उमर-शरजील की जमानत पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला, 5 साल बाद खुलेंगे बंद दरवाजे?
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उमर-शरजील की जमानत पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला, 5 साल बाद खुलेंगे बंद दरवाजे?

Delhi riots 2020: अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी था। हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 के दंगों के “बड़े साजिश” मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार किया था।


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Supreme Court: साल 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश मामले में 53 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा घायल होने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट में अहम दिन है। उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी। आरोपों की गंभीरता, आतंकवाद रोधी कानून और दिल्ली पुलिस के 'पूर्व-योजित साजिश' के दावे इस मामले में खासा अहम पड़ाव है। जनता की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत उन्हें जमानत देगी या जेल में रहकर ही इस विवाद की अगली कड़ी का सामना करना होगा।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ इस मामले में अभियुक्तों की कई याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई में दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बहस की। अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंहवी, सिद्धार्थ डेव, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए।

पुलिस का आरोप

दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि फरवरी 2020 के दंगे खुद नहीं हुए, बल्कि यह भारत की संप्रभुता पर “पूर्व-योजित और योजनाबद्ध हमला” था। पुलिस का दावा है कि शरजील इमाम के भाषणों को अन्य अभियुक्तों पर भी लगाया जा सकता है और इन्हें मामले में सबूत के रूप में उपयोग किया जा सकता है। एसवी राजू ने तर्क दिया कि साजिश में शामिल सभी लोग एक-दूसरे के कृत्यों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि एक साजिशकर्ता के कृत्य दूसरों पर थोपे जा सकते हैं। शरजील इमाम के भाषण उमर खालिद पर भी लागू होंगे। शरजील इमाम का मामला अन्य अभियुक्तों के खिलाफ सबूत के रूप में लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि खालिद ने दंगों से पहले जानबूझकर दिल्ली छोड़ने की योजना बनाई ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

आतंकवाद के आरोपों को चुनौती

जमानत की याचिका में शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी पीड़ा जताते हुए कहा कि उन्हें “खतरनाक बौद्धिक आतंकवादी” कहकर लेबल किया गया, जबकि उन पर कोई मुकम्मल मुकदमा या सजा नहीं हुई। इमाम के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ ने कहा कि इमाम को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जो कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के शुरू होने से पहले था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके भाषण अकेले “आपराधिक साजिश” का अपराध सिद्ध नहीं करते।

क्या हैं आरोप?

उमर खालिद, शरजील इमाम, फातिमा, मीरान हैदर और शिफा उर रहमान पर सख्त आतंकवाद रोधी कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), 1967 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनपर आरोप है कि वे 2020 के दंगों के “मास्टरमाइंड” थे, जिनमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए। UAPA की धारा 16 के अनुसार, जो कोई भी आतंकवादी कृत्य करता है और जिससे किसी की मृत्यु होती है, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और इसके साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा। ये दंगे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में हुई व्यापक प्रदर्शनों के दौरान भड़क उठे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी था। हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 के दंगों के “बड़े साजिश” मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार किया था।

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