पेट की चर्बी से दिमागी सेहत का कनेक्शन,आई नई रिपोर्ट
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पेट की चर्बी से दिमागी सेहत का कनेक्शन,आई नई रिपोर्ट

बढ़े हुए पेट को इसी नजरिए से देखा जाता है कि इसमें जमा फैट सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। लेकिन चुस्त-दुरुस्त रहने वाले जापानियों ने तो कुछ और ही साबित कर दिया...


जब भी पेट की चर्बी (Belly Fat) की बात होती है तो ज्यादातर लोग इसे सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि आपकी यही चर्बी आपके दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद है! हालांकि इसमें कंडीशन ये अप्लाई है कि युवा अवस्था में अगर किसी के पेट की चर्बी बढ़ जाए तो ये उसके दिमाग की सेहत के लिए लाभकारी हो सकती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि जापान की तोहो यूनिवर्सिटी (Toho University) की नई रिसर्च में खुलासा हुआ है। इस शोध में सामने आया है कि पेट के अंदरूनी हिस्से में जमा विसरल फैट (Visceral Fat) एक ऐसा प्रोटीन बनाता है, जो दिमागी सेहत को सपोर्ट करता है। हालांकि यह फायदेमंद असर केवल कम उम्र में ही देखा गया। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है और उम्र के साथ इसका क्या असर पड़ता है। साथ ही शोध कैसे और किन स्थितियों में की गई...

पेट की चर्बी और दिमागी सेहत का रिश्ता

रिसर्चर्स ने इस अध्ययन में 5, 10 और 18 महीने के नर चूहों को शामिल किया, जो क्रमश: युवा, मध्यम आयु और बुजुर्ग इंसानों की उम्र के बराबर माने जाते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि पेट के अंदरूनी हिस्सों में जमा वसा (Visceral Fat) से एक खास प्रोटीन CX3CL1 बनता है, जो दिमागी सेहत के लिए अहम BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। ये BDNF दिमाग की कोशिकाओं के बनने, इन कोशिकाओं यानी सेल्स को डैमेज से बचाने और नए कनेक्शन बनाने की प्रक्रिया में बहुत अहम भूमिका निभाता है।

उम्र के साथ कैसे बदलता है असर?

युवा चूहों में पेट की चर्बी से ज्यादा मात्रा में CX3CL1 प्रोटीन बनता है, जिससे उनके दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहती है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, CX3CL1 का स्तर गिरने लगता है और इसके साथ ही BDNF का स्तर भी कम हो जाता है। यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने लगती है और दिमाग की कार्यक्षमता घटती है।

वैज्ञानिकों ने ऐसे की क्रॉस चेकिंग

रिसर्च में ये हैरान करने वाले नतीजे सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने इसके परिणामों को क्रॉस चेक किया और इसके लिए इन्होंने बुजुर्ग चूहों को अतिरिक्त CX3CL1 का इंजेक्शन दिया तो उनके दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर हो गई। वहीं, जब युवा चूहों में इस प्रोटीन का स्तर कृत्रिम रूप से (दवाओं और केमिकल्स की मदद से) कम किया गया तो उनके दिमाग में BDNF का स्तर भी घट गया। इससे साबित होता है कि स्वस्थ विसरल फैट से बनने वाला यह प्रोटीन कम उम्र में दिमागी सेहत को सपोर्ट कर सकता है।

क्या पेट की चर्बी वाकई फायदेमंद है?

इस रिसर्च का यह मतलब नहीं है कि दिमागी सेहत के लिए पेट की चर्बी बढ़ानी चाहिए। पेट पर जमा ज्यादा चर्बी मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। लेकिन एक संतुलित मात्रा में विसरल फैट का होना शरीर के लिए जरूरी है। क्योंकि यह दिमागी सेहत को सपोर्ट करने वाले महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है। हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल के जरिए शरीर को फिट और बैलेंस्ड रखना सबसे जरूरी है।

यह रिसर्च इस बात को समझने में मदद करती है कि शरीर के अलग-अलग हिस्से एक-दूसरे से कैसे जुड़े होते हैं। जवान उम्र में शरीर में मौजूद विसरल फैट दिमागी सेहत को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका असर कम होने लगता है। हालांकि, अभी यह अध्ययन चूहों पर आधारित है और इंसानों में इस प्रक्रिया को समझने के लिए आगे और रिसर्च की जरूरत है। इसलिए फिट और एक्टिव रहना ही दिमाग और शरीर दोनों के लिए सबसे जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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