मैनचेस्टर जा रही इंडिगो की फ्लाइट को क्यों लेना पड़ा यू-टर्न? 14 घंटे तक वापस दिल्ली में की लैंडिंग
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मैनचेस्टर जा रही इंडिगो की फ्लाइट को क्यों लेना पड़ा यू-टर्न? 14 घंटे तक वापस दिल्ली में की लैंडिंग

इंडिगो की दिल्ली-मैनचेस्टर फ्लाइट को हवा में 14 घंटे बिताने के बाद वापस भारत लौटना पड़ा। ईरान-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की वजह से फ्लाइट को हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण इथियोपिया सीमा के पास से वापस दिल्ली वापस आना पड़ा।


कल्पना कीजिए कि आप विदेश यात्रा के लिए विमान में बैठते हैं, 14 घंटे तक हवा में सफर करते हैं, लेकिन जब नीचे उतरते हैं तो पता चलता है कि आप उसी शहर में वापस आ गए हैं जहाँ से आपने उड़ान भरी थी। सोमवार (9 मार्च, 2026) को इंडिगो की दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली फ्लाइट (6E33) के यात्रियों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अचानक लगे हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण इस विमान को इथियोपिया-इरिट्रिया सीमा के पास से यू-टर्न लेना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

इंडिगो की यह उड़ान (बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर) सोमवार रात 12:30 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से मैनचेस्टर के लिए रवाना हुई थी। विमान फारस की खाड़ी के संघर्ष प्रभावित इलाकों से बचते हुए उत्तर-पूर्वी अफ्रीका और अदन की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भर रहा था। जैसे ही विमान यमन के दक्षिण में इथियोपिया-इरिट्रिया सीमा के करीब पहुँचा, इसे "अंतिम समय में लगे हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों" के कारण वापस लौटने का निर्देश दिया गया।नतीजतन, 14 घंटे की लंबी और थका देने वाली उड़ान के बाद, विमान दोपहर 2:30 बजे वापस दिल्ली में ही लैंड हुआ। 26 फरवरी के बाद मैनचेस्टर के लिए यह इंडिगो की पहली उड़ान थी, जिसे इस तरह बीच रास्ते से लौटना पड़ा।

इंडिगो और अधिकारियों का क्या है कहना ?

इंडिगो ने एक प्रेस बयान जारी कर स्थिति साफ की। एयरलाइन ने कहा, "पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अचानक लगे हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली फ्लाइट 6E 033 को वापस दिल्ली लाना पड़ा। हम यात्रियों की असुविधा के लिए खेद जताते हैं और अधिकारियों के साथ मिलकर यात्रा दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।"

क्यों बढ़ी मुश्किलें?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समस्या की जड़ में अंतरराष्ट्रीय नियम और सुरक्षा चिंताएं हैं। दरअसल, यह विमान नॉर्स अटलांटिक एयरवेज से लीज पर लिया गया है। यह कंपनी यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) के अधिकार क्षेत्र में आती है। ईरान और अन्य देशों के बीच जारी युद्ध और संघर्ष के कारण, EASA ने अपने अधीन आने वाली सभी एयरलाइनों को पश्चिम एशिया के 11 देशों के ऊपर से उड़ान भरने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

हवाई जहाज में 14 घंटे बिताने के बाद भी गंतव्य तक न पहुँच पाने के कारण यात्री काफी परेशान दिखे। सुरक्षा कारणों से एयरलाइनों को अक्सर मार्ग बदलने पड़ते हैं, लेकिन अदन की खाड़ी जैसे संवेदनशील इलाके से वापस लौटना तकनीकी और परिचालन की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती होती है। यात्रियों के लिए यह अनुभव किसी बुरे सपने से कम नहीं था, जहाँ वे मैनचेस्टर पहुँचने के बजाय वापस उसी टर्मिनल पर खड़े थे जहाँ से उनकी यात्रा शुरू हुई थी।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

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