यूजीसी नियमों पर विरोध तेज, अंतिम फैसला कोर्ट के हाथ
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यूजीसी नियमों पर विरोध तेज, अंतिम फैसला कोर्ट के हाथ

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद जारी है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं। सरकार फिलहाल कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रही है और जल्द फैसला नहीं लेगी।


यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमा नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत,जस्टिस जॉय माल्या की बेंच सुनवाई करेगी। ऐसे में सरकार के सामने आगे की राह को लेकर कई विकल्प मौजूद हैं, बताया जा रहा है कि फिलहाल सरकार किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचेगी।

सरकार सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और वहां से मिलने वाले दिशा-निर्देशों का इंतजार करेगी। अदालत की राय के बाद ही नियमों में संशोधन, बदलाव या अन्य कदमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

सरकार का रुख

यूजीसी नियमों में बदलाव को लेकर हो रहे विरोध के बीच बीते मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि यह पूरी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आई है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि किसी भी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में सरकार के लिए सबसे बेहतर विकल्प यही है कि वह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करे और उसी के आधार पर कोई ठोस फैसला ले।

नियमों पर रोक या समिति का विकल्प

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सरकार के पास एक विकल्प यह हो सकता है कि नए नियमों को फिलहाल होल्ड पर रखा जाए। हालांकि, इसकी संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। यदि सरकार अपने स्तर पर कोई बदलाव करती है, तो इससे नया विवाद खड़ा हो सकता है।

एक अन्य विकल्प के तौर पर विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार नियमों के खिलाफ उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित कर सकती है। यह समिति सभी हितधारकों से बातचीत कर उनकी आपत्तियों और सुझावों को सामने ला सकती है।

मायावती ने किया यूजीसी नियमों का समर्थन

इस बीच, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने यूजीसी के नए नियमों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इन नियमों का विरोध बिल्कुल भी उचित नहीं है, हालांकि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन्हें विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए समता समिति बनाने से जुड़े प्रावधानों का विरोध केवल जातिवादी मानसिकता रखने वाले सामान्य वर्ग के कुछ लोग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे भेदभाव या किसी षड्यंत्र के रूप में देखना सही नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेना जरूरी था, ताकि समाज में किसी तरह का तनाव न पैदा हो। मायावती ने सरकार और संस्थानों से इस पहलू पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की।

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