
हर साल गुर्दे के 2 लाख नए रोगी, डॉक्टर ने गिनाई 5 गलतियां
यहां किडनी रोग विशेषज्ञ द्वारा ऐसी 5 बड़ी गलतियां बताई गई हैं, जो युवाओं की किडनी को धीरे-धीरे कमजोर कर रही हैं और क्रॉनिक किडनी डिजीज की तरफ धकेल रही हैं...
Kidney Health: भारत में इस समय करीब 13 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज की चपेट में हैं। और इनमें से ज्यादातर को लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना पड़ता है। क्योंकि गुर्दा प्रत्यारोपण की कुल आवश्यकता का 5 से 10 प्रतिशत ही प्रत्यारोपण हो पाता है। अधिकांश मामलों में उचित डोनर नहीं मिल पाता। कुल प्रत्यारोपण के अधिकांश मामलों में किडनी देने वाला व्यक्ति परिवार का ही सदस्य होता है क्योंकि हमारे देश में मृत व्यक्ति के अंगदान के प्रति जागरूकता काफी कम है। यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्राजित मजूमदार ने दैनिक जीवन से जुड़ी वो 5 गलतियां बताई, जो कम उम्र में ही लोगों की किडनी खराब होने का कारण बन रही हैं...
किडनी की सेहत से जुड़ी लापरवाही
किडनी की सेहत पर ज्यादातर लोग तभी ध्यान देते हैं, जब जांच में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ आता है या डॉक्टर किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) कराने को कहते हैं। लेकिन सच यह है कि किडनी अचानक खराब नहीं होती बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतें धीरे-धीरे इसे नुकसान पहुंचाती रहती हैं। और जब ये गलत आदतें छोटी उम्र से शुरू हो जाती हैं तो कम उम्र के किडनी मरीजों की संख्या भी बढ़ती जाती है। आज के युवाओं की जीवनशैली में कुछ ऐसी सामान्य गलतियां शामिल हो गई हैं, जो लंबे समय में किडनी पर बुरा असर डाल रही हैं...
दर्द निवारक दवाओं का बार-बार सेवन
आजकल सिरदर्द, बदन दर्द या मामूली परेशानी में भी कई युवा बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं यानी पेनकिलर्स लेने लगते हैं। ऐसी दवाओं में शामिल नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) जैसे, इबुप्रोफेन (Ibuprofen) और डाइक्लोफेनैक (Diclofenac) का अधिक उपयोग किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (ब्लड वैसेल्स) को नुकसान पहुंचा सकता है।
अलग-अलग चिकित्सकीय अध्ययनों (मेडिकल रिसर्च) में यह पाया गया है कि लंबे समय तक इन दवाओं का अनियंत्रित उपयोग क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का जोखिम बढ़ा सकता है। इमरजेंसी दवाओं की किट अपने फैमिली डॉक्टर की सलाह पर ही तैयार करें।
अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट और जिम पाउडर
फिटनेस के नाम पर कई युवा बिना विशेषज्ञ की सलाह के अधिक मात्रा में प्रोटीन पाउडर या सप्लीमेंट लेने लगते हैं। किडनी का काम ही प्रोटीन के अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करना है। जब बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन लिया जाता है, तो किडनी पर इसे फिल्टर करने का अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो समय के साथ किडनी की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।
यदि पहले से किडनी की कमजोरी वाले लोग बिना डॉक्टर की सलाह के अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट लेने लगें तो किडनी की स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह लिए कोई भी सप्लिमेंट नहीं लेना चाहिए।
बार-बार पेशाब रोकना
पेशाब का दबाव बनने के बाद भी कई लोग अपने शरीर के संकेतों को अनसुना कर कुर्सी पर बैठ अपना काम करते रहते हैं। थोड़ी देर में जाता हूं, बस 5 मिनट ओर... इस तरह करते-करते वे घंटों यूरिन का प्रेशर रोककर रखते हैं। जब कोई व्यक्ति लगातार इस तरह करता है तो एक समय बाद उसे शरीर के इस संकेत को समझने में देरी होने लगती है। लेकिन इसका बहुत बुरा असर किडनी की सेहत पर पड़ रहा होता है। लंबे समय में इससे मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) का खतरा बढ़ जाता है। यदि संक्रमण बार-बार होता है तो यह धीरे-धीरे किडनी तक पहुंचकर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए जैसे ही पेशाब का दबाव बने आप तुरंत सबसे पहले वॉशरूम जाइए।
कम पानी पीना
हमारी किडनी का मुख्य काम शरीर से विषैले पदार्थों को छानकर मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है। जब शरीर में पानी कम होता है तो किडनी को यह काम करने में अधिक दबाव झेलना पड़ता है।
किडनी की सेहत पर आधारित अलग-अलग अध्ययनों से पता चलता है कि लंबे समय तक कम पानी पीने से किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है और किडनी की फिल्टरिंग क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले देशों जैसे भारत में हर दिन पर्याप्त जल सेवन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसलिए हर दिन 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं।
अत्यधिक नमक और प्रसंस्कृत भोजन
आज के युवा बहुत अधिक मात्रा में प्रसंस्कृत भोजन यानी प्रॉसेस्ड फूड, फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और इंस्टेंट भोजन में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब शरीर में नमक ज्यादा पहुंचता है तो रक्तचाप (बीपी) बढ़ने लगता है।
उच्च रक्तचाप किडनी की सूक्ष्म रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है। विश्वभर में किडनी खराब होने के प्रमुख कारणों में हाइपरटेंशन और डायबिटीज को माना जाता है। इसलिए बीपी और शुगर नियंत्रित रखें साथ ही प्रॉसेस्ड फूड इत्यादि का बहुत सीमित सेवन करें।
किडनी शरीर का ऐसा अंग है, जो चुपचाप काम करता रहता है और शुरुआती नुकसान के संकेत भी स्पष्ट नहीं देता। इसलिए जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक कई बार नुकसान काफी बढ़ चुका होता है। यदि आप अपनी सेहत से जुड़े ऐसे किसी भी खतरे का सामना नहीं करना चाहते हैं तो डॉक्टर मजूमदार की बातों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ किडनी के साथ स्वस्थ जीवन जिएं।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

