ट्रंप की अमेरिकी वीज़ा नीतियों का असर, भारत-चीन सबसे अधिक प्रभावित
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ट्रंप की सख्त नीतियों का भारत और चीन पर प्रभाव

ट्रंप की अमेरिकी वीज़ा नीतियों का असर, भारत-चीन सबसे अधिक प्रभावित

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च की शुरुआत में जारी स्टेट डिपार्टमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि स्थायी निवास और अस्थायी वीज़ा 11 प्रतिशत घट गए...


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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कड़ी आप्रवासन (इमिग्रेशन) नीति का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। और इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच यूनाइटेड स्टेट ने 2024 की समान अवधि की तुलना में लगभग 2,50,000 कम वीज़ा जारी किए। यह गिरावट केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक प्रवासन के पैटर्न में बदलाव का संकेत भी देती है।


द वॉशिंगटन पोस्ट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, मार्च की शुरुआत में जारी स्टेट डिपार्टमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि स्थायी निवास (Permanent Residency) और अस्थायी वीज़ा, जिनमें छात्र, कुशल कामगार, और अमेरिकी नागरिकों व कानूनी निवासियों के परिवारजन शामिल होते हैं, साल 2025 के पहले आठ महीनों में साल-दर-साल 11 प्रतिशत घट गए। खास बात यह है कि इस आंकड़े में टूरिस्ट वीज़ा शामिल नहीं हैं, जबकि उनमें भी गिरावट दर्ज की गई है।

स्टूडेंट वीज़ा: शिक्षा के सपनों पर असर

सबसे बड़ी गिरावट स्टूडेंट वीज़ा में देखी गई, जो लंबे समय से भारत और चीन के छात्रों के लिए अमेरिका में उच्च शिक्षा का प्रमुख रास्ता रहे हैं। जनवरी से अगस्त 2024 के बीच जहां अमेरिका ने 3,44,000 से अधिक छात्र वीज़ा जारी किए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर करीब 2,38,000 रह गई। यानी 1,00,000 से अधिक की कमी।


यह गिरावट केवल संख्या में कमी नहीं है बल्कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि कड़े वीज़ा नियम, बढ़ती जांच प्रक्रिया और अनिश्चित नीतियां अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका की बजाय अन्य देशों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


भारतीय और चीनी नागरिकों पर विशेष प्रभाव

भारतीय और चीनी नागरिकों को जारी कुल वीज़ा की संख्या में लगभग 84,000 की कमी दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण दोनों देशों से आने वाले छात्रों और कुशल पेशेवरों की संख्या में गिरावट है। आईटी, इंजीनियरिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। क्योंकि अमेरिका लंबे समय से इन प्रतिभाओं का प्रमुख केंद्र रहा है।


परिवार आधारित वीज़ा भी प्रभावित

इमिग्रेशन नीति का असर केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं रहा बल्कि परिवारों के पुनर्मिलन पर भी पड़ा है। फैमिली प्रेफरेंस वीज़ा, जो अमेरिकी नागरिकों के वयस्क बच्चों और भाई-बहनों को कवर करते हैं। इसमें 27 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जो 44,000 से ज्यादा कम है।

इसके अलावा, मंगेतर और जीवनसाथी के वीज़ा भी लगभग आधे रह गए, जो साल 2024 के पहले आठ महीनों में 37,229 से घटकर 2025 में 18,894 हैं। यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर भी इन नीतियों का सीधा प्रभाव पड़ा है।


कामगार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर असर

समुद्री और एयरलाइन कर्मचारियों के वीज़ा में 30,876 की कमी आई, जबकि सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों (cultural exchange programs) के तहत जारी वीज़ा में 29,594 की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह साफ है कि वैश्विक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अस्थायी कार्य अवसर भी प्रभावित हुए हैं।


बिजनेस और टूरिज्म वीज़ा में गिरावट

व्यापार और पर्यटन वीज़ा में भी लगभग 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो करीब 2,00,000 वीज़ा कम होने के बराबर है। हालांकि यह गिरावट अन्य श्रेणियों की तुलना में कम है, फिर भी यह संकेत देती है कि अमेरिका आने वाले लोगों की कुल संख्या में व्यापक कमी आई है।


व्हाइट हाउस का पक्ष

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप के उस वादे के अनुरूप हैं, जिसमें अमेरिकी नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

वहीं, स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि वीज़ा कोई अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। उनके अनुसार, बिना उचित जांच के बड़े पैमाने पर विदेशी नागरिकों को प्रवेश देने से सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।


बड़ी तस्वीर क्या कहती है?

इन आंकड़ों को केवल वीज़ा संख्या के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह वैश्विक गतिशीलता, शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय रुझान और प्रतिभा के प्रवाह (talent mobility) में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

जहां एक ओर अमेरिका अपनी सीमाओं को अधिक नियंत्रित करने की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इससे वैश्विक प्रतिभाएं कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप या अन्य उभरते गंतव्यों की ओर शिफ्ट होती हैं।



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