
हर साल देश के 75 हजार बच्चों में डाइग्नॉज होता है कैंसर! इलाज संभव है
बच्चों के कैंसर वयस्कों से अलग होते हैं। इनमें ठोस अंगों के कैंसर की तुलना में ब्लड और शरीर के विकास से संबंधित टिश्यूज कैंसर अधिक पाए जाते हैं। जैसे...
International Childhood Cancer Day: भारत में हर साल 60 से 75 हजार तक नए बच्चों में कैंसर डाइग्नॉज होता है। हालांकि बहुत छोटे बच्चों में कैंसर होने की बात स्वीकार कर पाना अभी भी हमारे समाज के लिए एक चुनौती जैसा बना हुआ है। लेकिन कैंसर उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं है बल्कि कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि की प्रक्रिया है। और यह प्रक्रिया किसी भी आयु में विकसित हो सकती है। बच्चों में कैंसर का स्वरूप वयस्क लोगों से अलग होता है। यह जीवनशैली से कम और कोशिकीय विकास संबंधी त्रुटियों से अधिक जुड़ा होता है।
भारत में हर साल बढ़ते मामले
भारत जैसे विशाल जनसंख्या के देश में बाल कैंसर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, भले ही कुल कैंसर मामलों में इसका प्रतिशत अपेक्षाकृत कम हो। उपलब्ध राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री और विभिन्न संस्थागत अनुमानों के आधार पर भारत में हर वर्ष लगभग 60,000 से 75,000 बच्चों (0–14 वर्ष आयु वर्ग) में कैंसर का निदान होता है। कुछ आंकड़ों में यह संख्या 75,000 से 80,000 तक बताई गई है। यह अंतर इसलिए दिखता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों की डेटा रिपोर्टिंग पूर्ण नहीं है और सभी मामलों का पंजीकरण राष्ट्रीय स्तर पर नहीं हो पाता है।
बच्चों में सबसे अधिक होने वाले कैंसर कौन से हैं?
बच्चों के कैंसर वयस्कों से अलग होते हैं। इनमें ठोस अंगों के कैंसर की तुलना में रक्त और विकासात्मक ऊतकों से जुड़े कैंसर अधिक पाए जाते हैं। जैसे...
ल्यूकेमिया (Leukemia): यह बच्चों में सबसे आम कैंसर है। विशेष रूप से Acute Lymphoblastic Leukemia (ALL) प्रमुख है। इसमें अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में बनने वाली अपरिपक्व सफेद रक्त कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। परिणामस्वरूप शरीर में संक्रमण, एनीमिया और रक्तस्राव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
लिम्फोमा (Lymphoma): यह लिम्फेटिक सिस्टम से जुड़ा कैंसर है। इसमें लसीका ग्रंथियों में सूजन, बुखार और वजन कम होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के ट्यूमर: ब्रेन ट्यूमर बच्चों में दूसरा या तीसरा सबसे सामान्य कैंसर माना जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, उल्टी, संतुलन में कमी या दृष्टि परिवर्तन शामिल हो सकते हैं।
रेटिनोब्लास्टोमा: यह आंखों का कैंसर है, जो मुख्यतः छोटे बच्चों में होता है। कभी-कभी फोटो खींचने पर पुतली में सफेद चमक दिखाई देना इसका प्रारंभिक संकेत हो सकता है।
विल्म्स ट्यूमर (किडनी), न्यूरोब्लास्टोमा और हड्डियों के कैंसर: बच्चों में ये कैंसर बाकी प्रकार की तुलना में अपेक्षाकृत कम होते हैं। लेकिन बच्चों में होने वाले कैंसर में सबसे गंभीर हैं, जो विकासशील ऊतकों से उत्पन्न होते हैं।
बच्चों में कैंसर क्यों होता है?
वयस्कों में कैंसर अक्सर धूम्रपान, मोटापा, प्रदूषण या जीवनशैली से जुड़ा होता है। लेकिन बच्चों में कैंसर अधिकतर कोशिका विभाजन की प्राकृतिक प्रक्रिया में उत्पन्न जीन संबंधी त्रुटियों से जुड़ा होता है।
बच्चों का शरीर का शरीर जब तेजी से विकसित हो रहा होता है, भ्रूण अवस्था से लेकर प्रारंभिक बाल्यावस्था तक, तब शरीर की कोशिकाओं में विभाजन बहुत तेजी से हो रहा होता है। इसी दौरान यदि डीएनए में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए और वह सुधर न पाए तो कैंसर की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अधिकांश मामलों में इसका कोई स्पष्ट बाहरी कारण नहीं मिलता।
भारत में हर साल कैंसर से कितनी मौत होती हैं?
भारत में हर वर्ष कैंसर से मरने वालों की संख्या 14 से 15 लाख के बीच है! इनमें सभी आयु के लोग शामिल हैं। बच्चों के संदर्भ में कैंसर से होने वाली मौतों का कोई सटीक राष्ट्रीय डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट है कि उच्च आय वाले देशों की तुलना में भारत में सर्वाइवल रेट कम है।
जहां विकसित देशों में 80% से अधिक कैंसर पीड़ित बच्चों को सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है, वहीं भारत में औसत सर्वाइवल लगभग 40–60% के बीच आंका जाता है। इसके पीछे का कारण यह नहीं है कि हमारे डॉक्टर्स अक्षम हैं बल्कि डॉक्टर्स के पास मरीज पहुंचते ही तब हैं, जब बीमारी बहुत अधिक बढ़ चुकी होती है।
कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?
बच्चों में कैंसर की पहचान किसी एक लक्षण से नहीं होती। यह एक चरणबद्ध प्रक्रिया है...
कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)
पेरीफेरल स्मीयर (Peripheral Smear)
बोन मेरो बायोप्सी (ल्यूकेमिया में)
MRI / CT Scan (ब्रेन या सॉलिड ट्यूमर में)
बायोप्सी
ट्यूमर मार्कर
शुरुआती पहचान इसलिए कठिन होती है क्योंकि लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। जैसे, बार-बार बुखार, कमजोरी, वजन घटना, सूजन आदि।
बच्चों में कैंसर का इलाज कैसे होता है?
बच्चों में कैंसर का इलाज वयस्कों की तुलना में कई मामलों में अधिक सफल हो सकता है। क्योंकि बच्चों की कोशिकाएं उपचार के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देती हैं।
कीमोथेरेपी: मुख्य उपचार पद्धति। दवाएँ तेजी से विभाजित होने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं।
सर्जरी: सॉलिड ट्यूमर के मामलों में ट्यूमर हटाया जाता है।
रेडिएशन थैरेपी: विशेष रूप से ब्रेन ट्यूमर या कुछ लिम्फोमा में।
टार्गेटेड और इम्यूनोथेरेपी: हाल के वर्षों में विशिष्ट आणविक लक्ष्यों पर आधारित उपचार विकसित हुए हैं।
भारत में प्रमुख कैंसर संस्थानों में उपचार उपलब्ध हैं। लेकिन समान गुणवत्ता सभी क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं है।
बच्चों में कैंसर ठीक होने की संभावना कितनी होती है?
कैंसर पीड़ित बच्चों में इलाज की सफलता इन बातों पर निर्भर करती है...
बीमारी का स्टेज
कैंसर का प्रकार
उपचार शुरू होने का समय
पोषण स्थिति
संक्रमण नियंत्रण
परिवार की आर्थिक और सामाजिक सहायता
यदि निदान प्रारंभिक चरण में हो जाए तो उपचार की सफलता की संभावना बहुत अधिक होती है।
किडनी,पोषण और समग्र देखभाल की भूमिका अहम होती है।
कई बार केवल कैंसर का इलाज ही पर्याप्त नहीं होता। बल्कि इसके साथ ही
किडनी,
हृदय और
यकृत की कार्यक्षमता पर भी निगरानी रखनी पड़ती है। कीमोथेरेपी दवाएं इन अंगों पर प्रभाव डाल सकती हैं। साथ ही कुपोषण भारत में एक महत्वपूर्ण चुनौती है। कुपोषित बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है और कैंसर पीड़ित बच्चों को हर तरह के संक्रमण से बचाना होता है। क्योंकि यदि कोई अन्य बीमारी लग जाए तो इससे इलाज की जटिलता बढ़ जाती है।
क्या बच्चों में होने वाले कैंसर को रोका जा सकता है?
बच्चों में होने वाले अधिकांश कैंसर रोके नहीं जा सकते। क्योंकि उनका संबंध जीवनशैली से कम और जैविक विकास से अधिक होता है। लेकिन समय पर इसका उपचार कराकर इसे पूरी तरह ठीक कर पाना संभव है यदि बच्चे का परिवार ये काम करता रहे...
प्रारंभिक लक्षणों के प्रति जागरूकता
समय पर विशेषज्ञ से परामर्श
उपचार पूरा करना
नियमित फॉलो-अप
बच्चों में कैंसर होना आम बात है, इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि इसका उपचार भी संभव है। समय पर निदान और सही उपचार से बड़ी संख्या में बच्चों को स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सबसे बड़ा जोखिम बीमारी नहीं है बल्कि देर से पहचान है। जागरूकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यवस्थित उपचार, यही तीन स्तंभ हैं, जो बच्चों में कैंसर की दिशा बदल सकते हैं।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

