Budget 2025: किसानों की तीन प्रमुख मांगें अधूरी! समुदाय में नाराजगी
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Budget 2025: किसानों की तीन प्रमुख मांगें अधूरी! समुदाय में नाराजगी

Budget 2025: केंद्रीय बजट 2025 को लेकर आरएसएस से संबद्ध भारतीय किसान संघ का भी मानना ​​है कि सरकार और अधिक कर सकती थी.


Union Budget 2025: केंद्रीय बजट पेश हो चुका है. लेकिन वित्त मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ हुई चर्चाओं के दौरान किसानों द्वारा उठाई गई तीन प्रमुख मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं. जिससे किसान समुदाय में निराशा देखी जा रही है.

किसानों की मुख्य मांग

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गणना प्रक्रिया को स्पष्ट और सरल बनाना तथा MSP बढ़ाना.

2. कृषि मशीनरी, उपकरण, उर्वरक और कीटनाशकों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को समाप्त करना.

3. जैविक उत्पादों के लिए एक अलग बाजार स्थापित करना.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन मांगों पर बजट में कोई घोषणा नहीं की.

बीकेएस की नाराजगी

यहां तक कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े भारतीय किसान संघ (BKS) ने भी कुछ घोषणाओं का स्वागत किया. लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार को और अधिक कदम उठाने चाहिए थे. बीकेएस के महासचिव मोहीनी मोहन मिश्रा ने कहा कि बीकेएस ने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं. सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लोन सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है. जो एक अच्छी पहल है. लेकिन, हमने पीएम किसान सम्मान निधि के तहत दी जाने वाली राशि बढ़ाने की मांग की थी. जिस पर सरकार ने कोई घोषणा नहीं की. हमने कृषि मशीनरी, उपकरण और अन्य उत्पादों से जीएसटी हटाने की मांग की थी ताकि उत्पादन लागत कम हो सके. लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया.

जैविक खेती की अनदेखी

मिश्रा ने बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना के फैसले का स्वागत किया. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जैविक रूप से उगाए गए उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए एक अलग बाजार स्थापित करने की किसानों की मांग पूरी नहीं हुई. केंद्र सरकार को जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए. सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के कुछ कदम उठाए हैं. लेकिन इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए और काम करने की जरूरत है.

एमएसपी पर निराशा

विभिन्न किसान संगठनों के सदस्यों का मानना है कि सरकार ने MSP की गणना और उसमें उत्पादन लागत और 50% लाभ जोड़ने की मांग को नजरअंदाज कर दिया. भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की मांग थी कि MSP की गणना में उत्पादन लागत और 50% मुनाफा शामिल किया जाए. पंजाब के किसान नेता रमणदीप सिंह मान ने कहा कि जब तक सरकार एमएसपी की समस्या का समाधान नहीं करती, तब तक किसानों के लिए खेती को लाभदायक बनाना मुश्किल होगा.

किसान क्रेडिट कार्ड पर सवाल

सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत लोन सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी. लेकिन किसानों के बीच इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं. कुछ किसान नेताओं ने इसे लोन ऋण जाल (Debt Trap) करार दिया.

रमणदीप सिंह मान ने कहा कि किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिलता तो वे लोन कैसे चुकाएंगे? अगर कृषि उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ीं तो यह लोन किसानों पर भारी पड़ सकता है. KCC के तहत अधिक कर्ज देना किसानों के लिए दीर्घकालिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है.

कर्ज माफी की मांग

किसान संगठनों ने किसान लोन माफी की भी मांग की थी. किसानों को उम्मीद थी कि सरकार बजट में किसानों के लिए कुछ राहत की घोषणा करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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