मेलाज्मा हॉर्मोन्स की समस्या है, चेहरे पर उभरे दागों को ना करें अनदेखा
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चेहरे के ऐसे दागों को अनदेखा ना करें, ये मेलाज्मा हो सकता है

मेलाज्मा हॉर्मोन्स की समस्या है, चेहरे पर उभरे दागों को ना करें अनदेखा

मेलाज्मा, हार्मोनल असंतुलन, जैसे गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियां या थायरॉइड असंतुलन से होता है। मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं को जरूरत से ज्यादा सक्रिय कर देता है


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मेलाज्मा को लेकर कई लोग सोचते हैं कि चेहरे पर गहरे धब्बे केवल धूप या स्किन-केयर की कमी से आते हैं। लेकिन जब ये महीनों तक बने रहें, क्रीम बदलने से भी न जाएं और हर धूप में गहरे हो जाएं तब यह केवल पिगमेंटेशन का मामला नहीं रहता। इसे चिकित्सा में मेलाज्मा कहा जाता है, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्सों में मेलानिन सामान्य से अधिक बनता है और चेहरे पर गहरे भूरे या स्लेटी धब्बे दिखाई देते हैं। MSD Manuals Dermatology के अनुसार, यह न संक्रमण है, न एलर्जी, न कैंसर। लेकिन चेहरे की त्वचा पर दिखने के कारण मानसिक और आत्म-विश्वास पर असर डालता है।

क्यों होता है मेलाज्मा?

मेलाज्मा केवल धूप की वजह से नहीं होता। Journal of Clinical and Aesthetic Dermatology (2018) में बताया गया है कि हार्मोनल असंतुलन, जैसे गर्भावस्था, हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां या थायरॉइड असंतुलन, मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं को जरूरत से ज्यादा सक्रिय कर देता है। इसके अलावा JAMA Dermatology (2021) के अध्ययन में यह भी पाया गया कि परिवार में अगर किसी को मेलाज्मा रहा है तो अगली पीढ़ी में इसकी संभावना बढ़ जाती है।

मेलाज्मा के लिए धूप केवल उत्प्रेरक (ट्रिगर) है, कारण नहीं। British Journal of Dermatology (2019) में प्रकाशित शोध के अनुसार, UVA और UVB किरणें पहले से सक्रिय मेलानोसाइट्स को और उत्तेजित कर देती हैं, जिससे धब्बे गहरे हो जाते हैं।

क्यों मेलाज्मा बार-बार लौटता है?

मेलाज्मा कई बार ठीक होकर भी लौट आता है। PubMed Central (2023) के अध्ययन में दिखाया गया कि मेलानिन केवल त्वचा की ऊपरी परत में नहीं बल्कि डर्मिस तक जा सकता है। जब वर्णक गहराई में जमा हो जाता है तो साधारण क्रीम केवल अस्थायी हल्का असर दिखा पाती हैं। यही कारण है कि इसे अक्सर क्रॉनिक और पुनरावर्ती स्थिति माना जाता है।

मेलाज्मा का उपचार क्या है?

American Academy of Dermatology (2020) के अनुसार, मेलाज्मा को पूरी तरह मिटाना मुश्किल है लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे प्रभावी तरीका है सुरक्षा और रोकथाम। इसके लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन हर दिन उपयोग करना, UVA, UVB और दृश्यमान प्रकाश दोनों से सुरक्षा करना। कुछ अध्ययन जैसे Link Springer, 2017 में सामने आया कि सनस्क्रीन में आयरन ऑक्साइड जैसे अवरक्त ब्लॉकर्स मेलाज्मा को हल्का करने में अतिरिक्त मदद करते हैं।

अवरक्त ब्लॉकर्स वे पदार्थ होते हैं जो त्वचा को अवरक्त किरणों (Infrared rays) से बचाते हैं। ये किरणें सूरज से निकलती हैं, आंखों को दिखती नहीं हैं लेकिन त्वचा के अंदर तक पहुंच जाती हैं और फिर वहां गर्मी और सूजन पैदा करती हैं। यही सूजन मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं को सक्रिय कर देती है।

टॉपिकल एजेंटों में हाइड्रोकिनोन, ट्रिटिनोइन, कोजिक एसिड और नायसिनामाइड शामिल हैं। Springer Dermatology Research, 2017 में इनकी प्रभावकारिता का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है, जिसमें दिखाया गया कि इनका सही संयोजन हल्का पिगमेंटेशन और लंबे समय तक नियंत्रण देने में मदद करता है।

केमिकल पील्स और लेज़र थेरेपी भी कुछ मामलों में उपयोग की जाती हैं। Dermatologic Surgery Journal (2024) में बताया गया कि ये उपाय पिगमेंट को हल्का कर सकते हैं। लेकिन त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ाने और धब्बों के लौटने का जोखिम भी होता है।

नए शोधों में PubMed (2019) यह भी दिखाते हैं कि ओरल ट्रानेक्सामिक एसिड शरीर में पिगमेंटेशन मार्ग को प्रभावित कर सकता है और कुछ मरीजों में मेलाज्मा को हल्का करने में मदद करता है। हालांकि इसकी लंबी अवधि की सुरक्षा पर और अध्ययन की जरूरत है।

शरीर का संदेश समझें

मेलाज्मा केवल त्वचा की समस्या नहीं है। यह शरीर के हार्मोन्स, आनुवांशिक कारणों और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है। PubMed (2021) के अनुसार, इसे केवल सौंदर्य दोष मानकर छुपाना या तेजी से मिटाने की कोशिश करना स्थिति को और जटिल बना सकता है। वैज्ञानिक दृष्टि से सही जानकारी, धैर्य और चिकित्सीय मार्गदर्शन के साथ मेलाज्मा को नियंत्रित और हल्का किया जा सकता है।


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

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