Food Adultration: भारतीय मसालों की शुद्धता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय नियामकों ने भारतीय मसालों की खेप में 'सूडान डाई' (Sudan Dyes) की मौजूदगी पाई है। यह एक औद्योगिक रंग है जिसे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। मिर्च पाउडर और कुछ हद तक हल्दी में इसके बार-बार पाए जाने से वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ वर्षों में यूरोपीय संघ, सिंगापुर और हांगकांग द्वारा भारतीय खेपों को रिजेक्ट करने और वापस मंगवाने के मामले बढ़े हैं। इसके बाद अब भारत में भी मिलावट नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने घरेलू बाजार में भी निगरानी और टेस्टिंग को सख्त कर दिया है। यह जहरीला रंग न केवल भारत की छवि खराब कर रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।
क्या हैं सूडान डाई और क्यों हैं ये खतरनाक?
सूडान डाई सिंथेटिक वसा-विलेय (fat-soluble) अजो यौगिकों का एक समूह है। इसमें मुख्य रूप से सूडान I, II, III और IV शामिल हैं। इनका विकास प्लास्टिक, टेक्सटाइल, मोम और पेट्रोलियम उत्पादों को रंगने के लिए किया गया था। अपने चटकीले लाल-नारंगी रंग और कम कीमत के कारण, इनका अवैध रूप से इस्तेमाल मसालों, सॉस और पाम ऑयल का रंग निखारने के लिए किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने इन्हें 'श्रेणी 3' के कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है। यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में इन्हें खाद्य योज्य (food additives) के रूप में पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। इनका सेवन कैंसर और डीएनए क्षति (genotoxic potential) का कारण बन सकता है।
वैश्विक जांच के घेरे में भारतीय मिर्च और हल्दी
साल 2022 से 2024 के बीच सिंगापुर, हांगकांग और यूरोपीय संघ में ऐसे कई मामले सामने आए। सिंगापुर की खाद्य एजेंसी (SFA) ने भारतीय मिर्च पाउडर में सूडान I और IV का पता लगाया, जिससे कई खेपें वापस मंगानी पड़ीं। हांगकांग के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी (CFS) ने पाया कि कम गुणवत्ता वाली मिर्च को आकर्षक बनाने के लिए इसमें सूडान रेड I मिलाया गया था।
यूरोपीय संघ के रैपिड अलर्ट सिस्टम (RASFF) ने इटली, जर्मनी और नीदरलैंड के बंदरगाहों पर कई भारतीय खेपें खारिज कीं। हल्दी के मामले में भी सूडान डाई और 'मेटानिल येलो' की मौजूदगी के अलर्ट जारी किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि खुले और बिना ब्रांड वाले मसालों में यह जोखिम सबसे अधिक है।
FSSAI के सख्त कदम और नई रणनीति
भारत में FSSAI ने मसाला निर्माताओं को सूडान डाई, रोडामाइन बी और मेटानिल येलो के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। तमिलनाडु, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खाद्य सुरक्षा विभागों ने छापेमारी कर कई नमूनों को जब्त किया है।
नियामक ने अब जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। मसाला पीसने वाली इकाइयों और थोक बाजारों के निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। FSSAI ने अपनी NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को भी अपग्रेड किया है। 'FoSTaC' कार्यक्रम के तहत खाद्य ऑपरेटरों और निरीक्षकों को इन रसायनों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही, निर्यात खेपों की ट्रेसेबिलिटी (traceability) सुनिश्चित करने के लिए स्पाइसेज बोर्ड और सीमा शुल्क विभाग के साथ तालमेल बढ़ाया गया है।
उपभोक्ता कैसे सुरक्षित रहें?
भले ही अधिकांश मामले निर्यात खेपों में मिले हों, लेकिन मिलावटी मसाले घरेलू बाजार में भी पहुँच सकते हैं। विशेष रूप से खुले मिर्च और हल्दी पाउडर में यह जोखिम अधिक है। ये रंग बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों के लिए अत्यंत घातक हो सकते हैं।
बचाव के लिए उपभोक्ताओं को हमेशा FSSAI लोगो और लाइसेंस नंबर वाले ब्रांडेड मसाले ही खरीदने चाहिए। यदि कोई मसाला जरूरत से ज्यादा चटकीला या चमकदार दिखे, तो उसे खरीदने से बचें। भरोसेमंद रिटेलर्स से ही खरीदारी करना और संदिग्ध उत्पादों की शिकायत अधिकारियों से करना एक प्रभावी सुरक्षा उपाय है।