यूपी में 120 सीटें तय, महाराष्ट्र भी 70 पार, बदलेगा संसद का नक्शा
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यूपी में 120 सीटें तय, महाराष्ट्र भी 70 पार, बदलेगा संसद का नक्शा

महिला आरक्षण लागू होने पर लोकसभा सीटें 816 तक बढ़ सकती हैं। 273 सीटें महिलाओं के लिए होंगी, जिससे संसद और राज्यों का राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।


महिला आरक्षण लागू होने के साथ ही देश की संसदीय संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 तक पहुंच सकती है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कुल सीटों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होगा।सरकार ने महिला आरक्षण कानून को पिछले लोकसभा चुनाव से पहले पारित किया था, लेकिन अब इसमें संशोधन की तैयारी चल रही है ताकि इसे 2029 के आम चुनाव से लागू किया जा सके। इसके लिए जल्द ही संशोधन विधेयक लाया जा सकता है।

राज्यों में कैसे बदलेगा सीटों का समीकरण

नई व्यवस्था लागू होने पर राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन उनका अनुपात पहले जैसा ही रखा जाएगा। सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी, जहां सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो सकती है। इनमें से करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।बिहार में सीटें 40 से बढ़कर 60 हो सकती हैं, जबकि महाराष्ट्र में यह संख्या 48 से बढ़कर 72 तक पहुंच सकती है। पश्चिम बंगाल में सीटें 42 से बढ़कर 63 होने की संभावना है, जिनमें से 21 सीटें महिलाओं के लिए होंगी।

दक्षिण भारत की चिंताओं का समाधान

दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता रही है कि सीटों के पुनर्निर्धारण में उनकी हिस्सेदारी घट सकती है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2029 के चुनाव में सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा। इससे राज्यों के बीच मौजूदा अनुपात बना रहेगा और दक्षिण भारत को नुकसान नहीं होगा।उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु में लोकसभा सीटों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो सकती है, जिनमें से 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बदलाव

नई व्यवस्था के तहत छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा में सीटें 2 से बढ़कर 3 हो सकती हैं। वहीं मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम में सीटों की संख्या 1 से बढ़कर 2 हो सकती है।दिल्ली में सांसदों की संख्या बढ़कर 11 हो सकती है, जिनमें 4 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। जम्मू-कश्मीर में सीटें 5 से बढ़कर 8 हो सकती हैं, जिनमें 3 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

विपक्ष से बातचीत और ‘2011 फॉर्मूला’

महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार विपक्ष से भी लगातार बातचीत कर रही है। इस प्रक्रिया में गृह मंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी दलों से चर्चा की है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष को यह भरोसा दिलाया गया है कि सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही होगा, जिससे किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।

महिला आरक्षण लागू होने से न सिर्फ संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि देश की राजनीतिक तस्वीर भी बदलेगी। हालांकि, इसके साथ सीटों के नए समीकरण और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगा।

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