
खर्राटे और स्लीप एपनिया बढ़ाते हैं डिमेंशिया का खतरा, ना करें अनदेखी
खर्राटे क्या होते हैं ये आप जानते हैं और स्लीप एपनिया गहरी नींद में सोते समय अचानक सांस लेने में होने वाली समस्या को कहते हैं। ये दोनों ही डिमेंशिया का रिस्क...
सोते समय बार-बार सांस रुकना सिर्फ खर्राटों तक सीमित नहीं होता। बहुत से लोग कहते हैं कि “थकान ज्यादा थी इसलिए नींद में सांस रुक गई होगी, चिंता की कोई बात नहीं!” लेकिन सच्चाई यह है कि नींद में सांस रुकना यानी स्लीप एपनिया धीरे-धीरे दिमाग को ऐसे नुकसान पहुंचाता है, जिसका असर सालों बाद डिमेंशिया, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर के रूप में दिखाई देता है।
स्लीप एपनिया से होने वाला खतरा
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जिन लोगों को स्लीप एपनिया होता है, उनके ब्रेन में माइक्रोब्लीड यानी सूक्ष्म रक्तस्राव बनने का खतरा काफी बढ़ जाता है। माइक्रोब्लीड को हम आंखों से नहीं देख सकते लेकिन MRI में स्पष्ट नजर आता है। यही माइक्रोब्लीड आगे चलकर मस्तिष्क की नसों में कमजोरी पैदा करता है और यहीं से डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों की खतरा बढ़ता है। यानी समस्या खर्राटों से प्रारंभ होती है लेकिन समाप्त दिल या दिमाग की खराब स्थिति पर होती है।
ब्लड प्रेशर और स्लीप एपनिया का कनेक्शन
रोचक बात यह है कि परिणाम मात्र मस्तिष्क तक सीमित नहीं रहते। हालही एक और क्लिनिकल स्टडी में सामने आया कि सोने का अनियमित और खराब नींद ब्लड प्रेशर को हाई रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शरीर का सर्केडियन रिद्म तब खराब होता है, जब व्यक्ति रोज अलग-अलग समय पर सोता या उठता है और इसकी सबसे पहली चोट दिल और धमनियों पर पड़ती है। वही समस्या स्लीप एपनिया में भी होती है। रातभर शरीर चौंककर सांस लेने की कोशिश करता है, हार्ट रेट ऊपर-नीचे होती रहती है और यही निरंतर तनाव धीरे-धीरे हाइपरटेंशन में बदल जाता है।
यह कहती है रिसर्च?
यूरोपियन मेडिकल जर्नल में प्रकाशित Obstructive Sleep Apnea and Cerebral Microbleeds in Middle‑Aged and Older Adults नामक एक कोहोर्ट स्टडी में (1,441 वयस्कों पर, 8-साल फॉलो-अप के दौरान) यह देखा गया कि जिन लोगों में moderate-to-severe Obstructive Sleep Apnea (OSA) था, उनके मस्तिष्क में दिमाग के अंदर होने वाले बहुत सूक्ष्म रक्तस्राव (Cerebral Microbleeds (CMBs) विकसित होने का जोखिम दोगुना से भी अधिक था। विशेषकर उन लोगों की तुलना में, जिनमें OSA नहीं था।
इस खोज का मतलब यह है कि स्लीप एपनिया सिर्फ खर्राटे/नींद-खराबी नहीं। यह एक ऐसा खतरा बन सकता है, जो मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त-नलिकाओं (small vessels) को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रहा हो। विशेषज्ञ अब इसे भविष्य में हो सकने वाले हार्ट स्ट्रोक, संज्ञानात्मक सेहत से जुड़ी समस्या, याददाश्त कमजोर होना, डिमेंशिया जैसे खतरों के भी।
सेहत की डोर
दिमाग और दिल दोनों की सेहत की डोर नींद के साथ बंधी हुई है। बिना इलाज के स्लीप एपनिया आगे चलकर इन समस्याओं की संभावना बढ़ा देता है...
• याददाश्त कमजोर होना,
• फोकस कम होना
• ब्रेन में माइक्रोब्लीड
• वैस्कुलर डिमेंशिया
• स्ट्रोक
• हाई ब्लड प्रेशर
• दिन के समय थकान रहना
• अचानक नींद का आना
समस्या की पहचान कैसे करें?
नींद में तेज खर्राटे,अचानक घुटन के साथ नींद खुलना, सुबह भारी सिरदर्द, दिनभर चिड़चिड़ापन और 8 घंटे सोने के बाद भी थकान न उतरना। शरीर द्वारा मिलने वाले इन संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका अर्थ है कि शरीर आपसे सहायता मांग रहा है।
उपचार में देरी हर महीने मस्तिष्क की संरचना में छोटे-छोटे नुकसान बढ़ाती जाती है। अच्छी बात यह है कि समय रहते सोने का नियमित पैटर्न बनाने से, वजन नियंत्रित रखने से और डॉक्टर के मार्गदर्शन में स्लीप एपनिया का उपचार लेने से ब्रेन और हार्ट दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
भविष्य में स्वस्थ रहने के लिए आज से ही जीवनशैली में बदलाव करना आवश्यक है। क्योंकि नींद वह आवश्यक औषधि है, जिसे हम तो हल्के में लेते हैं लेकिन शरीर उसे सबसे अधिक गंभीरता से लेता है।
डॉक्टर का सुझाव
मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज के डॉक्टर राजेश कुमार का कहना है कि "आज के समय में सेडेंट्री लाइफस्टाइल के चलते मोटापा बढ़ रहा है। स्क्रीन एक्सपोजर अधिक होने के कारण ज्यादातर लोग नींद पूरी नहीं ले पा रहे हैं। और जिन्हें लगता है कि वो 8 घंटे सोते हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों का सोने और जागने का समय निश्चित नहीं है। दैनिक जीवन से जुड़े ऐसे ही कई अन्य कारणों के साथ ऑब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या भी सोसायटी में बढ़ रही है। ऑब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एपनिया के कारण ब्रेन में पहुंचने वाले ऑक्सिजन का फ्लो घटता-बढ़ता रहता है, जो ब्रेन के इंटरनल मैकेनिज़म पर बुरा प्रभाव डालता है और कई मामलों में ब्रेन में माइक्रोब्लीड का कारण बनता है। इसलिए स्लीप एपनियां और खर्राटों की समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए।"
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

