दिमाग ठीक रखना है तो डांस करें, हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल की सलाह
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डांस करने से मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है और डिमेंशिया का खतरा कम होता है

दिमाग ठीक रखना है तो डांस करें, हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल की सलाह

हार्वर्ड और अन्य अंतरराष्ट्रीय मेडिकल संस्थान डांस को केवल फिटनेस नहीं बल्कि ब्रेन हेल्थ प्रिस्क्रिप्शन के रूप में देखने लगे हैं। जानें पूरी बात...


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डांस (नृत्य) की कोई भी विधा (फॉर्म)हो इसे अक्सर मनोरंजन और हल्के व्यायाम के रूप में देखा जाता है। लेकिन आधुनिक न्यूरोसाइंस इसे दिमाग के लिए एक शक्तिशाली और मल्टी टास्किंग ट्रेनिंग मानती है। इस बारे में New England Journal of Medicine में प्रकाशित एक बड़े कोहोर्ट अध्ययन में यह सामने आया कि जो लोग नियमित रूप से डांस जैसी शारीरिक गतिविधि करते हैं, उनमें डिमेंशिया का खतरा लगभग 70 से 75 प्रतिशत तक कम पाया जाता है...



न्यूरोप्लास्टिसिटी बढ़ाता है डांस

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि डांस के दौरान दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, हिपोकैंपस और मोटर नेटवर्क एक साथ सक्रिय होते हैं। यही संयुक्त सक्रियता दिमाग की न्यूरोप्लास्टिसिटी (दिमाग क्षतिग्रस्त हिस्से का काम आसपास के हिस्सों से करवाने लगता है) क्षमता को मजबूत करती है और संज्ञानात्मक रिजर्व (दिमाग की वह अतिरिक्त क्षमता, जो उसे उम्र, बीमारी या न्यूरोडिजेनेरेशन के बावजूद लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखती है।) को बढ़ाती है। और उम्र के साथ होने वाली स्मृति क्षति के खिलाफ सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।



तनाव नियंत्रित करने के लिए करें डांस

मानसिक सेहत पर डांस के प्रभाव को लेकर Frontiers in Psychology में 2022 में प्रकाशित एक सिस्टमेटिक रिव्यू यह स्पष्ट करता है कि नियमित नृत्य करने वाले लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद के स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई। अध्ययन के अनुसार, डांस एक लयबद्ध गतिविधि है, जो दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्राव को बढ़ाती है। वहीं कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन को नियंत्रित करती है। यही कारण है कि डांस केवल शरीर को नहीं बल्कि भावनात्मक संतुलन को भी मजबूत करता है।


हार्ट हेल्थ को सुधारने के लिए डांस

हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में Journal of Aging and Physical Activity में प्रकाशित एक जनसंख्या आधारित अध्ययन बताता है कि सोशल डांसिंग करने वाले व्यक्तियों में हाई ब्लड प्रेशर अच्छी तरह नियंत्रित रहता है। साथ ही खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर कम होता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल HDL में सुधार देखा जाता है। इसके साथ ही इंसुलिन सेंसिटिविटी और शरीर का मेटाबॉलिक संतुलन भी बेहतर पाया गया। शोध के अनुसार, डांस हृदय को धीरे लेकिन स्थायी रूप से मजबूत करता है, जिससे दिल और दिमाग दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

हार्वर्ड हेल्थ ऑनलाइन के अनुसार, डांसिंग कार्डियोवर्कआउट की तरह दिल की बीमारी से जुड़ी मौत के जोखिम को कम कर सकता है। एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि मध्यम-तीव्रता डांसिंग शरीर को फिट रखती है और हृदय रोगियों की तुलना में स्वस्थ लोगों में कोरोनरी मौत का खतरा कम होता दिखा।


मस्तिष्क में ग्रे मैटर बढ़ाने के लिए

डांस और दिमाग की संरचना के बीच संबंध को PLoS ONE में 2021 में प्रकाशित एक प्रयोगात्मक अध्ययन ने और स्पष्ट किया। इस शोध में पाया गया कि सामान्य दोहराए जाने वाले व्यायाम की तुलना में डांस ट्रेनिंग बुज़ुर्गों के दिमाग में अधिक सकारात्मक संरचनात्मक (कॉग्नेटिव) बदलाव लाती है। विशेष रूप से ग्रे मैटर वॉल्यूम और न्यूरल नेटवर्क कनेक्टिविटी में सुधार देखा गया, जिसे न्यूरोडिजेनेरेशन की गति को धीमा करने वाला कारक माना जाता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (HMS) के प्रकाशनों में डांस और दिमाग के बीच सीधा संबंध दिखाया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि डांस ब्रेन की कंडीशनिंग में सकारात्मक भूमिका निभाता है यह न केवल मूड को बेहतर बनाता है बल्कि न्यूरल नेटवर्क्स को स्टिम्युलेट करके नए कनेक्शंस बनाने में मदद करता है, खासकर उन हिस्सों में जो कार्यकारी कार्य, लंबी अवधि की स्मृति और स्थानिक पहचान से जुड़े हैं।


बुजुर्गों की सेहत के लिए जरूरी

सामाजिक स्तर पर डांस के प्रभाव को Arts & Health जर्नल में 2020 में प्रकाशित अध्ययन में यह बात सामने आई कि समूह में नृत्य करने वाले बुज़ुर्गों में भी अकेलेपन और अवसाद की भावना कम हुई और साथ ही इनमें आत्म-संतुष्टि और सामाजिक जुड़ाव में वृद्धि देखी गई। शोध के अनुसार, सामाजिक संपर्क स्वयं में दिमाग के लिए एक सुरक्षा की तरह काम करते हैं और जब ये शारीरिक गतिविधि के साथ जुड़ते हैं, जैसे ग्रुप डांस जैसी ऐक्टिविटी के माध्यम से तो इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

इन सभी शोधों को जोड़कर देखें तो विज्ञान यह स्पष्ट संकेत देता है कि डांस केवल शरीर की हलचल नहीं बल्कि दिमाग की गहरी एक्सरसाइज है। यह दिमाग की कोशिकाओं को सक्रिय रखता है। साथ ही सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को नियंत्रित करता है। हृदय को मजबूत करता है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यही कारण है कि आज हार्वर्ड और अन्य अंतरराष्ट्रीय मेडिकल संस्थान डांस को केवल फिटनेस नहीं बल्कि ब्रेन हेल्थ प्रिस्क्रिप्शन के रूप में देखने लगे हैं।



डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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