
वक्फ बिल पर चर्चा ही नहीं शक्ति प्रदर्शन भी, क्या विपक्ष दिखा पाएगा अपनी ताकत
लोकसभा में आज वक्फ संशोधन बिल को पेश किया जाएगा। इस बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय है। मोदी सरकार के दोनों सहयोगी दल जेडीयू-टीडीपी ने अपने नजरिये को साफ कर दिया है।
Waqf Amendment Bill: विपक्षी दलों और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) जैसे मुस्लिम संगठनों के प्रतिरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित कराने का फैसला किया है, जिससे सदन में टकराव का रास्ता साफ हो गया है। 'धर्मनिरपेक्ष' सहयोगी टीडीपी, जेडी(यू) और एलजेपी के समर्थन की बदौलत अपने पक्ष में संख्याबल जुटाए जाने के बाद सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में भी विधेयक पारित कराने का फैसला किया है। मंगलवार शाम को इंडिया ब्लॉक ने बैठक की और बहस में भाग लेने और इसका जोरदार तरीके से विरोध करने का फैसला किया, जिसमें नेतृत्व ने विधेयक पर चर्चा के दौरान किसी भी तरह के व्यवधान या बहिष्कार के खिलाफ सहमति जताई। टीडीपी, जेडीयू और एलजेपी ने कहा कि वक्फ बिल पर उनके सुझाव स्वीकार कर लिए गए हैं, समर्थन में वोटिंग की तैयारी है
राज्यसभा में भी पारित कराने की योजना
सरकार को तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) जैसे 'धर्मनिरपेक्ष' सहयोगी दलों का समर्थन प्राप्त है, जिससे संख्याबल उसके पक्ष में है। इसी समर्थन को देखते हुए, सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में भी विधेयक को पारित कराने की योजना बनाई है।
विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध का किया फैसला
इंडिया गठबंधन की मंगलवार शाम हुई बैठक में विधेयक पर खुलकर बहस करने और पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, नेतृत्व ने यह भी तय किया कि विधेयक पर चर्चा के दौरान कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा और न ही बहिष्कार या वॉकआउट किया जाएगा।TDP, JDU और LJP ने कहा कि उनकी सिफारिशों को विधेयक में शामिल कर लिया गया है और वे विधेयक के समर्थन में मतदान करेंगे।
सरकार की तत्परता और विपक्ष की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष इस विधेयक पर अपनी आपत्ति को मजबूती से रखने और मतदान की मांग करने पर एकमत है। सरकार की जल्दबाजी और दृढ़ संकल्प, खासकर ईद की नमाज के दौरान मुस्लिम संगठनों द्वारा ‘ब्लैक आर्मबैंड’ विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर, महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मंगलवार को व्यापार सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में सरकार ने विपक्ष की लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा की मांग को खारिज कर दिया। इससे पहले, यह चर्चा लंबी चलने की स्थिति में शुक्रवार को बजट सत्र समाप्त होने से पहले विधेयक पारित होने पर संदेह उत्पन्न हो सकता था।
लोकसभा में आठ घंटे की चर्चा, हंगामे के आसार
अब लोकसभा में आठ घंटे की बहस होगी, जो काफी गरमागरम रहने की संभावना है। इस बात के संकेत BAC बैठक में ही मिल गए थे, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि चर्चा का समय बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन विपक्ष इस आश्वासन से असंतुष्ट होकर बैठक से बाहर चला गया।
सांसदों के लिए व्हिप जारी
बीजेपी, कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों सहित अधिकांश पार्टियों ने अपने सांसदों को अगले दो दिनों तक सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू बुधवार दोपहर को विधेयक को पेश करेंगे। इसे संयुक्त संसदीय समिति के सुझावों के अनुसार पुनः तैयार किया गया है।
संख्याबल NDA के पक्ष में
हालांकि, विपक्ष के विरोध और बहस की अवधि का अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने की संभावना है, क्योंकि संख्याबल NDA के पक्ष में भारी है।लोकसभा में NDA के पास 293 सांसद हैं, जो 542 सदस्यीय सदन में स्पष्ट बहुमत से अधिक है। राज्यसभा में भी NDA ने 126 सांसदों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। 236 सदस्यीय सदन में दो निर्दलीय और छह नामित सदस्य आमतौर पर सरकार के समर्थन में मतदान करते हैं।कुछ सांसदों के मतदान से अनुपस्थित रहने की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे विधेयक के पारित होने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विपक्ष ने विधेयक को बताया "अल्पसंख्यक विरोधी"
विपक्षी गठबंधन ने इस विधेयक को "असंवैधानिक, अल्पसंख्यक विरोधी और मुस्लिम विरोधी" करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक को एक विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में तय किया गया कि विपक्ष चर्चा में बाधा नहीं डालेगा और न ही बहिष्कार या वॉकआउट करेगा। खड़गे ने इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा, "सदन सुचारू रूप से चले और सभी को इस विधेयक पर बोलने का मौका मिले।"
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "विपक्ष एकजुट है। यह विधेयक विभाजनकारी है। हम चर्चा में भाग लेंगे और देखेंगे कि क्या सरकार ने हमारे सुझाव और संशोधन विधेयक में शामिल किए हैं।"