UGC new rules: देशभर में बवाल, UP में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां, दिल्ली से लखनऊ तक प्रदर्शन; SC में याचिका
x

UGC new rules: देशभर में बवाल, UP में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां, दिल्ली से लखनऊ तक प्रदर्शन; SC में याचिका

UGC new rules: देशभर में सामान्य वर्ग के छात्र UGC के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। विरोध इतना बढ़ गया है कि मंगलवार को नई दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई।


Click the Play button to hear this message in audio format

UGC protest: क्या कॉलेज कैंपस अब पढ़ाई की जगह शक और शिकायतों का मैदान बनते जा रहे हैं? क्या समानता के नाम पर लाए गए नियम नई खाई पैदा कर रहे हैं? UGC के नए नियमों ने देश की यूनिवर्सिटियों में ऐसी बहस छेड़ दी है, जो अब महज शिक्षा तक ही सीमित नहीं रही है। इस्तीफे हो रहे हैं, छात्र सड़कों पर हैं, सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। लेकिन इस बीच सवाल सिर्प एक है कि क्या यह नियम इंसाफ लाएगा या एक नई जातिगत जंग की शुरुआत करेगा?

देशभर में सामान्य वर्ग के छात्र और सवर्ण समाज के लोग यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। विरोध इतना बढ़ गया है कि मंगलवार को नई दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। प्रदर्शनकारियों परिसर के अंदर जा पाएं, इसलिए भारी बैरिकेडिंग की गई। लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी UGC के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

वहीं, उत्तर प्रदेश के कई शहरों जैसे कि लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और अलग-अलग संगठनों ने प्रदर्शन किए। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर नाराजगी जताई। यूपी के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इस मुद्दे पर कवि कुमार विश्वास ने भी तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कविता पोस्ट की है।

हालांकि, विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और किसी के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं होगा। वहीं, वकील विनीत जिंदल ने इस नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में नियम पर रोक लगाने, सभी छात्रों को समान अवसर देने और इक्विटी हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं देने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में रेगुलेशन 3(सी) के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है और कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2026 के नियमों के तहत निर्मित ढांचा सभी जातियों के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू हो।

क्यों हो रहा विरोध?

UGC ने 13 जनवरी को नए नियम जारी किए थे, जिसका नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ रखा गया है। इन नियमों के तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतें देखेंगी।

सरकार का कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में बराबरी और जवाबदेही लाने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि इन नियमों से उन्हें शक की नजर से देखा जाएगा और वे “पहले से ही दोषी” मान लिए जाएंगे। छात्रों को डर है कि इससे कैंपस में उनके खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है और माहौल बिगड़ सकता है।

संसदीय समिति की सिफारिश से आए नियम

UGC के इन नियमों के पीछे संसद की एक स्थायी समिति की सिफारिश बताई जा रही है। इस समिति ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हैं। समिति में कुल 30 सांसद हैं, जिनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल हैं। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसद मौजूद हैं।

रोहित वेमुला और पायल तड़वी केस का असर

UGC के ये नियम सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और कुछ गंभीर मामलों के बाद लाए गए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामले रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी के हैं। रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर थे। उन्होंने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी। आरोप लगा कि दलित होने के कारण उनके साथ संस्थागत भेदभाव हुआ। इस घटना के बाद देशभर में बड़े आंदोलन हुए और जवाबदेही की मांग उठी।

डॉ. पायल तड़वी मुंबई में मेडिकल की पोस्टग्रेजुएट छात्रा थीं। उन्होंने 2019 में आत्महत्या की थी। आरोप था कि आदिवासी समुदाय से होने के कारण उनके सीनियर डॉक्टरों ने उन्हें लगातार परेशान किया। इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इनके अलावा AIIMS दिल्ली का अनिकेत अंभोरे केस, JNU का सेंथिल कुमार मामला और हिमाचल प्रदेश मेडिकल कॉलेज का अमन कच्छू केस जैसे कई अन्य मामलों में भी जातिगत भेदभाव के आरोप लगे हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है।

इस मामले पर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि उन्होंने नए नियमों की वापसी को लेकर पीएम मोदी को लेटर लिखा है। यदि नियम वापिस नहीं लिए जाते हैं तो उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की है। यूपी के संभल में केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने नए UGC नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधकर बाइक रैली भी निकाली। एसोसिएशन ने इसे रद्द करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है।

Read More
Next Story