चश्मा पहनते हैं या नहीं, होली पर ऐसे रखें अपनी आंखों का ध्यान
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होली पर रंगों के बुरे असर से आंखों को कैसे बचाएं?

चश्मा पहनते हैं या नहीं, होली पर ऐसे रखें अपनी आंखों का ध्यान

होली के रंग में आंखों से जुड़ी किसी समस्या का भंग ना पड़े इसके लिए जरूरी है कि आप कुछ छोटी बातों का ध्यान रखें। ये टिप्स खुद आंख रोग विशेषज्ञ ने दिए हैं...


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Holi 2026: हर साल होली के बाद नेत्र चिकित्सकों के पास आंखों में जलन, लालिमा, सूजन और संक्रमण के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जाती है। होली का उत्सव रंग, उमंग और सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन रंगों से हम खेलते हैं, वही रंग हमारी आंखों के लिए कितना बड़ा जोखिम बन सकते हैं... होली खेलने के बाद आपको आंखों से जुड़ी किसी समस्या का सामना ना करना पड़े इसके लिए शार्प साइट आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक, डॉक्टर अनुराग वाही ने कुछ सुझाव दिए हैं...

आंखें शरीर का अत्यंत संवेदनशील अंग हैं। रंगों में मौजूद रासायनिक तत्व, धात्विक कण और सूक्ष्म कण (माइक्रोपार्टिकल्स) कॉर्निया यानी की बाहरी संरचना और कंजंक्टाइवा यानी पतली, पारदर्शी श्लेष्मिक झिल्ली, जो आंख के सफेद हिस्से (स्क्लेरा) और पलकों की अंदरूनी सतह को ढकती है। को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।


डॉक्टर अनुराग वाही ने बताया होली के रंगों से आंखों को कैसे बचाएं?



रंगों से आंखों को किस तरह की समस्या हो सकती है?

होली के बाजार में मिलने वाले सस्ते और चमकीले रंग अक्सर औद्योगिक डाई, भारी धातुएं (जैसे सीसा, क्रोमियम, पारा) और कांच के महीन कण तक मिला कर बनाए जाते हैं। ये आंखों के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकते हैं। इनके कारण आंखों को होने वाली सबसे सामान्य समस्याएं इस प्रकार हैं...

1. एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (Allergic Conjunctivitis)

आंखों में तेज खुजली होना,

आंख से पानी आना,

आंखों में लालिमा और सूजन।

जिन लोगों को पहले से आंख संबंधी एलर्जी है, उनमें ऐसी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।

2. केमिकल कंजंक्टिवाइटिस (Chemical Conjunctivitis)

रासायनिक रंग आंख की बाहरी परत में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं।

3. कॉर्नियल अब्रेशन (Corneal Abrasion)

अगर रंग में कांच के महीन कण हों तो कॉर्निया पर खरोंच आ सकती है। इससे तेज दर्द, धुंधला दिखना और रोशनी से चुभन हो सकती है।

4. संक्रमण (Eye Infection)

गंदे पानी या संक्रमित हाथों से आंख छूने पर बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण हो सकता है। इसलिए होली खेलने में जिस पानी का उपयोग करें, वह पूरी तरह साफ और संक्रमण मुक्त होना चाहिए।

5. गंभीर स्थिति – कॉर्नियल अल्सर (Corneal Ulcer)

अगर समय पर उपचार न मिले तो कॉर्निया में घाव बन सकता है, जो दृष्टि के लिए खतरा बन सकता है।



होली खेलते समय आंखों को कैसे सुरक्षित रखें?

अब प्रश्न यह है कि क्या होली बिना जोखिम के खेली जा सकती है? बिल्कुल। बस कुछ सावधानियां आवश्यक हैं।

सबसे पहले, चश्मा या सनग्लास पहनें। बड़े फ्रेम वाला चश्मा आंखों को सीधे रंगों से बचाने में मदद करता है।

दूसरा, कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें। लेंस के नीचे रंग फंस सकते हैं, जिससे संक्रमण और कॉर्नियल चोट का खतरा बढ़ जाता है।

तीसरा, सूखे और प्राकृतिक रंगों का चयन करें। हल्दी, चंदन, गुलाब या फूलों से बने रंग अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं।

चौथा, किसी पर जबरन रंग न डालें और न स्वयं आंखों के पास रंग लगने दें। चेहरे पर रंग लगाते समय आंखों से दूरी बनाए रखें।

पांचवां, रंग लगने के बाद आंखें न मलें। रगड़ने से रंग और अंदर जा सकता है और खरोंच का खतरा बढ़ जाता है।


अगर आंख में रंग चला जाए तो क्या करें?

सबसे पहले और तुरंत आंखों को साफ और ठंडे पानी से धो लें। आंख का धोना लगातार 10–15 मिनट तक जारी रखें। आंखें खोलकर पानी बहने दें ताकि कण बाहर निकल जाएं।

अगर जलन बनी रहे, धुंधला दिखे या दर्द हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। स्वयं से स्टेरॉयड या कोई भी आई ड्रॉप न डालें। गलत दवा स्थिति बिगाड़ सकती है।


होली खेलते समय किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

जिनको पहले से एलर्जी या ड्राई आई की समस्या है

जिनकी आंखों की हाल ही में सर्जरी हुई हो

बच्चे और बुजुर्ग

कॉन्टैक्ट लेंस उपयोग करने वाले

इन लोगों में जटिलताओं की संभावना अधिक होती है।

क्या प्राकृतिक रंग पूरी तरह सुरक्षित हैं?

यह एक सामान्य भ्रांति है कि प्राकृतिक शब्द का अर्थ पूर्ण सुरक्षा है। अगर रंग स्वच्छ वातावरण में तैयार न किए गए हों तो उनमें भी सूक्ष्म संक्रमण का जोखिम हो सकता है। इसलिए विश्वसनीय स्रोत से ही रंग खरीदें। होली आनंद का पर्व है लेकिन दृष्टि अनमोल है। कुछ मिनटों की लापरवाही जीवनभर की परेशानी में बदल सकती है। इसलिए इस बार रंगों से पहले आंखों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। रंग खेलें लेकिन समझदारी के साथ।


घर पर होली के रंग कैसे बनाएं?

होली के प्राकृतिक रंग आप घर पर भी बना सकते हैं। जैसे, 1 कटोरी चावल मिक्सी में डालें और इसमें दो चम्मच हल्दी पाउडर डाल दें, आपका पीला गुलाल तैयार है। इसी तरह आप प्राकृतिक रोली या चंदन से भी चावल के आटे के साथ गुलाल तैयार कर सकते हैं।


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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