
हरियाणा में अप्रशिक्षित हाथों में इलाज: फार्मासिस्ट के 568 पद खाली, मरीजों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा!
Haryana healthcare system: पूरे प्रदेश में फार्मासिस्टों की भारी कमी है, जिससे कार्यरत फार्मासिस्टों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। इस संबंध में कई बार सरकार को मांगपत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
Haryana Health Department: हरियाणा के अस्पतालों में डॉक्टर ने दवा लिख दी… लेकिन वह दवा सही है या नहीं, कितनी मात्रा में लेनी है और उसका असर क्या होगा, यह बताने वाला ही मौजूद नहीं है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की भारी कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की एक खतरनाक तस्वीर सामने रख दी है, जहां सैकड़ों खाली पद मरीजों की सेहत के लिए बड़ा जोखिम बन चुके हैं। प्रदेश में फार्मासिस्ट के कुल 1163 स्वीकृत पदों में से 568 पद फिलहाल रिक्त हैं।
इस कमी का सीधा असर अस्पतालों की दवा वितरण व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई अस्पतालों में दवाएं प्रशिक्षु कर्मचारियों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों या स्टाफ नर्सों द्वारा वितरित की जा रही हैं। इन कर्मचारियों को न तो दवाओं के साल्ट की पूरी जानकारी होती है और न ही उनके विकल्प, सही डोज या संभावित साइड इफेक्ट्स की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मरीजों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ है।
बड़े जिलों में हालात ज्यादा खराब
करनाल, सिरसा और अंबाला जैसे बड़े जिलों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्तर पर कई जगह बिना किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट के ही दवाओं का वितरण किया जा रहा है। फार्मासिस्ट लगातार रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नई भर्ती नहीं हो रही, जिससे यह संकट और गहराता जा रहा है।
क्या कहता है कानून
फार्मेसी अधिनियम 1948 के अनुसार, पंजीकृत फार्मासिस्ट के अलावा कोई भी व्यक्ति किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर के नुस्खे पर दवा तैयार, मिश्रित या वितरित नहीं कर सकता। फार्मासिस्टों की कमी के कारण न केवल दवा वितरण, बल्कि दवाओं का भंडारण, खरीद प्रक्रिया, टीकों की कोल्ड चेन और अन्य तकनीकी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन योग्य स्टाफ के अभाव में यह लक्ष्य अधूरा रह जा रहा है।
फार्मासिस्ट की अहम भूमिका
फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी सिर्फ दवा देना नहीं होती। इसमें मरीज को दवा लेने का सही तरीका और समय बताना, लिखित निर्देश देना, संभावित साइड इफेक्ट्स की जानकारी देना, दवा को समझने में मदद करना और यह समझाना शामिल है कि निर्धारित दवा शरीर पर कैसे काम करती है।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया मांगपत्र
एसोसिएशन ऑफ गवर्नमेंट फार्मासिस्ट्स ऑफ हरियाणा के अनुसार, पूरे प्रदेश में फार्मासिस्टों की भारी कमी है, जिससे कार्यरत फार्मासिस्टों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। इस संबंध में कई बार सरकार और उच्च अधिकारियों को मांगपत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। 13 जनवरी को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर प्रदेश की स्थिति से अवगत कराया गया और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग रखी गई है।
जिलेवार रिक्त पदों की स्थिति
प्रदेश के कई जिलों में फार्मासिस्ट के पद बड़ी संख्या में खाली हैं। हिसार में 72 स्वीकृत पदों में 27, अंबाला में 63 में से 50, सिरसा में 60 में से 44, करनाल में 76 में से 46 और यमुनानगर में 53 में से 36 पद रिक्त हैं। इसके अलावा नारनौल, जींद, फतेहाबाद, पानीपत, पलवल, भिवानी, रेवाड़ी, कैथल, पंचकुला, गुरुग्राम, झज्जर, सोनीपत, चरखी दादरी, नूंह, कुरुक्षेत्र, रोहतक और फरीदाबाद में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं।

