
3 करोड़ बैरल तेल भारत में स्टोर करेगा UAE, रणनीतिक साझेदारी मजबूत
यूएई, भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और होर्मुज मार्ग पर निर्भरता घटेगी।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR) सिस्टम में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) स्टोर करने का फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता का सामना कर रही है।
इस समझौते के तहत भारत को बिना अरबों डॉलर खर्च किए एक बड़ा आपातकालीन तेल भंडार उपलब्ध हो जाएगा। खास बात यह है कि यह तेल UAE के पूर्वी तट से सीधे भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अधिक सुरक्षित हो जाएगी।लेकिन आखिर Strategic Petroleum Reserve (SPR) क्या होता है और भारत के लिए इसकी जरूरत क्यों है?
क्या हैं Strategic Petroleum Reserves?
Strategic Petroleum Reserves यानी SPR सरकार द्वारा बनाए गए आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार होते हैं। इनका इस्तेमाल तब किया जाता है जब युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक आपदाओं या वैश्विक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो जाए।यह किसी देश के लिए बैकअप सिस्टम की तरह काम करता है, ताकि संकट की स्थिति में ईंधन की कमी न हो और अर्थव्यवस्था पर असर कम पड़े।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 से 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल आपूर्ति में कोई भी बड़ी बाधा सीधे ईंधन उपलब्धता, उद्योग, परिवहन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।हाल के वर्षों में ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव ने दिखाया है कि वैश्विक तेल आपूर्ति कितनी संवेदनशील हो सकती है।
भारत अपने तेल भंडार कहां रखता है?
भारत अपने रणनीतिक तेल भंडार विशाल भूमिगत चट्टानी गुफाओं (Rock Caverns) में स्टोर करता है। ये गुफाएं समुद्र तटीय इलाकों में जमीन के काफी नीचे बनाई गई हैं।इन स्टोरेज सिस्टम को बेहद सुरक्षित माना जाता है क्योंकि ये सतही हमलों, प्राकृतिक आपदाओं और तेल के वाष्पीकरण से सुरक्षित रहते हैं।इन भंडारों का संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) करती है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एक सरकारी कंपनी है।
भारत के SPR केंद्र
भारत के पहले चरण (Phase-I) के SPR केंद्र आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और कर्नाटक के मंगलुरु तथा पादुर में स्थित हैं।इन तीनों केंद्रों में कुल मिलाकर करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर किया जा सकता है, जो लगभग 3.9 करोड़ बैरल के बराबर है।यह भंडार आपात स्थिति में भारत की करीब 9.5 दिनों की तेल जरूरत पूरी कर सकता है।
सरकार अब Phase-II के तहत ओडिशा के चांदीखोल और पादुर में अतिरिक्त क्षमता विकसित कर रही है। इसके पूरा होने के बाद भारत के पास करीब 12 दिनों की अतिरिक्त आपातकालीन तेल सुरक्षा उपलब्ध होगी।इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियां भी अपने स्तर पर व्यावसायिक तेल भंडार रखती हैं। इन सभी को मिलाकर भारत के पास फिलहाल करीब 74 दिनों का आपातकालीन ईंधन भंडार मौजूद है।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर भारत का तेल भंडार अब भी अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी छोटा है। अमेरिका के पास करीब 40.9 करोड़ बैरल और चीन के पास लगभग 1.4 अरब बैरल तेल भंडार है।
UAE के समझौते का महत्व
ऐसे समय में UAE का भारत में 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इस समझौते से भारत की आपातकालीन तैयारी मजबूत होगी और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी गहरा होगा।सबसे बड़ी बात यह है कि इस तेल को खरीदने का खर्च भारत को नहीं उठाना पड़ेगा। तेल का मालिकाना हक UAE के पास रहेगा और वही इसके स्टोरेज का खर्च भी उठाएगा।इससे भारत को बिना अतिरिक्त पूंजी खर्च किए बड़ा रणनीतिक तेल भंडार उपलब्ध हो जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम होगी
यह समझौता भारत को सप्लाई चेन के लिहाज से भी रणनीतिक फायदा देगा। UAE के पूर्वी तट से तेल सीधे भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा सकेगा।इससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम होगी, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है और जहां अक्सर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है।
भारत-UAE रिश्तों को मिलेगा नया आयाम
यह समझौता केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और UAE के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।आज के दौर में ऊर्जा सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी सैन्य और व्यापारिक साझेदारियां। ऐसे में UAE का यह कदम भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

