरी सी आनंद के केस में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बताया, क्या दोबारा हिंदू धर्म अपनाने से वापस मिल जाता है SC का दर्जा?


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पादरी सी आनंद ने वर्ष 2021 में एक आपराधिक मामला दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने ए. आर. रेड्डी नामक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत शिकायत की थी। आनंद का जन्म अनुसूचित जाति में हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी के रूप में कार्य कर रहे थे।

इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित कोई भी व्यक्ति यदि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो वह अपने SC दर्जे को खो देता है। साथ ही यह सवाल भी सामने आया कि क्या धर्मांतरण के बाद यदि कोई व्यक्ति दोबारा अपने मूल धर्म में लौटता है तो क्या उसे अनुसूचित जाति का दर्जा फिर से मिल सकता है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने की। अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी अन्य धर्म को अपनाते ही अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

फैसले का आधार क्या है?

पीठ ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुच्छेद 3 के अनुसार, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। इस प्रावधान के तहत किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर SC का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।

क्या दोबारा मिल सकता है SC दर्जा?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ शर्तों के पूरा होने पर अनुसूचित जाति का दर्जा दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए तीनों शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है।

पहला, व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उसका जन्म मूल रूप से उसी जाति में हुआ था, जो अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।

दूसरा, यह दिखाना होगा कि उसने हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वास्तविक रूप से वापसी की है और अपने पूर्व धर्म का पूरी तरह त्याग कर दिया है।

तीसरा, उसे यह भी सिद्ध करना होगा कि उसकी मूल जाति के सदस्यों ने उसे पुनः स्वीकार कर लिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

पादरी सी आनंद ने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश के एक गांव में रविवार की प्रार्थना के दौरान उन पर हमला किया गया। इसके बाद उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया।

30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जो व्यक्ति ईसाई धर्म अपना चुका है और उसका पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

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