
महिला आरक्षण में बड़ा संशोधन: 816 होगी लोकसभा सीटों की संख्या ! जानें प्लान
केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में बदलाव की तैयारी में है। नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 273 हो जाएगी। पढ़ें सीटों का पूरा गणित।
Amendmend In Loksabha Seats : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव तैयार किया है। इस संशोधित बिल को इसी सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। नए प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। इसमें से एक-तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। सोमवार को एनसीपी (एसपी), बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों के साथ चर्चा हुई। सरकार की कोशिश है कि इस ऐतिहासिक बिल को बिना किसी राजनीतिक गतिरोध के पास कराया जाए।
2011 की जनगणना बनेगा आधार
सूत्रों के मुताबिक, सीटों के नए निर्धारण (Delimitation) के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, देश भर के सभी राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 फीसदी की आनुपातिक बढ़ोतरी की जाएगी। उदाहरण के तौर पर:
उत्तर प्रदेश: 80 से बढ़कर 120 सीटें।
बिहार: 40 से बढ़कर 60 सीटें।
तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 58 या 59 सीटें।
इस बढ़ोतरी के बाद कुल सीटों का 33 फीसदी हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया जाएगा, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
दक्षिण भारत की चिंता का समाधान
इस नए फॉर्मूले के जरिए सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे टीडीपी और डीएमके) की उस पुरानी चिंता को दूर करने का प्रयास किया है, जो परिसीमन को लेकर थी। दक्षिण भारत के राज्यों का तर्क रहा है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, इसलिए सीटों के पुनर्निर्धारण में उन्हें उत्तर भारत के राज्यों (यूपी-बिहार) की तुलना में नुकसान नहीं होना चाहिए। 50 फीसदी की एकसमान बढ़ोतरी से सीटों का अनुपात बना रहेगा और किसी राज्य को दंडित महसूस नहीं होगा।
परिसीमन आयोग का गठन जल्द
बताया जा रहा है कि इस साल जून में परिसीमन आयोग का गठन किया जा सकता है। यह आयोग ही तय करेगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और सीटों का भौगोलिक विस्तार क्या होगा। 2023 के मूल कानून में प्रावधान था कि परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होगा, लेकिन अब संशोधन के जरिए सरकार इस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है।
क्या है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'?
2023 में पारित इस कानून का मुख्य उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
यह लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है।
एससी-एसटी महिलाओं के लिए 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' का प्रावधान है।
फिलहाल राज्यसभा और विधान परिषदों में यह आरक्षण लागू नहीं है।
Next Story

