परफेक्शन के फितूर से हो सकता है ये मेंटल डिसऑर्डर! फातिमा रहीं शिकार
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इस मेंटल डिसऑर्डर का शिकार रहीं फातिमा सना शेख, जानें पूरा किस्सा

परफेक्शन के फितूर से हो सकता है ये मेंटल डिसऑर्डर! फातिमा रहीं शिकार

भावनात्मक खालीपन और खुद की योग्यता पर होने वाले शक ने फातिमा सना शेख को भोजन से जुड़े एक मानसिक विकार का शिकार बना दिया था। ऐसे पता चला...


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Fatima Sana Shaikh: जब हम किसी अभिनेता को पर्दे पर देखते हैं तो हमें केवल उसका परफेक्ट शरीर, आत्मविश्वास और चमक दिखाई देती है। लेकिन कैमरे की रोशनी के पीछे कई बार एक लंबी मानसिक जंग चल रही होती है। हाल ही फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) ने इसी अदृश्य संघर्ष को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि वह लगभग एक वर्ष तक वे बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa) से जूझती रहीं। यह एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति अनियंत्रित रूप से अत्यधिक भोजन करता है और बाद में अपराधबोध या शरीर को लेकर भय के कारण खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है।

बुलिमिया नर्वोसा केवल खाने की आदत का प्रश्न नहीं है। ग्लैमर की दुनिया में जीने वाले लोगों के लिए यह उस मनोवैज्ञानिक दबाव का परिणाम होता है, जो परफेक्ट दिखने की संस्कृति से जन्म लेता है। फातिमा ने बताया कि यह कठिन दौर केवल भोजन से शुरू नहीं हुआ बल्कि आत्म-असुरक्षा और बाहरी अपेक्षाओं से जुड़ा था। सोशल मीडिया पर लगातार तुलना, उद्योग में फिटनेस का दबाव और शरीर की छवि को लेकर संवेदनशीलता, ये सब मिलकर मानसिक स्तर पर एक असंतुलन पैदा कर रहे थे।

ऐसे शुरू हुआ फातिमा सना शेख का संघर्ष

जब वे Dangal की शूटिंग कर रही थीं, तब उन्हें किरदार के लिए वजन बढ़ाना था। इसके लिए वे प्रतिदिन लगभग 2,500 से 3,000 कैलोरी लेती थीं और अत्यंत कठोर प्रशिक्षण से गुजरती थीं। उस समय यह कैलोरी सेवन नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण था क्योंकि शारीरिक श्रम उसकी पूर्ति कर रहा था। लेकिन शूटिंग समाप्त होने के बाद जब वही शारीरिक परिश्रम कम हो गया, तब भी भोजन की मात्रा वही बनी रही। यही वह बिंदु था जहां शरीर और मन के बीच संतुलन बिगड़ने लगा।

खाने के साथ लव-हेट रिलेशनशिप

धीरे-धीरे भोजन केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं रहा, वह भावनात्मक सहारा बन गया। फतिमा इसे लव-हेट रिलेशनशिप कहती हैं। यानी भोजन से लगाव भी और उससे अपराधबोध भी। यह वही मनोवैज्ञानिक द्वंद्व है, जिसे क्लिनिकल साहित्य में बिंज-एंड-पर्ज साइकल के रूप में वर्णित किया जाता है। व्यक्ति पहले भावनात्मक खालीपन को भरने के लिए अधिक खाता है, फिर उसी क्रिया के लिए स्वयं को दोषी ठहराता है।


बुलिमिया नर्वोसा से फातिमा को ऐसे मिला छुटकारा

फातिमा सना शेख के जीवन में एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब इनकी सह-कलाकार सान्या मल्होत्रा ने इनके व्यवहार में बदलाव को पहचाना। कई बार व्यक्ति स्वयं अपनी स्थिति को सामान्य मान लेता है। लेकिन हमसे जुड़े लोगों की दृष्टि हमें आईना दिखा सकती है। उसी प्रतिक्रिया ने फातिमा सना शेख को यह सोचने पर मजबूर किया कि समस्या केवल खाने की नहीं है बल्कि भीतर की असुरक्षा की है।


अधिक खाना खाने की वजह

फातिमा सना शेख उस दौर के अपने संघर्ष को समझाते हुए कहती हैं कि असली संघर्ष वजन का नहीं था बल्कि भावनात्मक खालीपन और आत्म-संदेह का था। जब खालीपन हावी होता और खुद की योग्यता पर शक होता तो भोजन इन भावनाओं को दबाने का एक उपाय बन गया। लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव हुआ जब मैंने जीवनशैली में धीरे-धीरे संतुलित परिवर्तन किए। नियमित दिनचर्या अपनाई, नियंत्रित आहार लिया और फिटनेस से जुड़े हेल्दी तरीके अपनाए।

फातिमा की यह स्वीकारोक्ति केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं है। बल्कि उस व्यापक सामाजिक दबाव की एक झलक भी है, जिसमें शरीर को पहचान से जोड़ दिया गया है। और यही वह बिंदु है, जहां मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की चर्चा अनिवार्य हो जाती है। क्योंकि कई बार समस्या प्लेट में रखे भोजन की नहीं बल्कि मन में छिपे बोझ की होती है।


क्यों होता है बुलिमिया डिसऑर्डर?

बुलिमिया सिर्फ भूख से जुड़ी समस्या नहीं है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं...

बॉडी इमेज को लेकर असुरक्षा

वजन कम रखने का सामाजिक दबाव

परफेक्शनिज़म

तनाव,

डिप्रेशन

भावनात्मक खालीपन

सोशल मीडिया का प्रभाव

अगर इन चीजों से कोई भी व्यक्ति जूझ रहा होता है तो ऐसे में भोजन अक्सर इमोशनल राहत बन जाता है। यानी अधिक मात्रा में खाना खाने से संतोष मिलता है लेकिन बाद में अपराधबोध शुरू हो जाता है।

बुलिमिया के लक्षण क्या होते हैं?

थोड़े समय में बहुत अधिक खाना

खाने के बाद अपराधबोध या शर्म

बार-बार बाथरूम जाना (खाने के तुरंत बाद)

गले में जलन,

दांतों की परत घिसना (बार-बार उल्टी के कारण)

वजन में उतार-चढ़ाव

मूड स्विंग्स


बुलिमिया का शरीर पर क्या असर पड़ता है?

शरीर में पानी और नमक (इलेक्ट्रोलाइट) का असंतुलन

दिल की धड़कन में गड़बड़ी

पेट और गले की समस्या

हार्मोनल असंतुलन

गंभीर मामलों में जान का खतरा


क्या बुलिमिया का इलाज संभव है?

यह सच है कि बुलिमिया का उपचार पूरी तरह संभव है और इससे बाहर आया जा सकता है। इसके इलाज की प्रक्रिया में आमतौर पर शामिल होते हैं...

मनोचिकित्सकीय काउंसलिंग। इसमें भी विशेषकर CBT (Cognitive Behavioral Therapy)

पोषण विशेषज्ञ की मदद

जरूरत पड़ने पर दवाएं

परिवार का सहयोग

जितनी जल्दी पहचान हो जाए, उतना बेहतर परिणाम मिलता है।

कुल मिलाकर बुलिमिया इच्छाशक्ति की कमी नहीं है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसका इलाज संभव है। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखें तो शर्म करने या छिपाने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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